पाठ्यक्रम: GS2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद उत्पन्न तनाव के एक वर्ष पश्चात भारत और अज़रबैजान ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने के प्रयास आरंभ किए हैं। बाकू में आयोजित विदेश कार्यालय परामर्श का छठा दौर, 2022 के बाद पहली ऐसी सहभागिता है।
पृष्ठभूमि
- ऑपरेशन सिंदूर के परिणाम: अज़रबैजान ने तुर्की के साथ मिलकर पाकिस्तान का समर्थन किया, जिसे “थ्री ब्रदर्स” ब्लॉक गठबंधन के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- भूराजनीतिक संरेखण: अज़रबैजान के पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ रणनीतिक संबंध हैं, क्योंकि पाकिस्तान नागोर्नो-काराबाख संघर्ष में अज़रबैजान का समर्थन करता है।
- भारत ने दूसरी ओर आर्मेनिया के साथ संबंध सुदृढ़ किए हैं, जिनमें रक्षा सहयोग भी शामिल है।
- अज़रबैजान ने भारत पर आर्मेनिया को सैन्य सहयोग देने का आरोप लगाया।
हालिया राजनयिक सहभागिता
- दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण आयामों की व्यापक समीक्षा की।
- इसमें व्यापार, ऊर्जा सहयोग, प्रौद्योगिकी, औषधि, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, जन-से-जन संपर्क तथा सीमा-पार आतंकवाद से निपटने में सहयोग शामिल था।
- महत्त्व: सीमा-पार आतंकवाद को एजेंडे में शामिल करना अज़रबैजान की पूर्ववर्ती स्थिति में परिवर्तन को दर्शाता है।
- अज़रबैजान ने भारत को कच्चे तेल का निर्यात पुनः आरंभ किया है, और तेल भारत को उसके कुल निर्यात का लगभग 98% है।
भारत–अज़रबैजान संबंध
- राजनयिक संबंध: भारत ने दिसंबर 1991 में अज़रबैजान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। फरवरी 1992 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
- आर्थिक संबंध: द्विपक्षीय व्यापार 2005 में लगभग USD 50 मिलियन से बढ़कर 2022 में USD 1.882 अरब तक पहुँचा।
- इसके बाद व्यापार घटकर 2025 में USD 401 मिलियन रह गया, जिसका मुख्य कारण भारत द्वारा कच्चे तेल के आयात में कमी थी।
- भारत अज़रबैजान को औषधि, चावल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण सामग्री जैसे विविध उत्पाद निर्यात करता है।
- ऊर्जा सहयोग: ओएनजीसी विदेश ने अज़रबैजान में तेल एवं गैस क्षेत्रों तथा पाइपलाइन परियोजनाओं में निवेश किया है। कंपनी ने अज़ेरी-चिराग-गुनाश्ली तेल क्षेत्र और बाकू-त्बिलिसी सेहान पाइपलाइन में हिस्सेदारी प्राप्त की है।
- यह भारत के ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और कैस्पियन क्षेत्र में रणनीतिक संलग्नता को सुदृढ़ करता है।
- सांस्कृतिक संबंध: बाकू स्थित 18वीं शताब्दी का “आतेशगाह” अग्नि मंदिर, जिसमें देवनागरी और गुरुमुखी लिपि में अभिलेख हैं, ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों का प्रतीक है।
- मानवीय सहयोग: ईरान पर अमेरिका–इज़राइल हमलों के दौरान अज़रबैजान ने 200 से अधिक भारतीय नागरिकों की निकासी में सहयोग किया।
- अज़रबैजान में भारतीय समुदाय लगभग 1,000 व्यक्तियों का है, जो विविध पेशेवर क्षेत्रों में संलग्न हैं।
आगे की राह
- भारत का अज़रबैजान के साथ संलग्न होना एक व्यावहारिक और बहु-संरेखित विदेश नीति दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य विविध क्षेत्रीय हितों का संतुलन है।
- संबंधों का सामान्यीकरण संवाद और पारस्परिक सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है।
- दोनों देश दीर्घकालिक रणनीतिक एवं आर्थिक हितों को प्राथमिकता देंगे तथा अतीत के मतभेदों से आगे बढ़कर स्थिर एवं भविष्य उन्मुख साझेदारी का निर्माण करेंगे।
स्रोत: TH