पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- संसदीय स्थायी समिति ने महाराष्ट्र के बरामती में हाल ही में हुई विमान दुर्घटना (जिसमें उपमुख्यमंत्री की मृत्यु हुई) से महीनों पहले, भारत की नागरिक उड्डयन सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमजोरियों को उजागर किया था ।
भारत की नागरिक उड्डयन सुरक्षा रूपरेखा
- यह एक बहु-स्तरीय नियामक एवं पर्यवेक्षण प्रणाली है, जिसका नेतृत्व नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) करता है और इसे विशेष वैधानिक निकायों जैसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (AAIB) तथा नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) के माध्यम से लागू किया जाता है।
- यह रूपरेखा अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों और अनुशंसित प्रथाओं (SARPs) के अनुरूप है तथा निवारक सुरक्षा, नियामक अनुपालन, दुर्घटना अन्वेषण एवं राज्य सुरक्षा कार्यक्रम (SSP) के माध्यम से सतत सुरक्षा सुधार पर केंद्रित है।

संसदीय स्थायी समिति का अवलोकन
- परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर स्थायी समिति ने अगस्त 2025 में ‘नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा की समग्र समीक्षा’ पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें प्रणालीगत सुरक्षा चुनौतियों का आकलन किया गया और विनियमन, संचालन तथा अवसंरचना में सुधार हेतु सुझाव दिए गए। इनमें शामिल हैं:
- वायु यातायात प्रबंधन चुनौतियाँ:
- वायु यातायात नियंत्रकों (ATCOs) की कमी से कार्यभार और थकान-जनित जोखिम बढ़े।
- प्रशिक्षण क्षमता मांग के अनुरूप नहीं बढ़ी।
- समिति ने थकान जोखिम प्रबंधन प्रणाली, स्टाफिंग ऑडिट और प्रशिक्षण क्षमता विस्तार की सिफारिश की।
- DGCA की नियामक स्वायत्तता और क्षमता:
- DGCA में लगभग 50% रिक्तियाँ और सीमित भर्ती स्वायत्तता को गंभीर समस्या बताया गया।
- समिति ने वैधानिक एवं प्रशासनिक स्वायत्तता, विशेष भर्ती तंत्र और प्रतिस्पर्धी वेतन की सिफारिश की।
- ATC प्रणालियों का आधुनिकीकरण:
- वर्तमान स्वचालन प्रणालियाँ प्रदर्शन ह्रास और संघर्ष पहचान व पूर्वानुमान विश्लेषण जैसी उन्नत सुविधाओं की कमी से ग्रस्त हैं।
- समिति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के एकीकरण सहित समयबद्ध आधुनिकीकरण का आग्रह किया।
- सुरक्षा निगरानी और प्रवर्तन को सुदृढ़ करना:
- कमजोर अनुपालन के कारण विमान की फिटनेस जैसी चिंताएँ अनसुलझी रहीं।
- समिति ने समयबद्ध समाधान तंत्र और वित्तीय दंड सहित कठोर प्रवर्तन की सिफारिश की।
- हेलीकॉप्टर संचालन में सुरक्षा:
- हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं ने नियामक खामियों को उजागर किया, विशेषकर उच्च-जोखिम वाले राज्य-प्रबंधित संचालन और भू-विशिष्ट प्रशिक्षण की कमी।
- समिति ने एकसमान राष्ट्रीय रूपरेखा और अनिवार्य भू-विशिष्ट प्रशिक्षण व प्रमाणन का सुझाव दिया।
- पुनरावृत्त परिचालन जोखिमों का समाधान:
- 2024 में रनवे अतिक्रमण घटनाएँ सुरक्षा लक्ष्यों से अधिक रहीं।
- समिति ने अनिवार्य मूल कारण विश्लेषण और लक्षित सुधारात्मक कार्यक्रमों की सिफारिश की।
- त्रुटि रिपोर्टिंग और व्हिसलब्लोअर संरक्षण:
- व्यक्तिगत ATCOs पर भारी दंड स्वैच्छिक त्रुटि रिपोर्टिंग को हतोत्साहित करते हैं।
- समिति ने दंड प्रावधानों की समीक्षा और स्पष्ट व्हिसलब्लोअर संरक्षण ढाँचे की सिफारिश की।
- घरेलू MRO क्षमताओं का विकास:
- लगभग 85% MRO कार्य विदेशों में आउटसोर्स होता है, जिससे विदेशी मुद्रा का बहिर्गमन और रणनीतिक निर्भरता बढ़ती है।
- समिति ने व्यापक नीतिगत समीक्षा और कर व प्रोत्साहन तर्कसंगतीकरण का सुझाव दिया।
- विमान बेड़े विस्तार के अनुरूप हवाई अड्डा विकास:
- विमान अधिष्ठापन हवाई अड्डा अवसंरचना से तीव्र से हो रहा है, जिससे प्रमुख केंद्रों पर क्षमता संकट उत्पन्न हो रहा है।
- समिति ने राष्ट्रीय क्षमता संरेखण योजना और भविष्य की मांग को पूरा करने हेतु पायलट प्रशिक्षण व प्रमाणन में निवेश की सिफारिश की।
अंतर्राष्ट्रीय मॉडलों से सीख
- EASA (यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी) और US FAA ने पहले ही वास्तविक समय चालक दल निगरानी और थकान प्रबंधन प्रणालियों को अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल में शामिल कर लिया है।
- एईएसए (EASA) एयरलाइन विस्तार को अनुमोदित करने से पूर्व संसाधन आश्वासन प्रमाणपत्र अनिवार्य करता है, जिसे भारत भी अपनाकर लागू कर सकता है।
- सिंगापुर की नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAAS) मशीन लर्निंग और सुरक्षा ऑडिट को संयोजित कर पूर्वानुमानित पर्यवेक्षण मॉडल अपनाती है, जिससे समय रहते विसंगतियों की पहचान हो सके।
| नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) – यह भारत का सर्वोच्च नागरिक उड्डयन नियामक निकाय है, जो नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। – इसकी स्थापना 1927 में हुई और 2020 में विमान अधिनियम में संशोधन के बाद यह वैधानिक निकाय बना। – संगठनात्मक संरचना: मुख्यालय: नई दिल्ली में स्थित। क्षेत्रीय कार्यालय: प्रमुख शहरों में फैले हुए हैं, ताकि स्थानीय उड्डयन पर्यवेक्षण किया जा सके। मुख्य कार्य: – सुरक्षा पर्यवेक्षण: नागरिक उड्डयन नियमों, विमानन योग्यता मानकों और सुरक्षा मानदंडों का प्रवर्तन। – लाइसेंसिंग और प्रमाणन: पायलटों, विमान रखरखाव अभियंताओं और वायु यातायात नियंत्रकों को लाइसेंस जारी करना। विमान और प्रशिक्षण संगठनों का प्रमाणन। – वायु परिवहन सेवाओं का विनियमन: भारत से, भारत को और भारत के अंदर अनुसूचित व गैर-अनुसूचित वायु परिवहन सेवाओं की निगरानी। – दुर्घटना अन्वेषण: विमानन दुर्घटनाओं और घटनाओं की जाँच का समन्वय और पर्यवेक्षण। – अंतर्राष्ट्रीय समन्वय: ICAO में भारत का प्रतिनिधित्व और वैश्विक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना। हाल के विकास – eGCA प्लेटफ़ॉर्म: लाइसेंसिंग, अनुमोदन और नियामक प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से सरल बनाने की पहल। – eGCA 2.0: पारदर्शिता बढ़ाने और कागज़ी कार्यवाही कम करने हेतु डिजिटल परिवर्तन पहल। – ड्रोन विनियमन: भारत में मानव रहित विमान प्रणालियों (UAS) का पंजीकरण और विनियमन। – फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL): हाल ही में अद्यतन मानदंड, जिनका उद्देश्य पायलट थकान को कम करना और सुरक्षा बढ़ाना है। इनका प्रभाव हाल ही में इंडिगो परिचालन संकट में भी देखा गया। |
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