केंद्रीय बजट 2026: प्रमुख बिंदु

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-2027 प्रस्तुत किया।

भारत के केंद्रीय बजट का संवैधानिक आधार

  • केंद्रीय बजट की तैयारी, प्रस्तुति और अनुमोदन का अधिकार भारतीय संविधान से प्राप्त होता है।
  • वार्षिक वित्तीय विवरण (अनुच्छेद 112):
    • यह केंद्रीय बजट का मूल संवैधानिक प्रावधान है। यह सरकार को प्रत्येक वर्ष बजट प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करता है।
    • राष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
      • इसमें अनुमानित प्राप्तियाँ और व्यय दर्शाए जाते हैं।
      • यह वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल – 31 मार्च) के लिए होता है।
  • अनुदानों की माँग पर मतदान (अनुच्छेद 113):
    • भारत की संचित निधि से संसद की स्वीकृति के बिना कोई धनराशि व्यय नहीं जा सकती।
      • अनुदानों की माँग केवल लोकसभा में चर्चा और मतदान के लिए आती है।
      • राज्यसभा चर्चा कर सकती है, परंतु मतदान नहीं कर सकती।
      • यह सार्वजनिक व्यय पर संसदीय नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
  • अनुदान विधेयक (अनुच्छेद 114):
    • अनुदानों की माँग स्वीकृत होने के बाद एक अनुदान विधेयक प्रस्तुत किया जाता है।
    • यह सरकार को संचित निधि से धन आहरित करने और स्वीकृत उद्देश्यों पर व्यय करने का अधिकार देता है।
      • इस विधेयक के बिना सरकारी व्यय असंवैधानिक माना जाएगा।
  • कानून के अधिकार के बिना कर नहीं (अनुच्छेद 265):
    • कोई भी कर कानून के अधिकार के बिना लगाया या वसूला नहीं जा सकता।
    • बजट में सभी कर प्रस्तावों को विधेयक द्वारा समर्थित होना चाहिए और संसद से अनुमोदित होना आवश्यक है।
    • यह मनमाने कराधान को रोकता है।
  • संचित निधि, आकस्मिक निधि, सार्वजनिक खाता (अनुच्छेद 266):
    • संचित निधि: सरकार का मुख्य खाता।
    • आकस्मिक निधि: आपात स्थितियों के लिए।
    • सार्वजनिक खाता: ट्रस्ट के रूप में रखी गई धनराशि (जैसे भविष्य निधि, बचत आदि)।
      • अधिकांश बजटीय लेन-देन संचित निधि से संबंधित होते हैं।
  • धन विधेयक (अनुच्छेद 110):
    • वित्त विधेयक (बजट का हिस्सा) एक धन विधेयक होता है।
    • इसे केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
    • राज्यसभा इसे अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती, केवल सिफारिश कर सकती है।
    • यह वित्तीय मामलों में लोकसभा को प्रधानता प्रदान करता है।

केंद्रीय बजट 2026–27 की प्रमुख विशेषताएँ

यह प्रथम केंद्रीय बजट है जो कर्तव्य भवन में तैयार किया गया। वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि यह तीन कर्तव्यों से प्रेरित है—विकास को तीव्र करना, जनशक्ति का निर्माण करना, और समावेशी विकास सुनिश्चित करना।

प्रथम कर्तव्य: आर्थिक विकास को तीव्र और सतत बनाना

  • वैश्विक अस्थिरता के बीच उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और लचीलापन पर ध्यान केंद्रित।
  • प्रमुख हस्तक्षेपों में सात रणनीतिक एवं अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा; पारंपरिक उद्योगों का पुनरुद्धार; चैंपियन MSMEs का निर्माण; अवसंरचना पर निरंतर बल; दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा; और सिटी इकोनॉमिक रीजन (CERs) का विकास शामिल।
  • प्रमुख क्षेत्रीय घोषणाएँ
    • बायोफार्मा शक्ति: पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का निवेश, भारत को वैश्विक बायोफार्मा केंद्र बनाने हेतु। इसमें नए एवं उन्नत NIPERs, 1,000 से अधिक क्लिनिकल ट्रायल साइट्स, और त्वरित दवा अनुमोदन शामिल।
    • वस्त्र उद्योग: एकीकृत कार्यक्रम जिसमें फाइबर आत्मनिर्भरता, क्लस्टर आधुनिकीकरण, हैंडलूम व हस्तशिल्प, सतत वस्त्र, और समर्थ 2.0 के माध्यम से कौशल विकास शामिल।
    • MSMEs: भविष्य के चैंपियनों को विकसित करने हेतु ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड।
    • अवसंरचना: सार्वजनिक पूंजीगत व्यय FY 2026–27 में बढ़कर ₹12.2 लाख करोड़ होगा, जिससे निवेश गति बनी रहेगी।
    • हरित लॉजिस्टिक्स: नए समर्पित मालवाहक कॉरिडोर, 20 राष्ट्रीय जलमार्ग, और लॉजिस्टिक्स जनशक्ति हेतु प्रशिक्षण केंद्र।
    • शहरी विकास: प्रत्येक CER के लिए पाँच वर्षों में ₹5,000 करोड़, सुधार-आधारित चुनौती मोड के माध्यम से।
    • हाई-स्पीड रेल: सात कॉरिडोर, जो अंतर-शहरी विकास कनेक्टर के रूप में कार्य करेंगे।

द्वितीय कर्तव्य: आकांक्षाओं की पूर्ति और क्षमता निर्माण

  •  इसका उद्देश्य नागरिकों को विकास के साझेदार के रूप में सशक्त बनाना है। बजट मानव पूंजी में निवेश को बेहतर करता है और यह उल्लेख करता है कि 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकल चुके हैं।
  • प्रमुख पहलें:
    • मेडिकल टूरिज़्म: स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अनुसंधान को एकीकृत करते हुए पाँच क्षेत्रीय चिकित्सा हब।
    • पशु चिकित्सा शिक्षा: निजी क्षेत्र की क्षमता निर्माण के माध्यम से 20,000 से अधिक पेशेवरों को जोड़ने का समर्थन।
    • AVGC क्षेत्र: भविष्य की प्रतिभा आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु 15,000 विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स।
    • शिक्षा एवं लैंगिक समानता: STEM संस्थानों के लिए प्रत्येक ज़िले में एक छात्रावास (बालिकाओं हेतु)।
    • पर्यटन एवं आतिथ्य: राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना तथा 10,000 पर्यटक मार्गदर्शकों का कौशल उन्नयन।
    • खेलकूद: प्रतिभा, अवसंरचना और खेल विज्ञान के व्यवस्थित विकास हेतु खेलो इंडिया मिशन का शुभारंभ।

तृतीय कर्तव्य: सबका साथ, सबका विकास

  • यह विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में समावेशी विकास के अनुरूप है।
    • कृषि: भारत-विस्तार—एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित बहुभाषी परामर्श मंच, जो एग्रीस्टैक और ICAR प्रणालियों को एकीकृत करता है।
    • महिला सशक्तिकरण: SHE मार्ट्स के माध्यम से स्वयं सहायता उद्यमियों को सुदृढ़ करना।
    • मानसिक स्वास्थ्य: NIMHANS-2 की स्थापना तथा रांची और तेजपुर स्थित संस्थानों का उन्नयन।
    • क्षेत्रीय विकास: ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, पुरवोदय राज्यों में पर्यटन स्थलों का विकास, ई-बसें, और उत्तर-पूर्व में बौद्ध परिपथ योजना

कर सुधार: सरल एवं विकासोन्मुखी

  • प्रत्यक्ष कर: नया आयकर अधिनियम, 2025, अप्रैल 2026 से प्रभावी।
    • विदेशी पर्यटन, शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों हेतु कम TCS दरें।
    • सरलीकृत TDS, स्वचालित कम-कटौती प्रमाणपत्र, रिटर्न संशोधन हेतु विस्तारित समयसीमा।
    • दंड और अभियोजन का युक्तिकरण, लघु अपराधों का अपराधमुक्तिकरण।
    • सहकारी समितियों और आईटी सेवाओं हेतु लक्षित राहत।
    • वैश्विक क्लाउड, डेटा सेंटर और विनिर्माण निवेश आकर्षित करने हेतु प्रोत्साहन।
  • अप्रत्यक्ष कर: विनिर्माण, ऊर्जा संक्रमण, विमानन और महत्वपूर्ण खनिजों को समर्थन देने हेतु सीमा शुल्क का युक्तिकरण।
    • व्यक्तिगत आयात पर कम शुल्क और आवश्यक दवाओं हेतु छूट।
    • तीव्र, प्रौद्योगिकी-संचालित सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ और विस्तारित AEO लाभ।
    • कूरियर, मत्स्य पालन और SEZ सुधारों के माध्यम से निर्यात को बढ़ावा।

राजकोषीय समेकन और स्थिरता

  • बजट विकास को समर्थन देते हुए राजकोषीय अनुशासन बनाए रखता है:
    • राजकोषीय घाटा: BE 2026–27 में GDP का 4.3%।
    • ऋण-से-GDP अनुपात: घटकर 55.6%।
    • पूंजीगत व्यय (RE 2025–26): लगभग ₹11 लाख करोड़।
    • गैर-ऋण प्राप्तियाँ (BE 2026–27): ₹36.5 लाख करोड़।

निष्कर्ष

  • केंद्रीय बजट 2026–27 भारत के आगामी विकास चरण हेतु एक कर्तव्य-प्रेरित, सुधारोन्मुखी और समावेशी मार्गदर्शिका प्रस्तुत करता है।  
  • यह बजट राजकोषीय अनुशासन को बनाए रखते हुए जनशक्ति, उत्पादकता और अवसंरचना में साहसिक निवेश को संयोजित करता है, जिससे एक सुदृढ़, प्रतिस्पर्धी एवं न्यायसंगत विकसित भारत की नींव रखी जाती है, जो तीन कर्तव्यों पर आधारित है।

स्रोत: PIB

 

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