स्टार्टअप इंडिया का एक दशक

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर स्टार्टअप इंडिया पहल के एक दशक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया।
    • स्टार्टअप इंडिया को 16 जनवरी, 2016 को एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और निवेश-प्रेरित विकास को सक्षम बनाना था।

भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र

  • भारत तीव्रता से विकसित होकर विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक बन गया है, जहाँ 2025 तक 2 लाख से अधिक स्टार्टअप मौजूद हैं।
  • भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र है।
  • बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्र इस परिवर्तन के अग्रणी रहे हैं।
  • भारत में 120 से अधिक यूनिकॉर्न हैं जिनका मूल्यांकन $350 बिलियन से अधिक है।
  • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) 2025 रैंकिंग: यह लगभग 140 अर्थव्यवस्थाओं को उनके नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रदर्शन के आधार पर रैंक करता है।
    • भारत ने 2020 में 48वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान तक स्थिर प्रगति की है।
  • साथ ही, छोटे शहर भी इस गति में लगातार योगदान दे रहे हैं, जहाँ लगभग 50% स्टार्टअप टियर II/III शहरों से उभर रहे हैं।

स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की चुनौतियाँ 

  • वित्तीय बाधाएँ और पूंजी अस्थिरता: भारतीय स्टार्टअप्स को पूंजी तक असंगत पहुँच का सामना करना पड़ता है, विशेषकर वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान।
    • विदेशी वेंचर कैपिटल पर अत्यधिक निर्भरता उन्हें बाहरी आघातों के प्रति संवेदनशील बनाती है।
    • शुरुआती चरण और डीप-टेक स्टार्टअप्स को लंबे गर्भकालीन अवधि के कारण तीव्र वित्तीय कमी का सामना करना पड़ता है।
  • नियामक जटिलता और नीतिगत अनिश्चितता: केंद्र और राज्य सरकारों में कई अनुपालन आवश्यकताएँ, बार-बार नियामक परिवर्तन एवं कर-संबंधी अस्पष्टताएँ परिचालन लागत बढ़ाती हैं तथा जोखिम लेने व नवाचार को हतोत्साहित करती हैं।
  • प्रतिभा की कमी और कौशल असंगति: एआई, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती तकनीकों में कुशल पेशेवरों की कमी है।
  • अवसंरचना और पारिस्थितिकी तंत्र की खामियाँ: स्टार्टअप-सहायता अवसंरचना महानगरों में केंद्रित है, जिससे टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों में स्टार्टअप्स की वृद्धि सीमित होती है।
  • कमजोर नवाचार और अनुसंधान संस्कृति: निजी क्षेत्र का अनुसंधान एवं विकास (R&D) में कम निवेश, उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के बीच कमजोर संबंध और बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति अपर्याप्त जागरूकता नवाचार और स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण को बाधित करती है।

सरकारी पहल

  • क्षेत्र-विशिष्ट और मंत्रालय-नेतृत्व वाली पहलें
  • एआई उत्कृष्टता केंद्र : देशभर में समर्पित एआई हब और नवाचार केंद्र स्थापित करना ताकि एआई स्टार्टअप्स एवं अनुसंधान को समर्थन मिल सके।
  • भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक वित्तपोषण को निजी क्षेत्र के नवाचार के साथ संयोजित करना।

निष्कर्ष   

  • विगत 10 वर्षों में भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र ने जबरदस्त वृद्धि का अनुभव किया है और यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र बन गया है।
  • हितधारकों के बीच इस गतिशील सहयोग ने पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया है, आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है तथा आगामी पीढ़ी के नवप्रवर्तकों को सशक्त बनाया है।

स्रोत: AIR

 

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