संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एआई गवर्नेंस पर वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए दो नई पहल शुरू 

पाठ्यक्रम: GS3/कृत्रिम बुद्धिमत्ता

संदर्भ

  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एआई शासन पर वैश्विक सहयोग को बढ़ाने के लिए दो नए संस्थागत तंत्रों के निर्माण के निर्णय की सराहना की है।

परिचय 

  • ये पैनल हैं: संयुक्त राष्ट्र स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल ऑन एआई और वैश्विक संवाद ऑन एआई गवर्नेंस।
  • इन पैनलों का उद्देश्य एआई के लाभों और जोखिमों पर विचार करना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सूचित नीति निर्माण को बढ़ावा देना है।

दो तंत्र 

  • वैश्विक संवाद ऑन एआई गवर्नेंस:
    • उद्देश्य: राज्यों और हितधारकों के लिए एक समावेशी संयुक्त राष्ट्र मंच।
    • कार्य: आज मानवता के सामने वर्तमान महत्वपूर्ण एआई मुद्दों पर चर्चा करने का मंच।
  • संयुक्त राष्ट्र स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल ऑन एआई:
    • उद्देश्य: संयुक्त राष्ट्र के अंदर एक समावेशी बहु-हितधारक मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जहाँ सदस्य राष्ट्र, नागरिक समाज, अकादमिक जगत और निजी क्षेत्र एआई की प्रमुख चुनौतियों एवं शासन मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।
    • वार्षिक सत्र: जुलाई 2026 में जिनेवा और जुलाई 2027 में न्यूयॉर्क में निर्धारित हैं।

महत्व

  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा इसे “ऐतिहासिक उपलब्धि” कहा गया है।
  • एआई के लाभ और जोखिमों के बीच संतुलन बनाने का लक्ष्य।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
  • यह सुनिश्चित करना कि एआई का विकास मानवता की सामूहिक कल्याण के अनुरूप हो।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) 

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कंप्यूटर विज्ञान की एक व्यापक शाखा है, जिसका उद्देश्य ऐसे स्मार्ट मशीनों का निर्माण करना है जो सामान्यतः मानव बुद्धि की आवश्यकता वाले कार्य कर सकें। 
  • एआई मशीनों को मानव मस्तिष्क की क्षमताओं का अनुकरण करने या उन्हें बेहतर बनाने की अनुमति देता है। 
  • स्वचालित कारों के विकास से लेकर ChatGPT जैसे जनरेटिव एआई टूल्स के प्रसार तक, एआई तीव्रता से हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है — और प्रत्येक उद्योग इसमें निवेश कर रहा है।

एआई पर नियमों की आवश्यकता क्यों है?

  • नैतिक चिंताएं: एआई सिस्टम ऐसे निर्णय ले सकते हैं और कार्य कर सकते हैं जो व्यक्तियों और समाज को प्रभावित करते हैं।
    • नियमों की स्थापना से एआई के उपयोग से जुड़ी नैतिक चिंताओं को संबोधित किया जा सकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह मानव मूल्यों के अनुरूप हो और मौलिक अधिकारों का सम्मान करे।
  • गोपनीयता: एआई प्रायः बड़ी मात्रा में डेटा प्रोसेस करता है।
    • नियम यह निर्दिष्ट कर सकते हैं कि डेटा कैसे एकत्रित, संग्रहीत और उपयोग किया जाए ताकि व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा हो सके।
  • सुरक्षा: इसमें संभावित कमजोरियों से सुरक्षा और एआई तकनीक के दुर्भावनापूर्ण उपयोग से बचाव शामिल है।
  • पारदर्शिता: नियम एआई सिस्टम में पारदर्शिता अनिवार्य कर सकते हैं, जिससे डेवलपर्स को यह प्रकटीकरण करना पड़े कि उनके एल्गोरिदम कैसे कार्य करते हैं।
  • प्रतिस्पर्धा और नवाचार: एक नियामक ढांचा व्यवसायों के लिए समान अवसर प्रदान करता है, बाजार प्रभुत्व के दुरुपयोग को रोकता है और जिम्मेदार नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
  • सार्वजनिक सुरक्षा: जब एआई का उपयोग स्वास्थ्य सेवा, परिवहन या सार्वजनिक अवसंरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है, तो नियम व्यक्तियों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होते हैं।

भारत में एआई का नियमन 

  • भारत में अभी तक एआई के लिए कोई समर्पित कानून नहीं है। एआई को वर्तमान कानूनी ढांचों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित किया जाता है:
    • आईटी अधिनियम, 2000: साइबर अपराधों और मध्यस्थों की उत्तरदायित्व को कवर करता है।
    • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023: डेटा गोपनीयता और सहमति सुनिश्चित करता है।
    • बौद्धिक संपदा अधिकार कानून (कॉपीराइट और पेटेंट अधिनियम): एआई द्वारा उत्पन्न कार्यों और नवाचार के लिए प्रासंगिक।
  • ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (GPAI): भारत GPAI का सदस्य है। 2023 GPAI शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जहाँ विशेषज्ञों ने उत्तरदायी एआई, डेटा शासन, कार्य का भविष्य, नवाचार एवं व्यावसायीकरण पर अपने कार्य प्रस्तुत किए।
  • राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति #AIForAll (नीति आयोग): इसमें स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, “स्मार्ट” शहरों एवं अवसंरचना, तथा स्मार्ट गतिशीलता व परिवर्तन पर केंद्रित एआई अनुसंधान और विकास दिशानिर्देश शामिल हैं।
  • जिम्मेदार एआई के सिद्धांत: फरवरी 2021 में नीति आयोग ने उत्तरदायी एआई के सिद्धांत जारी किए, जो भारत में एआई समाधान लागू करने से जुड़ी विभिन्न नैतिक विचारों की जांच करता है।

नियमन की चुनौतियाँ

  • एआई का तीव्र विकास: यह क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है, जिससे भविष्य में भी प्रासंगिक रहने वाले नियम बनाना कठिन हो जाता है।
  • नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन: नवाचार को बढ़ावा देने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: प्रभावी एआई नियमन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है ताकि नियमन का परिदृश्य बिखरा हुआ न हो।
  • एआई की परिभाषा: एआई की कोई सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत परिभाषा नहीं है, जिससे इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।

आगे की राह 

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब हमारे साथ है और कार्य करने के तरीके को मौलिक रूप से बदलने की क्षमता रखती है। 
  • यह एक अत्यधिक शक्तिशाली तकनीक है और इसका नियमन आवश्यक है। 
  • एआई के संभावित खतरों को स्वीकार कर और उन्हें कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाकर, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह परिवर्तनकारी तकनीक मानवता की सेवा करे और एक सुरक्षित, अधिक न्यायसंगत भविष्य में योगदान दे।

Source: DTE

 

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