अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन द्वारा वैश्विक एआई-फॉर-एनर्जी मिशन प्रारंभ 

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

समाचार में

  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में वैश्विक एआई-फॉर-एनर्जी मिशन का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य 120+ सदस्य देशों में स्वच्छ ऊर्जा में एआई को अपनाने की प्रक्रिया को तीव्र करना है, जिसमें भारत की एनर्जी स्टैक जैसी डिजिटल अवसंरचना पर विशेष बल दिया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन
– यह एक वैश्विक पहल है जिसे 2015 में भारत और फ्रांस ने पेरिस में COP21 के दौरान प्रारंभ किया था।
– इसके 120 से अधिक सदस्य देश हैं और यह अफ्रीका, एशिया एवं द्वीपीय देशों में कार्य करता है।
– यह सरकारों के साथ मिलकर ऊर्जा तक पहुँच और ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने का प्रयास करता है तथा स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की ओर स्थायी संक्रमण हेतु सौर ऊर्जा को बढ़ावा देता है
– ISA की विकसित होती दृष्टि चार रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है:
कैटलिटिक फाइनेंस हब: बड़े पैमाने पर निवेश को खोलने और एकत्रित करने के लिए।
वैश्विक क्षमता केंद्र और डिजिटलीकरण: नवाचार, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सदस्य देशों में क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए।क्षेत्रीय और देश-स्तरीय सहभागिता: रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से लक्षित हस्तक्षेपों को आगे बढ़ाने के लिए।
प्रौद्योगिकी रोडमैप और नीति: उभरती सौर प्रौद्योगिकियों की तैनाती को तीव्र करने हेतु नीतिगत ढाँचे और ज्ञान संसाधनों के माध्यम से।

एआई-फॉर-एनर्जी मिशन

  • यह ऊर्जा संक्रमण के केंद्र में डिजिटल अवसंरचना और नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म को रखता है।
  • इसका उद्देश्य सरकारों, उद्योगों, वित्तीय संस्थानों और बहुपक्षीय संगठनों को एक साथ लाकर डिजिटल और एआई-सक्षम स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को बड़े पैमाने पर लागू करना है।
  • यह नीतिगत ढाँचे को संरेखित करने, डेटा अवसंरचना को सुदृढ़ करने, तकनीकी क्षमता का निर्माण करने और वित्त एकत्रित करने का प्रयास करता है — जिससे अलग-थलग पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर प्रणाली-स्तरीय परिवर्तन संभव हो सके।

मिशन का महत्व

  • वैश्विक ऊर्जा संक्रमण: एआई नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को अनुकूलित कर सकता है, संचरण हानियों को कम कर सकता है और सौर तथा पवन ऊर्जा के पूर्वानुमान को बेहतर बना सकता है।
  • नागरिक-केंद्रित प्रणालियाँ: एआई-आधारित प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके ऊर्जा वितरण अधिक समावेशी, पारदर्शी और कुशल हो सकता है।
  • नीतिगत संरेखण: मिशन का उद्देश्य 120+ देशों में डेटा प्रणालियों, वित्तपोषण और नियामक ढाँचों को सामंजस्यपूर्ण बनाना है, जिससे समन्वित प्रगति सुनिश्चित हो सके।
  • विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा: एआई-आधारित समाधान देशों को पारंपरिक अवसंरचना मार्गों को पार करने में सहायता कर सकते हैं, ग्रिड की लचीलापन बढ़ा सकते हैं, परिचालन लागत घटा सकते हैं और विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती को तीव्र कर सकते हैं।
  • भारत का नेतृत्व: ISA का मेज़बान और संस्थापक सदस्य होने के नाते भारत स्वयं को जलवायु कार्रवाई हेतु डिजिटल नवाचार में अग्रणी के रूप में प्रस्तुत करता है, जो सौर कूटनीति को एआई-आधारित शासन से जोड़ता है।

चुनौतियाँ

  • कई विकासशील देशों में सुदृढ़ ऊर्जा डेटा अवसंरचना का अभाव है, जिससे एआई की प्रभावशीलता सीमित हो जाती है।
  • डिजिटल उपकरणों और कनेक्टिविटी तक असमान पहुँच उन्नत और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच असमानताओं को बढ़ा सकती है।
  • एआई-आधारित ऊर्जा प्रणालियाँ साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील होती हैं, जिनके लिए सुदृढ़ सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
  • विविध राष्ट्रीय विनियमों को एक वैश्विक ढाँचे के अंतर्गत संरेखित करना जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील होगा।

निष्कर्ष

  • ISA का वैश्विक एआई-फॉर-एनर्जी मिशन ऊर्जा प्रणालियों को एआई के माध्यम से लचीला, समावेशी और सतत बनाने का लक्ष्य रखता है।
  • यह एआई-सक्षम ऊर्जा प्रणालियों को बड़े पैमाने पर लागू करने, ग्रिड प्रबंधन में सुधार करने, परिचालन लागत घटाने और विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती को तीव्र करने का प्रयास करता है।
  • इसकी सफलता डेटा अंतराल को समाप्त करने, समान पहुँच सुनिश्चित करने और सुदृढ़ शासन पर निर्भर करेगी, जिससे यह वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का प्रमुख चालक बन सकता है तथा भारत के नेतृत्व को सौर कूटनीति तथा डिजिटल अवसंरचना में उजागर कर सकता है।

स्रोत :DTE

 

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