पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध; वैश्विक समूह
संदर्भ
- 2025 में, चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद (QUAD) एक रणनीतिक विराम की अवधि में प्रवेश कर गया, जिसे प्रायः ‘अंतराल का वर्ष’ कहा गया, क्योंकि इसे ऐसे बड़े अवरोधों का सामना करना पड़ा जिन्होंने QUAD की एकता, उद्देश्य एवं दीर्घकालिक व्यवहार्यता की परीक्षा ली।
चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद (QUAD) के बारे में
- QUAD का विकास: QUAD की उत्पत्ति 2004 से जुड़ी है, जब भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने हिंद महासागर सुनामी के बाद मानवीय राहत का समन्वय किया। इसने बहुपक्षीय सहयोग की नींव रखी।
- 2007 में, जापान ने एक औपचारिक ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद’ का प्रस्ताव रखा, जिसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने समर्थन दिया।
- लेकिन 2008 में, ऑस्ट्रेलिया इससे अलग हो गया, यह कहते हुए कि इससे चीन नाराज़ हो सकता है।
- 2017 में पुनर्जीवन: मनीला में ASEAN शिखर सम्मेलन के दौरान, दक्षिण चीन सागर और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में चीन की आक्रामक गतिविधियों की पृष्ठभूमि में QUAD को पुनर्जीवित किया गया। तब से, मंत्रीस्तरीय एवं नेताओं के शिखर सम्मेलन ने इस संवाद को संस्थागत रूप दिया।
- 2021 से 2024 के बीच: QUAD ने छह नेता-स्तरीय शिखर सम्मेलन आयोजित किए, जिससे रक्षा, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग सुदृढ़ हुआ।
- 2007 में, जापान ने एक औपचारिक ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद’ का प्रस्ताव रखा, जिसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने समर्थन दिया।
- यह एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध मंच के रूप में महत्व रखता रहा।
सदस्य राष्ट्रों की भूमिका
- प्रत्येक सदस्य राष्ट्र अपनी विशिष्ट क्षमताएँ लाता है: जापान की तकनीक और वित्त, अमेरिका की सैन्य पहुँच, भारत की भौगोलिक केंद्रीयता, तथा ऑस्ट्रेलिया की दक्षिण प्रशांत में क्षेत्रीय उपस्थिति।
- भारत: रणनीतिक स्वायत्तता, समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर में चीन के प्रभाव को संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित करता है। ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास’ (SAGAR) को बढ़ावा देता है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका: QUAD को अपनी ‘स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक’ रणनीति का केंद्र मानता है, समुद्री स्वतंत्रता बनाए रखने एवं अधिनायकवादी विस्तार का सामना करने का साधन।
- जापान: नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था और FOIP नीति का समर्थन करता है।
- ऑस्ट्रेलिया: क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और चीन से परे साझेदारियों के विविधीकरण को सुनिश्चित करता है।
QUAD का महत्व और महत्ता
- स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक सुनिश्चित करना: QUAD इंडो-पैसिफिक में विशेषकर दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में दबावपूर्ण प्रथाओं एवं एकतरफा दावों के विरुद्ध एक भू-राजनीतिक संतुलन के रूप में कार्य करता है।
- QUAD सामूहिक समुद्री सुरक्षा को बढ़ाता है और UNCLOS को बनाए रखता है, समुद्री क्षेत्र जागरूकता तथा ‘मालाबार’ जैसे संयुक्त अभ्यासों को प्रोत्साहित करके।
- चीन की आक्रामकता का संतुलन: QUAD ‘सहयोग के माध्यम से रणनीतिक संतुलन’ का प्रतिनिधित्व करता है और चीन के BRI के विकल्प के रूप में एक वैकल्पिक शक्ति संरचना प्रदान करता है, जो पारदर्शी और सतत विकास पर बल देती है।
- यह छोटे इंडो-पैसिफिक देशों को अवसंरचना, संपर्क और तकनीकी सहयोग के लिए एक गैर-दबावपूर्ण, लोकतांत्रिक विकल्प प्रदान करता है, जिससे ऋण-जाल कूटनीति का सामना किया जा सके।
- नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ करना: सभी चार QUAD राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और वैश्विक साझा संसाधनों की पवित्रता का पालन करने पर जोर देते हैं।
- इस प्रकार, QUAD एक खंडित विश्व व्यवस्था में बहुपक्षवाद की रक्षा के लिए केंद्रीय है और ASEAN, UN और G20 जैसी संस्थाओं को पूरक करता है।
- आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और आर्थिक सुरक्षा: महामारी और भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न व्यवधानों के बीच QUAD ने रेजिलिएंट सप्लाई चेन पहल(RSCI) और बाद में 2025 में क्वाड रेजिलिएंट सप्लाई चेन काउंसिल की स्थापना की।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग: QUAD 5G, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और जैव प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
- 2025 में, सदस्यों ने क्वाड इनोवेशन पार्टनरशिप और एक एआई आचार संहिता शुरू किया ताकि तकनीकी पारिस्थितिक तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं लोकतांत्रिक शासन सुनिश्चित किया जा सके।
- स्वास्थ्य सुरक्षा और महामारी तैयारी: 2021 में क्वाड वैक्सीन साझेदारी ने सहयोगात्मक स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं की नींव रखी।
- 2025 में यह Quad ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी नेटवर्क में विस्तारित हुआ, जिससे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में वैक्सीन वितरण एवं महामारी तैयारी को बढ़ावा मिला।
- जलवायु कार्रवाई और स्वच्छ ऊर्जा: 2025 के टोक्यो शिखर सम्मेलन ने क्वाड जलवायु अवसंरचना कोष की शुरुआत की, जिसने कई वैश्विक संस्थानों से निवेश को एकत्रित किया ताकि हरित हाइड्रोजन और तटीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके।
- कूटनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व: QUAD वैश्विक शासन में स्वतंत्रता और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए सामूहिक लोकतांत्रिक इच्छा का प्रतीक है।
- यह एक गैर-संधि, गैर-सैन्य चरित्र बनाए रखता है, जिससे लचीलापन और समावेशिता सुनिश्चित होती है, NATO के विपरीत।
- यह सुनिश्चित करता है कि क्षेत्रीय साझेदार, जिनमें ASEAN राष्ट्र भी शामिल हैं, कठोर गुटों में फँसे बिना भाग ले सकें।
QUAD से जुड़ी चिंताएँ और मुद्दे
- रणनीतिक अस्पष्टता: सबसे स्थायी चिंताओं में से एक है QUAD की सटीक प्रकृति और उद्देश्यों के संबंध में स्पष्टता का अभाव।
- यह न तो एक औपचारिक सैन्य गठबंधन है (जैसे NATO) और न ही पूरी तरह संस्थागत संगठन।
- विभिन्न राष्ट्रीय हित: चारों QUAD राष्ट्र, यद्यपि लोकतांत्रिक मूल्यों से एकजुट हैं, अलग-अलग खतरे की धारणाएँ और रणनीतिक प्राथमिकताएँ रखते हैं, जो विशेषकर सुरक्षा एवं रक्षा समन्वय में निर्णय-निर्माण को प्रभावित करती हैं।
- चीन की धारणा और प्रतिक्रिया: चीन ने लगातार QUAD को ‘एशियाई NATO’ बनाने का प्रयास बताया है और दोहराया है कि QUAD ‘क्षेत्रीय शांति को कमजोर करता है तथा गुटीय टकराव को बढ़ावा देता है।’
- स्थायी सचिवालय का अभाव: QUAD के पास कोई स्थायी संस्थागत ढाँचा या सचिवालय नहीं है (हालाँकि 2025 में सिंगापुर में एक स्थापित करने पर चर्चा शुरू हुई थी)।
- यह निरंतरता, जवाबदेही और परिचालन अनुपालन को सीमित करता है।
- ओवरलैपिंग मिनीलेटरलिज़्म: इंडो-पैसिफिक में AUKUS, IPEF और FOIP संवाद जैसे मिनीलेटरल मंचों की वृद्धि देखी जा रही है।
- यह समन्वय थकान और संसाधनों की पुनरावृत्ति की ओर ले जाता है।
- बहिष्कार की धारणा और ASEAN की चिंताएँ: इंडो-पैसिफिक संरचना में ‘ASEAN की केंद्रीयता’ एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
- QUAD की पहलें, विशेषकर समुद्री और अवसंरचना परियोजनाएँ, ASEAN तंत्र से बाहर संचालित होती हैं, जिससे उसके नेतृत्व को कमजोर किया जाता है।
- इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों ने चिंता व्यक्त की है कि QUAD क्षेत्र को ‘प्रतिस्पर्धी प्रभाव क्षेत्रों में विभाजित’ कर सकता है।
- आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा: यद्यपि QUAD आपूर्ति श्रृंखलाओं और प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देता है, यह सदस्यों के बीच प्रतिस्पर्धी तनावों को उजागर करता है:
- अमेरिका और जापान सेमीकंडक्टर तकनीक में अग्रणी हैं;
- भारत और ऑस्ट्रेलिया मुख्यतः उपभोक्ता एवं संसाधन आपूर्तिकर्ता हैं।
- डेटा शासन और गोपनीयता मानकों में भिन्नता डिजिटल सहयोग को जटिल बनाती है।
- स्थायी वित्तीय अंतराल: QUAD का अवसंरचना वित्तपोषण चीन के BRI की तुलना में मामूली है ($60 बिलियन बनाम BRI के $1 ट्रिलियन)।
- अन्य जोखिम:
- विखंडन जोखिम: यदि राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ और अधिक भिन्न हो जाती हैं, तो QUAD प्रतीकात्मक कूटनीति तक सीमित हो सकता है।
- वृद्धि जोखिम: बढ़ते सैन्यीकरण या रक्षा संकेत क्षेत्रीय हथियार दौड़ को उकसा सकते हैं।
- प्रतिष्ठा जोखिम: ठोस क्षेत्रीय लाभ देने में विफलता वैधता को कमजोर कर सकती है।
- समन्वय जोखिम: ASEAN या EU इंडो-पैसिफिक रणनीतियों के साथ औपचारिक एकीकरण की कमी प्रभावशीलता को सीमित कर सकती है।
सहयोग को सुदृढ़ करने वाली प्रमुख पहलें
- क्वाड-एट-सी: शिप ऑब्जर्वर मिशन (जून 2025):इसने सदस्य राष्ट्रों के बीच तटरक्षक-स्तर के समन्वय को बढ़ाया।
- भविष्य की साझेदारी के बंदरगाह: इसकी प्रथम बैठक अक्टूबर 2025 में मुंबई, भारत में आयोजित हुई, जिसमें इंडो-पैसिफिक में सतत और लचीला बंदरगाह अवसंरचना निर्माण पर बल दिया गया।
- ‘मालाबार’ नौसैनिक अभ्यास: गुआम में आयोजित इस अभ्यास ने चारों नौसेनाओं के बीच समुद्री पारस्परिकता को गहरा किया, जो QUAD के स्थायी समुद्री फोकस का प्रतीक है।
भविष्य की प्रासंगिकता
- विजन 2030: ‘इंडो-पैसिफिक के लिए क्वाड विजन 2030’ एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करता है:
- क्षेत्रीय डिजिटल कॉमन्स और साइबर रक्षा ढाँचा बनाना
- समुद्री शासन और महासागर स्थिरता को बढ़ाना
- QUAD+ साझेदारों (वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया) को क्षेत्रीय संवादों में शामिल करना
- क्वाड यूनिवर्सिटी नेटवर्क के माध्यम से शैक्षिक, सांस्कृतिक और तकनीकी आदान-प्रदान का विस्तार करना
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] यह विवेचना कीजिए कि चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद (QUAD) के अंदर हाल के विकास अस्थायी अंतराल का संकेत देते हैं या गहन रणनीतिक निरंतरता को प्रतिबिंबित करते हैं। |