
हर साल 8 सितंबर को, मौलिक मानवाधिकारों और आजीवन सीखने के लिए साक्षरता के महत्व का जश्न मनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय, “डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना”, दुनिया भर में दैनिक जीवन में डिजिटल साक्षरता के महत्व को दर्शाता है।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 का विषय और उद्देश्य
- आज के डिजिटल युग में व्यक्तियों को आवश्यक और अमूल्य कौशलों से सुसज्जित करने पर ज़ोर देते हुए, अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 2025 की थीम है “डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना।”
- डिजिटल साक्षरता एक आवश्यकता बन गई है क्योंकि नई डिजिटल तकनीकें लोगों के संचार, सीखने और काम करने के तरीकों को बदल रही हैं।
- किसी व्यक्ति के लिए नए अवसर तभी साकार हो सकते हैं जब उसे सभी उपलब्ध विकल्पों का उपयोग करने का अधिकार प्राप्त हो।
- यद्यपि दुनिया भर में साक्षरता दर में लगातार वृद्धि हुई है, फिर भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनके पास प्राथमिक स्तर की साक्षरता भी नहीं है।
- अब हर कोई प्रौद्योगिकी में हो रही प्रगति और इंटरनेट की बढ़ती ताकत से अवगत है।
- इसलिए, यह और भी ज़रूरी है कि डिजिटल साक्षरता की खाई को प्रभावी ढंग से पाटा जाए और सभी लोगों, चाहे वे कहीं भी रहते हों, को इसका हिस्सा बनने का अवसर दिया जाए।
- अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 1967 से प्रत्येक वर्ष मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में यह उजागर करना है कि पढ़ना और लिखना एक आवश्यक मानव अधिकार है।
- यह समतापूर्ण, शांतिपूर्ण और सतत समाजों के निर्माण के लिए भी एक आवश्यक शर्त है, इसके साथ ही शिक्षा को निरंतर प्रोत्साहित करना और समाज में लोगों के बीच की खाई को कम करना भी आवश्यक है।
- यह दिन सरकारों, समाजों और आम लोगों से कार्रवाई और जागरूकता का आह्वान करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जैसे-जैसे समाज तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, हर कोई इसका हिस्सा बने।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 की पृष्ठभूमि और महत्व
- यूनेस्को ने 8 सितम्बर,1967 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य साक्षरता को एक मौलिक मानव अधिकार, आजीवन सीखने का साधन और वास्तव में समस्त शिक्षा की नींव के रूप में स्थापित करना था।
- दुनिया भर में, अनुमानतः 75 करोड़ वयस्क अभी भी ऐसे हैं जो पढ़ नहीं सकते, और उनमें से दो-तिहाई महिलाएँ हैं, जो यह संकेत देता है कि शिक्षा में अब भी बड़े अंतर मौजूद हैं।
- साक्षरता एक ऐसा साधन है जो ज्ञान, आर्थिक अवसर और समाज में भागीदारी की क्षमता प्रदान करता है; यह व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर विकास का उत्प्रेरक है।
- अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के उत्सव का उद्देश्य हाशिए पर पड़े समुदायों को मज़बूत करना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और बहुभाषाओं में साक्षरता और शिक्षा के माध्यम से शांति को बढ़ावा देना है।
- यह दिन सरकारों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज से वैश्विक स्तर पर सर्वव्यापी साक्षरता की दिशा में प्रयास तीव्र करने का आह्वान करता है।
“डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देने” का महत्व
डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्यक्तियों को डिजिटल समाज में आगे बढ़ने, उसमें भाग लेने और योगदान करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करता है, साथ ही डिजिटल विभाजन और ऑनलाइन सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान भी करता है।
सशक्तिकरण और समावेशन
डिजिटल साक्षरता व्यक्तियों को सूचना तक पहुँचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनने का अवसर प्रदान करती है। यह कौशल विशेषाधिकार प्राप्त और हाशिए पर पड़े समूहों के बीच की खाई को पाटकर सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देता है, और साथ ही सुनिश्चित करता है कि तकनीक-संचालित दुनिया में हर कोई अवसरों का लाभ उठा सके।
शिक्षा और करियर की तैयारी
शिक्षा में प्रौद्योगिकी के एकीकरण के साथ, डिजिटल साक्षरता छात्रों के सीखने के अनुभवों को बेहतर बनाती है, संबंधों को बढ़ावा देती है, और वैश्विक संसाधनों और ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों तक पहुँच को सुनिश्चित करती है। लगभग सभी उद्योगों में रोज़गार के लिए डिजिटल उपकरणों में महारत हासिल करना अब आवश्यक हो गया है, इस प्रकार डिजिटल साक्षरता एक आजीवन पेशेवर कौशल बन गई है।
आलोचनात्मक सोच और सुरक्षा
डिजिटल युग में साक्षरता लोगों में क्रिटिकल थिंकिंग विकसित करती है, ताकि वे ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी की विश्वसनीयता का आकलन कर जिम्मेदारी के साथ डिजिटल सामग्री का उपयोग कर सकें। साथ ही यह साइबर बुलिंग, साइबर सुरक्षा, डाटा संरक्षण और नैतिक डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती है।
डिजिटल विभाजन को पाटना
प्रारंभिक स्तर पर डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने से तकनीकी असमानता से उत्पन्न खाई को कम किया जा सकता है। समान और न्यायसंगत डिजिटल शिक्षा प्रदान करने से सभी पृष्ठभूमियों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक और व्यावसायिक सफलता के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त हो सकते हैं।
आजीवन शिक्षा और नागरिक सहभागिता
डिजिटल साक्षरता लगातार बदलती तकनीकों के अनुरूप आजीवन सीखने को प्रोत्साहित करती है। साथ ही यह नागरिक भागीदारी को मजबूत करती है, क्योंकि यह डिजिटल शासन, सामाजिक आंदोलनों और सहयोगात्मक समस्या समाधान में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करती है।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 के उद्देश्य
- जागरूकता बढ़ाना: समाज, सरकारों और संस्थानों को डिजिटल साक्षरता को एक मौलिक मानव अधिकार के रूप में मान्यता देने के लिए प्रेरित करना और डिजिटल शिक्षा एवं संसाधनों तक समान पहुँच का समर्थन करने वाली नीतियों को प्रोत्साहित करना।
- शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना: क्षमताओं का निर्माण करना और डिजिटल शिक्षण वातावरण स्थापित करना जहाँ सभी पृष्ठभूमि के व्यक्ति अपने पूरे जीवन में डिजिटल साक्षरता कौशल प्राप्त कर सकें, उन्हें अद्यतन कर सकें और लागू कर सकें।
- आजीवन शिक्षा को बढ़ावा देना: सभी आयु वर्गों के लिए निरंतर कौशल विकास को प्रोत्साहित करना, नई तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का ज़िम्मेदारी, नैतिकता और प्रभावी ढंग से उपयोग करने हेतु सीखने पर ज़ोर देना।
- वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा देना: वैश्विक अभियानों, डिजिटल प्रशिक्षण और सुगम्यता पहलों के माध्यम से सभी के समावेशन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, डिजिटल निरक्षरता को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास सुनिश्चित करना, विशेषकर बच्चों, महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 2025 एक वैश्विक संकल्प का आह्वान करता है कि हर व्यक्ति के लिए डिजिटल साक्षरता सुलभ और सार्थक बनाई जाए, ताकि अधिक सशक्त, न्यायसंगत और शांतिपूर्ण समाजों का निर्माण हो सके।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 के अवसर पर युवाओं और समुदायों की भूमिका
- युवा और समुदाय, अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 2025 के लिए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जो डिजिटल साक्षरता पर केंद्रित है।
- युवा अत्यधिक ऊर्जा, रचनात्मकता और डिजिटल साक्षरता के साथ परिवर्तनकारी भूमिका निभाते हैं, जिससे साक्षरता को बढ़ावा मिलता है।
- युवा जागरूकता अभियानों, रीडिंग क्लबों और विविध समुदायों के बीच सेतु निर्माण हेतु सोशल मीडिया के उपयोग के माध्यम से साक्षरता और बहुभाषी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- इसके अलावा, वंचित क्षेत्रों में, युवा स्वयंसेवक पढ़ने और लिखने में चुनौतियों का सामना कर रहे बच्चों को ट्यूशन और मार्गदर्शन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- समुदाय साक्षरता के विकास के लिए आवश्यक पोषणकारी वातावरण प्रदान करते हैं। वे आवश्यक सामग्री एकत्र कर सकते हैं, समावेशी शिक्षण वातावरण स्थापित कर सकते हैं, और यह सत्यापित कर सकते हैं कि शैक्षिक गतिविधियाँ सभी भाषाओं और संस्कृतियों का पालन करती हैं।
- समुदाय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम जैसे कहानी सुनाने के सत्र, द्विभाषी कक्षाएँ, और मोहल्ला-स्तरीय साक्षरता अभियान समावेशन को बढ़ावा देते हैं और सामुदायिक भावना को सुदृढ़ करते हैं।
- युवा और सामुदायिक सहयोग मिलकर साक्षरता प्रयासों की पहुँच और स्थायित्व को बढ़ाते हैं, अंतर को पाटते हैं और साझा ज्ञान तथा बहुभाषावाद के प्रति सम्मान के माध्यम से आपसी समझ और शांति को बढ़ावा देते हैं।
- एक साक्षर और सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण के लिए सभी की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आगे की राह
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 2025 समझ और शांति को प्रोत्साहित करने के लिए विविध भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने का आह्वान करता है। समावेशी, सुलभ और डिजिटल युग के अनुरूप साक्षरता कार्यक्रमों पर जोर हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के कौशल को बढ़ाएगा, सामाजिक विभाजन को कम करेगा, और सभी के लिए समान व सतत शिक्षा के यूनेस्को के वैश्विक शिक्षा एजेंडा के अनुरूप आजीवन सीखने को बढ़ावा देगा।
निष्कर्ष
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 2025 सभी के लिए डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने, दूरियों को पाटने और व्यक्तियों को सुरक्षित एवं ज़िम्मेदारी से तकनीक का उपयोग करने के लिए सशक्त बनाने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। समावेशी डिजिटल कौशल को बढ़ावा देकर, समाज लचीलापन विकसित करते हैं और तकनीकि दुनिया में शिक्षा, अवसर और सूचित भागीदारी के द्वार खोलते हैं।
Read this article in English: International Literacy Day 2025