पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत का सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था का सबसे सशक्त प्रदर्शनकर्ता बनकर उभरा है, जो विकास, उत्पादकता और वैश्विक एकीकरण को आगे बढ़ाने में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत का सेवा क्षेत्र प्रदर्शन
- जीडीपी योगदान: विश्व बैंक के अनुसार, भारत की जीडीपी में सेवाओं का हिस्सा 2024 में बढ़कर 49.9% हो गया, जो महामारी-पूर्व औसत से लगभग 1.5 प्रतिशत अंक अधिक है। यह वृद्धि वैश्विक औसत और अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक है।
- निर्यात: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सेवा निर्यात सुदृढ़ गति बनाए हुए है, जिसे भारतीय सेवाओं की वैश्विक मांग ने सहारा दिया है।
- अप्रैल–जनवरी 2025-26 की अवधि में सेवा निर्यात का अनुमान 348.4 अरब अमेरिकी डॉलर है।
- FY23–FY25 के दौरान जीडीपी में सेवाओं के निर्यात का औसत हिस्सा 9.7% रहा, जो महामारी-पूर्व अवधि के 7.4% से उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।
- रोज़गार: सेवा क्षेत्र रोजगार सृजन का प्रमुख स्रोत बनकर उभरा है। यह कुल रोजगार का लगभग 30% हिस्सा है।
- विगत छह वर्षों में इस क्षेत्र ने लगभग 4 करोड़ रोजगार जोड़े , विशेषकर कोविड-उपरांत पुनर्प्राप्ति काल में, जिससे यह श्रम बाज़ार का एक महत्वपूर्ण झटका-शोषक सिद्ध हुआ।
सेवा निर्यात के क्षेत्रीय प्रेरक
- भारतीय रिज़र्व बैंक के सर्वेक्षण के अनुसार, FY25 में भारत का सॉफ़्टवेयर सेवा निर्यात 7.3% वार्षिक वृद्धि दर्ज कर रहा है। कंप्यूटर सेवाएँ सॉफ़्टवेयर निर्यात का दो-तिहाई हिस्सा हैं और बीपीओ सबसे बड़ा आईटीईएस घटक बना हुआ है।
- सॉफ़्टवेयर सेवाएँ कुल सेवा निर्यात का 40% से अधिक हिस्सा रखती हैं, FY23–FY25 के दौरान 13.5% की दर से बढ़ीं। वहीं, प्रोफ़ेशनल और प्रबंधन परामर्श सेवाएँ 25.9% बढ़ीं और उनका हिस्सा 18.3% तक पहुँच गया।
- ये दोनों मिलकर अब सेवा निर्यात का 65% से अधिक प्रतिनिधित्व करती हैं, जो ज्ञान-आधारित, सीमा-पार सेवाओं में भारत की ताक़त को दर्शाता है।

- भारत वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCCs) का केंद्र बन गया है, जहाँ 1,700 से अधिक केंद्र 19 लाख पेशेवरों को रोजगार देते हैं और FY20–FY25 के दौरान 7% की सीएजीआर से बढ़ रहे हैं।
- जीसीसी अब उत्पाद विकास, एआई सेवाएँ, साइबर सुरक्षा, विश्लेषण और इंजीनियरिंग जैसी उच्च-मूल्य वाली गतिविधियों को संभाल रहे हैं।
- भारत क्लाउड इंफ़्रास्ट्रक्चर और डिजिटल क्षमताओं में अग्रणी है। डेटा सेंटर क्षमता 2025 में 1.4 GW से बढ़कर 2030 तक 8 GW होने का अनुमान है।
- एआई अपनाने, क्लाउड उपयोग और नवाचार (स्टार्ट-अप्स, वेंचर फंडिंग, जनरेटिव एआई पेटेंट) में वृद्धि भारत की स्थिति को डिजिटल सेवाओं के प्रमुख निर्यातक के रूप में और मजबूत करती है।
उठाए गए कदम
- संघीय बजट 2026–27 में आईटी सेवाओं के लिए लक्षित कर सुधार, क्लाउड और डेटा सेंटर हेतु प्रोत्साहन, सरल अनुपालन और व्यापार सुविधा उपाय प्रस्तावित किए गए हैं ताकि भारत की सेवाओं के व्यापार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके।
- मुख्य उपायों में शामिल हैं:
- आईटी एवं आईटीईएस: भारत-आधारित डेटा सेंटर का उपयोग करने वाले विदेशी क्लाउड प्रदाताओं के लिए कर प्रोत्साहन, 15.5% सुरक्षित मार्जिन, स्वचालित अनुपालन और त्वरित अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते।
- केयर इकॉनमी: वैश्विक मांग को पूरा करने हेतु 1.5 लाख बहु-कुशल देखभालकर्ताओं का प्रशिक्षण।

- आयुष: तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, उन्नत WHO पारंपरिक चिकित्सा केंद्र और बेहतर प्रमाणन प्रयोगशालाओं के माध्यम से वैश्विक पहुँच का विस्तार।
- पर्यटन एवं चिकित्सीय यात्रा: पाँच मेडिकल टूरिज़्म हब का विकास, 10,000 गाइडों का प्रशिक्षण, 15 पुरातात्विक स्थलों का उन्नयन, नया बौद्ध सर्किट, ट्रेकिंग/हाइकिंग को बढ़ावा और उच्च गति रेल संपर्क के माध्यम से सांस्कृतिक एवं व्यावसायिक पर्यटन को प्रोत्साहन।
क्षेत्र के सामने चुनौतियाँ
- रोज़गार संबंधी मुद्दे: उच्च जीडीपी योगदान के बावजूद विनिर्माण की तुलना में अपेक्षाकृत कम रोजगार अवशोषण।
- कौशल अंतराल: एआई, साइबर सुरक्षा और ग्रीन फ़ाइनेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में उन्नत डिजिटल और प्रबंधकीय कौशल की कमी।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: आउटसोर्सिंग में फ़िलिपींस और पूर्वी यूरोप जैसे देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
- नियामक बाधाएँ: वित्तीय सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र में जटिल अनुपालन आवश्यकताएँ।
- क्षेत्रीय असमानताएँ: सेवाओं की वृद्धि शहरी केंद्रों (बेंगलुरु, हैदराबाद, गुरुग्राम) में केंद्रित है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र उपेक्षित हैं।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
- भारत का सेवा निर्यात सुदृढ़ और सतत वृद्धि दर्शा रहा है, जो देश के बाह्य क्षेत्रीय प्रदर्शन का प्रमुख चालक बन गया है।
- संघीय बजट 2026–27 लक्षित कर सुधारों, डिजिटल अवसंरचना प्रोत्साहनों, कौशल विकास कार्यक्रमों और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उपायों के माध्यम से इस वृद्धि को समर्थन देता है।
- दीर्घकालिक वृद्धि बनाए रखने और भारत की वैश्विक सेवा महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए कौशल अंतराल, अवसंरचना सीमाएँ एवं नियामक जटिलताओं का समाधान आवश्यक होगा।
स्रोत :PIB
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