भारत के डेयरी क्षेत्र का डिजिटलीकरण

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

समाचारों में

  • भारत डेयरी क्षेत्र में किसानों की उत्पादकता, पारदर्शिता और सहयोग बढ़ाने के लिए तेजी से डिजिटल उपकरणों का उपयोग कर रहा है।

भारत के डेयरी क्षेत्र का डिजिटलीकरण

  • भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का 25% हिस्सा है।
  • यह अपने डेयरी क्षेत्र को डिजिटल उपकरणों के माध्यम से आधुनिक बना रहा है, जिससे उत्पादकता, पारदर्शिता और किसानों का कल्याण बढ़ रहा है।
  • राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) इन प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है, जो किसानों, सहकारी समितियों और हितधारकों को जोड़कर संचालन में सुधार, अक्षमताओं को कम करने एवं डेयरी मूल्य श्रृंखला में ट्रेसबिलिटी बढ़ाने का कार्य कर रहा है।

विभिन्न कदम

  • राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM): NDDB द्वारा पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) के सहयोग से लागू किया गया। यह “भारत पशुधन” नामक एकीकृत डिजिटल पशुधन पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में बड़ा कदम है।
    • भारत पशुधन डेटाबेस प्रजनन, कृत्रिम गर्भाधान, स्वास्थ्य सेवाएँ, टीकाकरण और उपचार जैसी फील्ड गतिविधियों को दर्ज करता है।
    • सभी पशुओं को 12 अंकों का “पशु आधार” टैग दिया गया है, जिससे टीकाकरण, प्रजनन और उपचार का रिकॉर्ड रखा जा सके। नवंबर 2025 तक 35.68 करोड़ आईडी जारी किए जा चुके हैं।
    • किसान 1962 ऐप या टोल-फ्री नंबर के माध्यम से रिकॉर्ड और पशु चिकित्सा सेवाओं व योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • स्वचालित दूध संग्रह प्रणाली (AMCS): यह डेयरी सहकारी समितियों में दूध संग्रह को डिजिटलीकृत करती है, जिसमें मात्रा, गुणवत्ता और वसा सामग्री दर्ज होती है तथा किसानों को तुरंत भुगतान किया जाता है।
    • यह पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और रीयल-टाइम अपडेट सुनिश्चित करती है, साथ ही सहकारी समितियों को डेटा अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।
    • 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में परिचालित, AMCS 26,000 से अधिक समितियों और 17.3 लाख किसानों को 54 मिल्क यूनियनों के माध्यम से सेवा देती है।
  • NDDB डेयरी ERP (NDERP): यह एक व्यापक, वेब-आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से डेयरी और खाद्य तेल उद्योगों के लिए विकसित एवं अनुकूलित किया गया है।
  • सीमन स्टेशन प्रबंधन प्रणाली (SSMS): यह एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो फ्रोजन सीमन डोज़ (FSD) के उत्पादन को सुव्यवस्थित करता है और भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल (MSP) एवं मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का पालन सुनिश्चित करता है।
    • इसमें बैल जीवनचक्र प्रबंधन, सीमन उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, जैव सुरक्षा, फार्म और चारे का प्रबंधन तथा बिक्री ट्रैकिंग शामिल है।
    • यह सूचना नेटवर्क फॉर सीमन प्रोडक्शन एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (INSPRM) से जुड़ा है, जो सीमन स्टेशनों और फील्ड-स्तरीय प्रणालियों जैसे INAPH (एनिमल प्रोडक्टिविटी एंड हेल्थ नेटवर्क) के बीच रीयल-टाइम डेटा साझा करने में सक्षम बनाता है।
    • इसे राष्ट्रीय डेयरी योजना I (NDP I) के अंतर्गत विकसित किया गया, जो NDDB द्वारा लागू विश्व बैंक वित्तपोषित पहल है।
  • इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS): यह डेयरी सहकारी समितियों, यूनियनों और महासंघों के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करती है, जिससे दूध खरीद, बिक्री, उत्पादन और इनपुट्स पर डेटा एकत्र, साझा एवं विश्लेषित किया जा सके।
    • 198 मिल्क यूनियनों, 29 डेयरियों, 54 पशु-चारा संयंत्रों और 15 महासंघों की भागीदारी के साथ, i-DIS एक विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटाबेस बनाती है, जो साक्ष्य-आधारित योजना, बेंचमार्किंग एवं नीति-निर्माण का समर्थन करती है।
  • दूध मार्ग अनुकूलन: NDDB ने GIS तकनीक का उपयोग करके दूध मार्ग अनुकूलन शुरू किया है, जिससे भारत की डेयरी आपूर्ति श्रृंखला अधिक कुशल और किफायती बन सके।
    • खरीद और वितरण मार्गों को डिजिटल रूप से मैप करके, सहकारी समितियाँ परिवहन दूरी, ईंधन लागत एवं डिलीवरी समय कम कर सकती हैं।
    • विदर्भ मराठवाड़ा, वाराणसी, पश्चिम असम, झारखंड और इंदौर जैसे क्षेत्रों में पायलट परियोजनाओं ने उल्लेखनीय बचत दिखाई है।

महत्व

  • एआई, IoT सेंसर, ब्लॉकचेन और मोबाइल ऐप्स का उपयोग पशुओं के स्वास्थ्य, दूध की गुणवत्ता एवं आपूर्ति श्रृंखला लॉजिस्टिक्स की रीयल-टाइम निगरानी सक्षम करता है।
  • डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म किसानों को सीधे भुगतान, पशु चिकित्सा सेवाएँ और बाज़ार मूल्य तक पहुँचने में सहायता करते हैं, जिससे मध्यस्थों पर निर्भरता कम होती है।
  • डिजिटल रिकॉर्ड गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित करते हैं, जो निर्यात और उपभोक्ता विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • छोटे किसान भारत के अधिकांश दूध का उत्पादन करते हैं, जिससे मानकीकरण और डिजिटल एकीकरण कठिन हो जाता है।
  • कई ग्रामीण उत्पादकों को ऐप्स और डिजिटल उपकरणों का प्रभावी उपयोग करने का प्रशिक्षण नहीं है।
  • खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी, कोल्ड चेन सुविधाएँ और ग्रामीण विद्युतीकरण अपनाने में बाधा डालते हैं।
  • IoT उपकरणों, सेंसर और स्वचालित प्रणालियों में उच्च प्रारंभिक निवेश छोटे किसानों के लिए वहन योग्य नहीं है।

निष्कर्ष और आगे की राह

  • भारत का डेयरी क्षेत्र राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के नेतृत्व में एक बड़े डिजिटल परिवर्तन से गुजर रहा है।
  • सहकारी क्षमता को डिजिटल नवाचार के साथ मिलाकर, भारत एक ट्रेस करने योग्य, कुशल और सतत डेयरी मूल्य श्रृंखला बना रहा है।
  • यह परिवर्तन केवल तकनीकी ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक भी है, जो ग्रामीण परिवारों को सशक्त बना रहा है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ा रहा है। इसे डिजिटल इंडिया जैसी नीतिगत पहलों का समर्थन प्राप्त है।

स्रोत :PIB

 

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