वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों का संशोधित वर्गीकरण

पाठ्यक्रम: GS3/ आंतरिक सुरक्षा

संदर्भ

  • गृह मंत्रालय ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित जिलों के वर्गीकरण में संशोधन किया है। पूर्व की “अत्यधिक प्रभावित जिलों” की श्रेणी को हटाकर अब तीन-स्तरीय नई श्रेणीकरण प्रणाली लागू की गई है।

वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों का नया वर्गीकरण

  • LWE प्रभावित जिले: छत्तीसगढ़ का बीजापुर और झारखंड का पश्चिम सिंहभूम।
  • चिंता के जिले: छत्तीसगढ़ का कांकेर जिला।
  • विरासत एवं thrust (L&T) जिले: ऐसे 35 जिले जो अब गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हैं, परंतु पुनः उग्रवाद की संभावना को रोकने हेतु सतत समर्थन आवश्यक है (विरासत), अथवा वे नक्सली विस्तार के प्रति संवेदनशील हैं (थ्रस्ट)।

नक्सल आंदोलन क्या है?

  • वामपंथी उग्रवाद (LWE), जिसे प्रायः नक्सलवाद कहा जाता है, भारत की सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में से एक है।
  • उत्पत्ति: नक्सल आंदोलन 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में आदिवासी एवं भूमिहीन समुदायों के अधिकारों हेतु एक कट्टरपंथी वामपंथी विद्रोह के रूप में प्रारंभ हुआ।
    • इसका नेतृत्व चारु मजूमदार, कानू सान्याल और जगन संथाल ने किया।
  • भौगोलिक विस्तार: यह विद्रोह “रेड कॉरिडोर” में फैला, जिसमें छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और केरल के हिस्से शामिल हैं।
  • अपनाई गई रणनीति: नक्सली गुरिल्ला युद्ध का प्रयोग करते हैं, राज्य संस्थानों को निशाना बनाते हैं, स्थानीय जनसंख्या से धन उगाही करते हैं और प्रायः बच्चों की भर्ती करते हैं।
    •  वे हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए संघर्ष का दावा करते हैं, किंतु हिंसक तरीकों का सहारा लेते हैं।

नक्सलवाद के परिणाम

  • राजनीतिक परिणाम: यह राज्य की सत्ता को कमजोर करता है और प्रभावित क्षेत्रों में लोकतांत्रिक संस्थाओं को क्षति पहुँचाता है। शासन एवं कानून-व्यवस्था में शून्य उत्पन्न करता है।
  • आर्थिक परिणाम: नक्सलवाद खनन, कृषि और अवसंरचना विकास जैसी आर्थिक गतिविधियों को बाधित करता है।
    • सुरक्षा पर बढ़ा हुआ सरकारी व्यय विकास हेतु उपलब्ध निधियों को कम करता है और निजी निवेश को हतोत्साहित करता है।
  • सामाजिक परिणाम: यह भय, अविश्वास और हाशिए पर पड़े समुदायों में अलगाव की भावना को बढ़ाता है।
    • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विघटन, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में, मानव विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

सरकारी पहल

  • सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना: यह योजना ‘पुलिस बलों के आधुनिकीकरण’ नामक छत्र योजना की उप-योजना के रूप में लागू की जा रही है।
    • केंद्र सरकार LWE प्रभावित जिलों और निगरानी हेतु चिन्हित जिलों के सुरक्षा व्यय की प्रतिपूर्ति करती है।
  • SAMADHAN रणनीति: इसमें स्मार्ट नेतृत्व, आक्रामक रणनीति, प्रेरणा एवं प्रशिक्षण, क्रियाशील खुफिया जानकारी, डैशबोर्ड आधारित KPI एवं KRA, प्रौद्योगिकी का उपयोग, प्रत्येक क्षेत्र हेतु कार्ययोजना और वित्तीय पहुँच को रोकना शामिल है।
  • समर्पण एवं पुनर्वास योजना: इस नीति ने आकर्षक प्रोत्साहन और आजीविका सुनिश्चित कर नक्सली कैडरों के पतन को तीव्र किया है।
    • उच्च-स्तरीय कैडरों को ₹5 लाख, मध्यम/निचले स्तर के कैडरों को ₹2.5 लाख तथा सभी आत्मसमर्पण करने वालों को 36 माह तक व्यावसायिक प्रशिक्षण हेतु ₹10,000 मासिक भत्ता दिया जाता है।
  • राष्ट्रीय नीति एवं कार्ययोजना (2015): इसमें सुरक्षा उपायों, विकास हस्तक्षेपों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों एवं हक़ सुनिश्चित करने जैसी बहुआयामी रणनीति का प्रावधान है।
  • शैक्षिक सशक्तिकरण: सरकार ने 48 LWE प्रभावित जिलों में कौशल विकास पहल शुरू की है, जिसके अंतर्गत ₹495 करोड़ के निवेश से 48 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और 61 कौशल विकास केंद्र (SDC) स्वीकृत किए गए हैं।
  • ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट (2025): भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा अप्रैल 2025 में 21-दिवसीय व्यापक प्रति-विद्रोह अभियान चलाया गया।
    • इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़–तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रगुट्टालु पहाड़ियों (ब्लैक हिल्स) में फैले लगभग 1,200 वर्ग किमी क्षेत्र में नक्सली-माओवादी नेटवर्क को ध्वस्त करना था।

आगे की राह

  • विकास हस्तक्षेपों में आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अंतिम छोर तक पहुँच सुनिश्चित करनी होगी, विशेषकर अवसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल संपर्क में।
  • सामुदायिक भागीदारी और विश्वास निर्माण उपायों को सुदृढ़ करना आवश्यक है, जिसमें प्रभावी स्थानीय शासन एवं शिकायत निवारण तंत्र शामिल हों।
  • विरासत एवं थ्रस्ट जिलों की सतत निगरानी आवश्यक है ताकि हिंसा की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो।

स्रोत: TH

 

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