पाठ्यक्रम: GS1/ संस्कृति
संदर्भ
- यूनेस्को ने ओडिशा के तीन बौद्ध धरोहर स्थलों – रत्नागिरि, उदयगिरि और ललितगिरि – को भारत की अस्थायी सूची में संभावित रूप से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के रूप में मान्यता हेतु शामिल किया है।
परिचय
- अस्थायी सूची उन स्थलों की पहचान करती है जो सांस्कृतिक अथवा प्राकृतिक रूप से असाधारण सार्वभौमिक मूल्य रखते हैं और जिन्हें विश्व धरोहर सूची में संभावित रूप से अंकित किया जा सकता है।
- ये स्थल सामूहिक रूप से डायमंड ट्रायंगल के नाम से जाने जाते हैं तथा माना जाता है कि ये बौद्ध धर्म की तीन प्रमुख परंपराओं – हीनयान, महायान और वज्रयान – के प्रसार एवं विकास को प्रतिबिंबित करते हैं।
बौद्ध स्थल: ललितगिरि, कटक
- स्थान: यह असिया पर्वतमाला के नंदपहाड़ टीले पर, बीरूपा नदी घाटी के अंदर स्थित है।
- यहाँ दूसरी–तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर तेरहवीं शताब्दी ईस्वी तक अबाध सांस्कृतिक निरंतरता दिखाई देती है।
- पुरातात्त्विक खोजें: एक अंकित टेराकोटा सीलिंग की खोज, जिस पर लिखा है – “श्री चन्द्रादित्य विहार समग्र आर्य भिक्षु संघस्य” (9वीं–10वीं शताब्दी ईस्वी)।
- थेरवाद काल का एक विशाल स्तूप, जिसमें खोंडालाइट पत्थर से बने अवशेष पात्र तथा अंदर स्टीटाइट, रजत और स्वर्ण पात्र पाए गए।
- महायान और वज्रयान परंपरा की मूर्तियाँ जैसे वज्रपाणि, मञ्जुश्री, तारा, जम्बल, हरिति और अपराजिता।
बौद्ध स्थल: उदयगिरि, जाजपुर
- स्थान: यह असिया पर्वतमाला में बीरूपा नदी के दाहिने तट पर स्थित है।
- इसका एक अन्य नाम “सूर्योदय पर्वत” है, क्योंकि यह पूर्वाभिमुख अर्धचंद्राकार पहाड़ी है।
- वास्तुकला महत्व: एक विशाल चैत्यगृह की खोज, जो वास्तुकला के विकास को दर्शाता है – वृत्ताकार से अपसिडल और फिर आयताकार रूप तक।
- मूर्तियाँ: विशाल अवलोकितेश्वर, तारा, मञ्जुश्री, भृकुटि, हरिति, चुंडा, मैत्रेय, वैरोचन, वसुधारा आदि।
- टेराकोटा पट्टिकाओं और पत्थर की तख्तियों पर बौद्ध धारणी युक्त अभिलेख।
बौद्ध स्थल: रत्नागिरि, जाजपुर
- स्थान: यह असिया पर्वतमाला में केलुआ नदी (जो ब्राह्मणी की सहायक धारा है) के बाएँ तट पर स्थित है।
- इसे “रत्नों की पहाड़ी” भी कहा जाता है।
- संरक्षण एवं आश्रय:
- इसे 8वीं–10वीं शताब्दी ईस्वी में भौमकार वंश से प्रमुख संरक्षण प्राप्त हुआ।
- ताम्रपत्र अभिलेख में रानी कर्पूरश्री के निवास का उल्लेख मिलता है, जो स्त्री संरक्षण का संकेत है।
Source: UNESCO
Previous article
संक्षिप्त समाचार 28-01-2026
Next article
भारत–सऊदी अरब: सुरक्षा में गहन होती रणनीतिक साझेदारी