राज्य में पंचायतों को अधिकार हस्तांतरण की स्थिति 2024

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन व्यवस्था

सन्दर्भ

  • केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने ‘राज्यों में पंचायतों को हस्तांतरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग’ (2024) शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है।

परिचय

  • हस्तांतरण सूचकांक 73वें और 74वें संशोधन के कार्यान्वयन का आकलन करने का एक तरीका है और इसे भारतीय लोक प्रशासन संस्थान द्वारा तैयार किया गया है।
    • यह रिपोर्ट सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में पंचायती राज संस्थाओं को शक्ति और संसाधन हस्तांतरण की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करती है।
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को छह प्रमुख आयामों – रूपरेखा, कार्य, वित्त, कार्यकर्त्ता, क्षमता वृद्धि और जवाबदेही के आधार पर रैंकिंग दी गई।

मूल्यांकन की आवश्यकता

  • अनिवार्य संवैधानिक प्रावधान – जैसे राज्य चुनाव आयोगों द्वारा नियमित पंचायत चुनाव, अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए आरक्षण, तथा राज्य वित्त आयोगों का गठन – लागू किए गए हैं।
    • पंचायतों को कार्य, वित्त और पदाधिकारियों का हस्तांतरण विभिन्न राज्यों में असंगत रहा है।
    • प्रभावी स्थानीय शासन केवल इन हस्तांतरण तंत्रों के माध्यम से प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  • इसमें पंचायत कार्यों में निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘क्षमता वृद्धि’ उपायों और ‘जवाबदेही’ को आवश्यक बताया गया है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • कर्नाटक, राज्यों के बीच पंचायत राज प्रणाली के समग्र हस्तांतरण सूचकांक (DI) रैंकिंग में शीर्ष पर है, जबकि केरल और तमिलनाडु दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं।
  • 2013-14 से 2021-22 की अवधि के बीच हस्तांतरण 39.9% से बढ़कर 43.9% हो गया है
राज्य में पंचायतों को अधिकार हस्तांतरण की स्थिति
  • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के शुभारंभ के साथ, इस अवधि के दौरान सूचकांक का क्षमता वृद्धि घटक 44% से बढ़कर 54.6% हो गया है।
  •  इस अवधि के दौरान, कार्यकर्त्ताओं से संबंधित सूचकांक के घटक में 10% से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि (39.6% से 50.9% तक) देखी गई है।
  • ढाँचागत मानदंड में, केरल प्रथम स्थान पर है, उसके पश्चात् महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा का स्थान है। कार्यात्मक मानदंड में, तमिलनाडु सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद कर्नाटक, ओडिशा और राजस्थान का स्थान है।
  •  वित्तीय मानदंड में, कर्नाटक ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, उसके बाद केरल, तमिलनाडु और राजस्थान का स्थान है।
  •  कार्यकर्त्ताओं के मानदंड में, गुजरात प्रथम स्थान पर है, उसके पश्चात् तमिलनाडु और केरल का स्थान है। 
  • क्षमता निर्माण मानदंड में, तेलंगाना ने प्रथम स्थान हासिल किया है, उसके पश्चात् तमिलनाडु और गुजरात का स्थान है।

रिपोर्ट में चिन्हित चुनौतियाँ

  • कानूनी और संस्थागत अंतराल: कुछ राज्यों ने नियमित पंचायत चुनाव नहीं करवाए हैं। 
  • नीति कार्यान्वयन में सीमित भूमिका: पंचायतों की प्रमुख केंद्र प्रायोजित योजनाओं (MGNREGA, PMAY, NHM, आदि) में नाममात्र की भूमिका है। 
  • राज्यों के बीच असमानताएँ: कुछ राज्य मजबूत शासन संरचनाओं और कानूनी प्रावधानों के कारण काफी बेहतर प्रदर्शन करते हैं, जबकि अन्य अप्रभावी कार्यान्वयन एवं राजनीतिक अनिच्छा के कारण संघर्ष करते हैं। 
  • कम सार्वजनिक भागीदारी: ग्राम सभाएँ, जो सहभागी शासन के लिए आवश्यक हैं, प्रायः कम उपस्थित होती हैं और प्रभावशीलता की कमी होती है।

अनुशंसाएँ और सुझाव

  • कानूनी ढाँचे को मजबूत करना: पंचायतों के लिए नियमित और समय पर चुनाव सुनिश्चित करना।
  • राज्य चुनाव आयोगों (SECs) को राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए सशक्त बनाना।
  • वित्तीय सशक्तिकरण: पंचायतों को प्रत्यक्ष और सुनिश्चित वित्त पोषण प्रदान करने के लिए स्थानीय सरकार के लिए एक समेकित निधि की स्थापना करना।
  • पंचायतों को GST राजस्व का पर्याप्त हिस्सा प्राप्त हो, यह सुनिश्चित करने के लिए 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना।
  • कार्यात्मक स्वायत्तता बढ़ाना: ग्रामीण विकास में पंचायतों की अग्रणी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख सेवा वितरण कार्यों का विकेंद्रीकरण करना।
  • जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देना: ग्राम सभा की भागीदारी को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाकर उन्हें मजबूत बनाना।

Source: TH

 

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