भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लोकतंत्रीकरण

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

समाचार में

  • हाल ही में यह रेखांकित किया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का लोकतंत्रीकरण सुनिश्चित करने के लिए कंप्यूटिंग संसाधनों, डेटा और एआई मॉडलों तक न्यायसंगत पहुँच आवश्यक है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार एवं प्रतिस्पर्धा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

एआई का लोकतंत्रीकरण क्या है?

  • एआई का लोकतंत्रीकरण का अर्थ है कृत्रिम बुद्धिमत्ता को व्यापक और विविध उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभ, किफायती एवं उपयोगी बनाना। यह केवल तैयार अनुप्रयोगों तक पहुँच से आगे जाता है।
  • इसमें एआई के मूलभूत निर्माण खंडों जैसे कंप्यूटिंग शक्ति, डेटासेट और मॉडल पारिस्थितिकी तंत्र तक पहुँच शामिल है।
  • जैसे-जैसे ये संसाधन बड़े पैमाने पर उपलब्ध होते हैं, व्यक्ति और संस्थाएँ एआई के माध्यम से अपनी उपलब्धियों का विस्तार कर रहे हैं।

एआई के लोकतंत्रीकरण का महत्व

  • समान पहुँच: भारत समावेशी विकास और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने के लिए एआई का लोकतंत्रीकरण कर रहा है, जिसमें 60 लाख से अधिक लोग इस क्षेत्र में कार्यरत हैं।
    • एआई उपकरणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और वित्त जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध कराना सामाजिक-आर्थिक विभाजन को कम करता है।
  • जनकल्याण: एआई शासन को बेहतर बना सकता है, सेवा वितरण को सुधार सकता है और पारदर्शी एवं कुशल प्रणालियों के माध्यम से नागरिकों को सशक्त कर सकता है।
    • व्यावहारिक एआई अनुप्रयोग कृषि, स्वास्थ्य सेवा और आपदा तैयारी को सुदृढ़ कर रहे हैं, जबकि भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र 2,00,000 से अधिक स्टार्टअप्स से युक्त है, जिनमें लगभग 90% एआई का उपयोग करते हैं।
  • राष्ट्रीय विकास: अनुप्रयुक्त एआई डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी और कृषि सुधार जैसी पहलों को समर्थन देकर भारत के विकास को गति दे सकता है।
  • वैश्विक स्थिति: लोकतांत्रिक एआई भारत की भूमिका को नैतिक और समावेशी प्रौद्योगिकी के वैश्विक मानकों को आकार देने में सुदृढ़ करता है।

चुनौतियाँ

  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा: नागरिक डेटा की सुरक्षा करते हुए बड़े पैमाने पर एआई तैनाती सुनिश्चित करना एक गंभीर चिंता है।
  • पक्षपात और निष्पक्षता: यदि एआई प्रणालियाँ समावेशिता और चुनौतीपूर्णता को ध्यान में रखकर डिज़ाइन नहीं की जातीं, तो वे सामाजिक पक्षपात को बनाए रख सकती हैं।
  • अवसंरचना अंतराल: उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट, कंप्यूटिंग शक्ति और ग्रामीण व वंचित क्षेत्रों में कुशल कार्यबल तक सीमित पहुँच।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के अग्रणी एआई मॉडलों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए नवाचार और प्रणालीगत जोखिम प्रबंधन का संतुलन।

नियामक एवं नीतिगत ढाँचा

  • सरकारी क्लाउड और डिजिटल अवसंरचना: डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत GI क्लाउड (मेघराज) स्थापित किया गया, जो भारत सरकार की क्लाउड आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह सुरक्षित, स्केलेबल एवं लचीली क्लाउड सेवाएँ प्रदान करता है।
  • डेटा शासन और कानूनी प्रावधान: भारत का डेटा शासन ढाँचा नवाचार को बढ़ावा देता है और गोपनीयता की रक्षा करता है। सरकारी ओपन डेटा लाइसेंस (2017) गैर-संवेदनशील सार्वजनिक डेटा के पुनः उपयोग की अनुमति देता है, जबकि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (2023) व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और अनुपालन सुनिश्चित करता है।
  • उत्कृष्टता केंद्र (CoEs): स्वास्थ्य, कृषि, सतत शहर और शिक्षा में अनुसंधान-आधारित नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
  • एआई तत्परता हेतु कौशल विकास (SOAR): छात्रों (कक्षा 6–12) और शिक्षकों को एआई के मूलभूत सिद्धांतों एवं नैतिकता में प्रशिक्षित करता है।
  • व्यावसायिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण: आईटीआई और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से एआई एवं रोबोटिक्स सहित 31 नई पाठ्यक्रम उपलब्ध।
  • युवा सहभागिता (YUVAi): छात्रों (कक्षा 8–12) को एआई और सामाजिक कौशल में प्रशिक्षित करता है।
  • सरकारी अधिकारियों के लिए एआई दक्षता: नीति निर्माण और शासन में एआई लागू करने हेतु संरचित प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान (IndiaAI Mission): 500 पीएचडी, 5,000 स्नातकोत्तर और 8,000 स्नातक छात्रों को समर्थन देता है, साथ ही टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में एआई प्रयोगशालाएँ स्थापित करता है।
  • इंडियाएआई मिशन: उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट, पुनः उपयोग योग्य मॉडल (AIKosh) और भारतीय डेटा व भाषाओं पर प्रशिक्षित स्वदेशी बहु-मोडल एआई मॉडल तक पहुँच का विस्तार करता है।

एआई संसाधनों के लोकतंत्रीकरण हेतु वैश्विक सहयोग

  • भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026: वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देता है ताकि एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण हो सके, विशेषकर ग्लोबल साउथ देशों के लिए डेटा, कंप्यूट और अवसंरचना तक न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित की जा सके।
  • डेमोक्रेटाइजिंग AI रिसोर्सेज वर्किंग ग्रुप: भारत, मिस्र और केन्या की सह-अध्यक्षता में यह समूह एआई संसाधनों को सुलभ और किफायती बनाने, वितरित अवसंरचना एवं खुले नवाचार को बढ़ावा देने तथा क्षमता निर्माण तथा ज्ञान विनिमय का समर्थन करने का लक्ष्य रखता है।

निष्कर्ष एवं आगे की राह

  • भारत का एआई लोकतंत्रीकरण दृष्टिकोण दर्शाता है कि पैमाना, समावेशन और नवाचार साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
  • किफायत, खुलापन और विश्वास पर ध्यान केंद्रित करने से एआई के लाभ किसानों, छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स एवं सार्वजनिक संस्थानों तक पहुँचते हैं।
  • भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 की मेज़बानी करते हुए भारत इस अनुभव को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत करता है, ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं से आकार लिया हुआ एक मॉडल प्रदान करता है।
  • आगे की राह स्पष्ट है—एआई का लोकतंत्रीकरण एक बार का प्रयास नहीं बल्कि सतत प्रतिबद्धता है, ताकि तकनीकी प्रगति समाजों को सशक्त बनाए, असमानताओं को कम करे और सभी के लिए सतत विकास का समर्थन करे।

स्रोत :PIB

 

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