भारत में डीप टेक

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • भारत सरकार ने डीप टेक (Deep Tech) को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न उपाय किए हैं, जिनमें नीतिगत पहल भी शामिल है।

डीप टेक

  • डीप टेक उन नवाचारों को संदर्भित करती है जो उन्नत वैज्ञानिक और तकनीकी खोजों पर आधारित होते हैं।
  • वर्तमान में भारत में 3600 से अधिक डीप टेक स्टार्टअप हैं, जिनमें से 480 से अधिक केवल वर्ष 2023 में स्थापित हुए।

भारत की डीप टेक महत्वाकांक्षाओं का महत्व

  • वैश्विक नेतृत्व: यह भारत को वैश्विक परिदृश्य में एक विश्वसनीय अनुसंधान एवं विकास केंद्र के रूप में स्थापित करता है, जहाँ विशाल STEM प्रतिभा का उपयोग अग्रणी प्रौद्योगिकियों में किया जा सकता है।
  • प्रौद्योगिकीय संप्रभुता: राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और अंतरिक्ष के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता कम करता है, जिससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के प्रति संवेदनशील नहीं रहता।
  • स्थानीय चुनौतियों का समाधान: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता, खाद्य सुरक्षा के लिए सटीक कृषि, और ऊर्जा स्वतंत्रता के लिए हरित हाइड्रोजन जैसे भारत-प्रथम समाधान सक्षम करता है।
  • आर्थिक मूल्य: एक सुदृढ़ डीप टेक पारिस्थितिकी तंत्र भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में ऊपर ले जाता है, जिससे वह कम लागत वाली सेवाओं और असेंबली-आधारित विनिर्माण से उच्च-मूल्य अनुसंधान, डिज़ाइन एवं बौद्धिक संपदा निर्माण की ओर अग्रसर होता है।

चुनौतियाँ

  • डीप टेक में प्रायः बड़े प्रारंभिक निवेश और लंबी विकास समयसीमा की आवश्यकता होती है, जिससे यह पारंपरिक वेंचर कैपिटल के लिए कम आकर्षक बनती है।
  • विशेषीकृत प्रयोगशालाओं, सुपरकंप्यूटिंग और परीक्षण सुविधाओं तक सीमित पहुँच नवाचार को धीमा करती है।
  • विशेषीकृत अनुसंधान प्रतिभा की कमी और वैश्विक समकक्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम उद्योग-सम्बद्ध R&D व्यय प्रगति में बाधा डालते हैं।
  • डीप टेक समाधान अक्सर नियामक और अपनाने की बाधाओं का सामना करते हैं, जिससे वाणिज्यिकरण में देरी होती है।

सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय डीप टेक स्टार्टअप नीति (NDTSP) का मसौदा: नवाचार को प्रोत्साहित करने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और डीप टेक अनुसंधान-आधारित नवाचारों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सामाजिक विकास को बढ़ावा देने हेतु तैयार किया गया।
  • IndiaAI मिशन (2024): पाँच वर्षों में ₹10,300 करोड़ का बजट।
    • प्रमुख लक्ष्य: 18,693 GPUs के साथ उच्च-स्तरीय सामान्य कंप्यूटिंग सुविधा का निर्माण।
  • भारत के AI मॉडल और भाषा प्रौद्योगिकियाँ: सरकार भारत के अपने आधारभूत मॉडल विकसित करने में सहायक है, जिनमें बड़े भाषा मॉडल (LLMs) और भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप समस्या-विशिष्ट AI समाधान शामिल हैं।
  • अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना: बड़े पैमाने पर नवाचार को वित्तपोषित करने हेतु ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड घोषित।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: इसमें ISRO, IN-SPACe और उद्योग की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाया गया।
  • FDI मानदंडों का उदारीकरण: अंतरिक्ष क्षेत्र में उपग्रह निर्माण और घटकों में 100% FDI की अनुमति, तथा प्रक्षेपण यान और उपग्रह संचालन में सीमा बढ़ाई गई।
  • अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF): ANRF अधिनियम, 2023 के अंतर्गत स्थापित। इसका उद्देश्य उद्योग, अकादमिक जगत और सरकार के बीच रणनीतिक दिशा, प्रतिस्पर्धी वित्तपोषण अवसर एवं सहयोग मार्ग प्रदान करना है।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (2023): 2023‑24 से 2030‑31 तक क्वांटम प्रौद्योगिकियों (क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार और संवेदन) के अनुसंधान, विकास और परिनियोजन को तीव्र करना।
  • Bio-E3 नीति: जैव-प्रौद्योगिकी उद्यमिता, जैव-निर्माण और जैव-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने हेतु लागू।
  • AI उत्कृष्टता केंद्र: देशभर में समर्पित AI हब और नवाचार केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
  • सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम (2021): घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रोत्साहित करने हेतु शुरू किया गया।
    • ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025: इसमें घोषणा की गई कि भारत का प्रथम स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप 2025 तक उत्पादन के लिए तैयार होगा।

स्रोत: TH

 

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