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समाचार में
- हाल ही में राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया गया।
राष्ट्रीय युवा दिवस या राष्ट्रीय युवा दिवस
- यह प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को महान आध्यात्मिक नेता, दार्शनिक और चिंतक स्वामी विवेकानंद की स्मृति में मनाया जाता है, जिनका युवाओं की क्षमता में अटूट विश्वास आज भी देश के नागरिकों के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
- उनका प्रेरणादायी जीवन और सशक्त संदेश युवाओं को अपने सपनों को पोषित करने, अपनी ऊर्जा को उजागर करने और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करने के लिए प्रेरित करता है जो उनके आदर्शों के अनुरूप हो।
- युवा, जिन्हें 15–29 वर्ष की आयु वर्ग में परिभाषित किया गया है, भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 40% हिस्सा बनाते हैं।
महत्व
- राष्ट्रीय युवा दिवस भारत के युवाओं की आकांक्षाओं और जिम्मेदारियों को उजागर करता है, जो 35 वर्ष से कम आयु की जनसंख्या का 65% से अधिक हिस्सा हैं तथा विकसित भारत 2047 को प्राप्त करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
- सरकार ने एक व्यापक युवा सशक्तिकरण ढाँचा तैयार किया है जिसमें नागरिक भागीदारी, कौशल विकास, उद्यमिता, स्वास्थ्य, फिटनेस और राष्ट्रीय सेवा शामिल हैं। यह ढाँचा युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा अन्य मंत्रालयों के सहयोग से संचालित है, जिसका उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाना है।
संबंधित कदम
- मेरा युवा भारत (MY Bharat): यह युवा मामले और खेल मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त, प्रौद्योगिकी-आधारित मंच है जो युवाओं को स्वयंसेवा, कौशल विकास, नेतृत्व एवं अनुभवात्मक शिक्षा के अवसरों से जोड़ता है।
- राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS): यह योजना छात्र युवाओं में सामाजिक चेतना उत्पन्न करने और सामुदायिक सेवा के माध्यम से व्यक्तित्व विकास का उद्देश्य रखती है।
- अग्निपथ योजना (2022): सरकार ने 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की।
- इस योजना के अंतर्गत पुरुष और महिला दोनों अभ्यर्थियों को तीनों सेनाओं में ‘अधिकारी स्तर से नीचे’ की श्रेणी में चार वर्ष की अवधि के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाता है।
- इस कार्यक्रम का उद्देश्य 17.5 से 21 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को चार वर्षों की सैन्य सेवा के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती करना है।
- प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार रूपांतरण (PM-SETU): अक्टूबर 2025 में शुरू की गई यह प्रमुख योजना भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) का आधुनिकीकरण करने और व्यावसायिक प्रशिक्षण को वैश्विक उद्योग मानकों के अनुरूप बनाने हेतु है।
- कौशल भारत मिशन (SIM): 2015 में विश्व युवा कौशल दिवस पर शुरू किया गया, यह व्यक्तियों को कौशल, पुनः कौशल और उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है।
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): 2015 में शुरू की गई, यह युवाओं को अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण और पुनः कौशल/उन्नत कौशल प्रदान करती है।
- जन शिक्षण संस्थान (JSS): प्रारंभ में 1967 में श्रमिक विद्यापीठ (SVP) के रूप में शुरू, यह गैर-औपचारिक तरीके से कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS): अगस्त 2016 में शुरू, यह योजना प्रशिक्षुओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देती है।
- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY): 2014 में शुरू, यह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का हिस्सा है और ग्रामीण युवाओं की करियर आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ गरीब परिवारों की आय में विविधता लाने का उद्देश्य रखती है।
- ग्रामीण स्वरोजगार और प्रशिक्षण संस्थान (RSETIs): जनवरी 2009 में शुरू, यह योजना ग्रामीण युवाओं को मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करती है और प्रशिक्षण के बाद समर्थन व ऋण सुविधा उपलब्ध कराती है।
- प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (2025): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित, ₹1 लाख करोड़ की राशि के साथ।
- नव-नियोजित युवाओं को ₹15,000 तक की वित्तीय प्रोत्साहन राशि दी जाएगी और नियोक्ताओं को प्रत्येक नए कर्मचारी पर ₹3,000 प्रति माह तक सहायता मिलेगी।
- स्टार्टअप इंडिया (2016): नवाचार और उद्यमिता के लिए एक सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने हेतु।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): सूक्ष्म उद्यमों और छोटे व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु।
- राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK): 2014 में शुरू, यह 10–19 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों की समग्र स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु है।
निष्कर्ष
- राष्ट्रीय युवा दिवस 2026 शिक्षा, स्टार्टअप, सेवा और नेतृत्व के माध्यम से भारत के भविष्य को आकार देने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
- स्वामी विवेकानंद से प्रेरित यह दिवस इस बात पर बल देता है कि युवा केवल उत्तराधिकारी नहीं बल्कि भारत की 2047 की यात्रा के निर्माता हैं।
| स्वामी विवेकानंद – जन्म: 12 जनवरी 1863, कोलकाता में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में। – उन्होंने योग और वेदांत की हिंदू दर्शन को पश्चिम में परिचित कराया। – वे रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे और भारत में आध्यात्मिक एवं सामाजिक सुधार के लिए समर्पित रहे। – 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में अपने भाषण से वैश्विक पहचान प्राप्त की, जिसमें उन्होंने सार्वभौमिक सहिष्णुता, सभी धर्मों की स्वीकृति और भारतीय परंपराओं पर गर्व का संदेश दिया। – भारत लौटने के बाद उन्होंने 1897 में रामकृष्ण मिशन और 1899 में बेलूर मठ की स्थापना की। – उनकी शिक्षाओं, व्याख्यानों और लेखन (राजयोग, ज्ञानयोग, कर्मयोग) के माध्यम से उन्होंने योग का अभ्यास एवं ‘नव-वेदांत’ के सिद्धांतों का प्रसार किया। – नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें “आधुनिक भारत का निर्माता” कहा था। |
स्रोत :PIB
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संक्षिप्त समाचार 12-01-2026