कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा या राष्ट्रीय सुरक्षा

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; उभरती प्रौद्योगिकियाँ और सुरक्षा

संदर्भ

  • हाल ही में अमेरिका और चीन की प्रमुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंपनियों से जुड़े घटनाक्रमों ने यह उजागर किया है कि प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच का संबंध तीव्रता से बेहतर हो रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): रणनीतिक प्रतिस्पर्धा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा

  • एआई, जिसे प्रारंभ में नागरिक और वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए विकसित किया गया था, अब रणनीतिक प्रतिस्पर्धा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
  • अमेरिका, चीन और रूस जैसी महाशक्तियाँ एआई को एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी मानती हैं, जो आर्थिक शक्ति, सैन्य क्षमता और वैश्विक प्रभाव को पुनः आकार दे सकती है।
    • परिणामस्वरूप, वैश्विक एआई परिदृश्य केवल तकनीकी नवाचार ही नहीं बल्कि भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और सुरक्षा चिंताओं से भी जुड़ा हुआ है।

प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा का चालक के रूप में एआई

  • एआई उद्योग, वित्त, स्वास्थ्य सेवा, शासन और रक्षा में व्यापक अनुप्रयोगों के कारण वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है।
    • एआई में भारी निवेश करने वाले देश आर्थिक प्रभुत्व और तकनीकी नेतृत्व प्राप्त करना चाहते हैं।
  • वर्तमान में अमेरिका और चीन एआई विकास में अग्रणी शक्तियाँ हैं।
    • अमेरिका उन्नत अनुसंधान, निजी प्रौद्योगिकी कंपनियों और सेमीकंडक्टर तकनीक में बढ़त बनाए हुए है।
    • चीन को विशाल डेटा सेट, बेहतर सरकारी समर्थन और उद्योग एवं राज्य नीतियों के बीच एकीकरण का लाभ मिलता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा आयाम में एआई

  • एआई को केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा से परे एक रणनीतिक राष्ट्रीय सुरक्षा संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है।
  • सरकारें एआई में निवेश कर रही हैं, जैसे:
    • स्वायत्त हथियार प्रणालियाँ
    • साइबर सुरक्षा और साइबर युद्ध
    • खुफिया विश्लेषण और निगरानी
    • सैन्य रसद और निर्णय-निर्धारण
  • शोध के अनुसार, सैन्य प्रणालियों में एआई का एकीकरण युद्धक्षेत्र की जागरूकता, संचालन की गति और सटीक लक्ष्य निर्धारण को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है।
  • एआई ‘किल चेन’ में भूमिका निभाता है, जहाँ एल्गोरिद्म लक्ष्य पहचान, खतरे की पहचान और परिचालन निर्णय-निर्धारण जैसी प्रक्रियाओं को तेज कर सकते हैं।

द्वि-उपयोगी प्रौद्योगिकी के रूप में एआई

  • एआई शासन में एक प्रमुख चुनौती यह है कि एआई एक द्वि-उपयोगी प्रौद्योगिकी है, अर्थात् इसके नागरिक और सैन्य दोनों अनुप्रयोग हैं।
  • उदाहरण:
    • चिकित्सा निदान हेतु प्रयुक्त एआई को सैन्य निगरानी में भी अनुकूलित किया जा सकता है।
    • स्वायत्त वाहनों के लिए डिज़ाइन किए गए एआई सिस्टम स्वायत्त ड्रोन और युद्ध प्रणालियों में भी सहायक हो सकते हैं।
  • इस द्वि-उपयोगी प्रकृति के कारण एआई विकास या प्रसार को प्रतिबंधित करना अत्यंत कठिन है।
  • एआई दुर्लभ सामग्रियों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि एल्गोरिद्म, डेटा और कंप्यूटिंग शक्ति पर आधारित है, जो व्यापक रूप से उपलब्ध हैं, जबकि परमाणु प्रौद्योगिकियाँ ऐसा नहीं हैं।

अमेरिका–चीन एआई प्रतिद्वंद्विता

  • एआई मॉडल डिस्टिलेशन (मुख्य मुद्दा): इसमें एक कमजोर एआई मॉडल, अधिक उन्नत मॉडल के आउटपुट से सीखता है।
  • चीन की नेक्स्ट जनरेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलपमेंट योजना (2017) का लक्ष्य 2030 तक चीन को एआई में वैश्विक नेता बनाना है।
    • यह सरकार, निजी प्रौद्योगिकी कंपनियों और सेना के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसे प्रायः सैन्य–नागरिक संलयन कहा जाता है।
  • अमेरिका ने इसके जवाब में तकनीकी श्रेष्ठता बनाए रखने और चीन की उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स तथा उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तक पहुँच को सीमित करने पर बल दिया है।
    • अमेरिकी एआई लैब एन्थ्रोपिक ने तीन चीनी एआई कंपनियों — डीपसीक, मूनशॉटएआई और मिनीमैक्स— को राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के रूप में मानने का आह्वान किया है।
  • यह तकनीकी प्रतिद्वंद्विता व्यापक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है, जहाँ एआई नेतृत्व को आर्थिक समृद्धि और सैन्य प्रभुत्व दोनों के लिए आवश्यक माना जाता है।

एआई मॉडल डिस्टिलेशन (जिसे नॉलेज डिस्टिलेशन भी कहा जाता है)

  • यह एक मशीन लर्निंग तकनीक है, जिसमें एक छोटा या सरल एआई मॉडल, बड़े और अधिक शक्तिशाली एआई मॉडल के आउटपुट से सीखता है।
  • इसका उद्देश्य जटिल मॉडल के ज्ञान को छोटे मॉडल में स्थानांतरित करना है, जबकि प्रदर्शन समान बनाए रखना।

प्रमुख विशेषताएँ

  • मॉडल संपीड़न: एआई मॉडलों के आकार और जटिलता को कम करता है।
  • दक्षता: सीमित कंप्यूटिंग शक्ति वाले उपकरणों पर एआई सिस्टम को चलाने में सक्षम बनाता है।
  • ज्ञान हस्तांतरण: बड़े मॉडलों से सीखे गए पैटर्न को छोटे मॉडलों में स्थानांतरित करता है।
  • लागत में कमी: प्रशिक्षण और परिनियोजन हेतु कम कम्प्यूटेशनल आवश्यकताएँ।

एआई के सैन्यीकरण के जोखिम

  • स्वायत्त हथियार: एआई-संचालित स्वायत्त हथियार सीमित मानवीय नियंत्रण के साथ कार्य कर सकते हैं, जिससे नैतिक और कानूनी प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
  • वॉफेयर की गति में वृद्धि: एआई संघर्षों में निर्णय-निर्धारण को तेज कर सकता है, जिससे मानवीय निगरानी कम हो सकती है और वृद्धि (Escalation) का जोखिम बढ़ सकता है।
  • वैश्विक हथियार प्रतिस्पर्धा: प्रमुख शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा एआई हथियार प्रतिस्पर्धा को शुरू कर सकती है, जो शीत युद्ध के दौरान परमाणु प्रतिस्पर्धा जैसी होगी।
  • साइबर और सूचना वॉफेयर: एआई साइबर हमलों, भ्रामक अभियानों और डिजिटल निगरानी क्षमताओं को बढ़ा सकता है।

शासन और वैश्विक विनियमन की चुनौतियाँ

  • एआई प्रौद्योगिकियाँ मुख्यतः निजी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा विकसित की जाती हैं, न कि सरकारों द्वारा, जैसा कि परमाणु हथियारों के मामले में होता है।
  • वर्तमान में सैन्य एआई को विनियमित करने के लिए कोई व्यापक अंतर्राष्ट्रीय ढाँचा उपलब्ध नहीं है, जबकि जोखिम उपस्थित हैं।
  • प्रभावी शासन हेतु आवश्यक कदम:
  • सैन्य एआई के जिम्मेदार उपयोग पर अंतर्राष्ट्रीय समझौते;
  • घातक निर्णयों पर मानवीय नियंत्रण;
  • एआई प्रणालियों में पारदर्शिता और जवाबदेही;
  • दुरुपयोग रोकने के लिए वैश्विक सहयोग।
  • यदि ऐसे उपाय नहीं किए गए, तो एआई प्रतिस्पर्धा भू-राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकती है और वैश्विक स्थिरता को कमजोर कर सकती है।

भारत के लिए निहितार्थ

  • प्रमुख शक्तियों के बीच एआई प्रतिस्पर्धा भारत के लिए कई रणनीतिक निहितार्थ रखती है:
    • एआई भविष्य के वॉरफेयर और रक्षा आधुनिकीकरण को प्रभावित करेगा।
    • भारत को घरेलू एआई अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना होगा।
    • अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ा सकती है।
    • भारत को वैश्विक एआई शासन ढाँचों को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
  • भारत की राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति (नीति आयोग) विकास के लिए एआई के उपयोग पर बल देती है, साथ ही नैतिक और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करती है।
मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) तकनीकी प्रतिस्पर्धा के एक उपकरण और एक रणनीतिक राष्ट्रीय सुरक्षा संपत्ति दोनों रूपों में उभर रही है। उपयुक्त उदाहरणों सहित चर्चा कीजिए।

Source: TH

 

Other News

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ केंद्रीय बजट 2026–27 ने व्यापार देयताओं की छूट प्रणाली (TReDS) के विस्तार हेतु प्रमुख सुधार प्रस्तावित किए हैं, जिनमें CPSEs द्वारा अनिवार्य उपयोग, CGTMSE के माध्यम से ऋण गारंटी, और MSME तरलता सुधारने के लिए GeM के साथ एकीकरण शामिल है। ये उपाय विश्व बैंक के 2025...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/शासन संदर्भ अंतर्राष्ट्रीय तुलनात्मक अनुभव और संवैधानिक सिद्धांत भारत में प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONOE) के संदर्भ में संघवाद, लोकतांत्रिक जवाबदेही एवं संस्थागत संरचना को लेकर चिंताएँ उत्पन्न करते हैं। एक राष्ट्र, एक चुनाव (ONOE) के बारे में इसका आशय लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/महिलाओं से संबंधित मुद्दे; GS3/कृषि संदर्भ कृषि में महिलाओं का योगदान अधिकांशतः अदृश्य बना हुआ है, क्योंकि भूमि शीर्षक और संपत्ति का स्वामित्व अब भी पुरुषों के नाम पर है। इससे महिलाओं की संसाधनों तक पहुँच, संस्थागत समर्थन और निर्णय लेने की शक्ति सीमित रहती है, भले ही समान...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/सामाजिक न्याय संदर्भ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम ‘अधिकार, न्याय, कार्रवाई: सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए’ इस आवश्यकता को रेखांकित करती है कि केवल प्रतीकात्मक प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाए जाएँ, विशेषकर ऐसे विश्व में जो बढ़ते हुए सशस्त्र संघर्षों, विस्थापन और मानवीय संकटों से...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध संदर्भ ईरान में इज़राइल के पूर्व-निवारक हमले, जिन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त है, ने व्यापक पश्चिम एशियाई संघर्ष में संभावित वृद्धि को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति पर पड़ सकता है। इज़राइल ने ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को देखते हुए...
Read More
scroll to top