छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा सामुदायिक वन अधिकार आदेश वापस

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ पर्यावरण

संदर्भ

  • छत्तीसगढ़ वन विभाग ने हाल ही में मई 2025 की उस परामर्श को वापस ले लिया है, जिसमें गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), निजी संस्थाओं और अन्य विभागों को सामुदायिक वन संसाधन (CFR) प्रबंधन गतिविधियों में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया था।
    • यह निर्देश व्यापक विरोध के बाद वापस लिया गया, क्योंकि इसे वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 का उल्लंघन माना गया।

पृष्ठभूमि

  • मई 2025 के आदेश में 2020 के एक परिपत्र और राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता (NWPC), 2023 का उदाहरण दिया गया था, जिसमें वैज्ञानिक वन प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया गया था। 
  • यह आदेश जनजातीय मामलों के मंत्रालय की 2023 की उन दिशानिर्देशों से टकराता था, जो ग्राम सभाओं और उनकी CFR प्रबंधन समितियों (CFRMCs) को CFR योजनाएं स्वतंत्र रूप से तैयार करने और अनुमोदित करने का अधिकार देते हैं, और केवल बाद में वन विभाग से परामर्श की आवश्यकता होती है।

वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006

  • वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों (OTFDs) को वन संसाधनों के सतत उपयोग, संरक्षण और प्रबंधन का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
  • प्रमुख प्रावधान:
    • धारा 3(1)(i): वनवासियों को सामुदायिक वन संसाधनों की रक्षा, संरक्षण, पुनरुत्पादन और प्रबंधन का अधिकार देता है।
    • धारा 5: ग्राम सभाओं को वन्यजीव, जैव विविधता और वनों की रक्षा का अधिकार देता है।
    • ग्राम सभा की भूमिका: यह कानून ग्राम सभाओं को वन शासन का केंद्र बनाता है।
सामुदायिक वन संसाधन (CFR)
– सामुदायिक वन संसाधन (CFR) उन वन क्षेत्रों को कहते हैं जिन्हें अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों (OTFDs) द्वारा पारंपरिक रूप से आजीविका, सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक आवश्यकताओं के लिए उपयोग और संरक्षण किया गया है। 
– यह परिभाषा FRA, 2006 की धारा 2(क) के अंतर्गत दी गई है।

सामुदायिक वन अधिकारों का महत्व

  • जनजातीय समुदायों का सशक्तिकरण: CFRR पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की मान्यता और आत्म-शासन को बढ़ावा देता है।
  • वन संरक्षण: शोध बताते हैं कि स्थानीय समुदायों द्वारा शासित वनों में जैव विविधता और पुनरुत्पादन दर अधिक होती है।
  • आजीविका सुरक्षा: वन उपज तक कानूनी पहुंच और सतत आय का स्रोत प्रदान करता है।
  • जलवायु लाभ: सामुदायिक रूप से प्रबंधित वन कार्बन अवशोषण में सहायक होते हैं, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है।

प्रमुख समस्याएं

  • संस्थागत अधिकार संघर्ष: यह वन विभाग की नियंत्रण-आधारित सोच और समुदाय-आधारित शासन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को दर्शाता है।
  • कानूनी बनाम कार्यकारी व्याख्या: FRA ग्राम सभा को वन शासन का केंद्र बनाता है, जबकि वन विभाग की व्याख्या इस प्रावधान को कमजोर करती है।
  • केंद्रीय दिशानिर्देशों में देरी: मॉडल CFR योजनाओं और कार्यान्वयन मॉड्यूल की अनुपस्थिति नीति अस्पष्टता को जन्म देती है।

सरकारी पहलें

  • धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA): यह योजना ग्राम सभाओं को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करती है।
  • राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता, 2023 (NWPC, 2023): पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी वैज्ञानिक और तकनीकी दिशानिर्देश।
  • डिजिटल इंडिया वन मित्र ऐप: यह ऐप GPS के माध्यम से सामुदायिक वन संसाधन भूमि का डिजिटल मानचित्रण करता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
    • यह ऐप ग्राम सभाओं को उनके मान्यता प्राप्त वन क्षेत्रों को परिभाषित करने और प्रबंधित करने में सहायता करता है, तथा वन अधिकारों के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।

Source: IE

 

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