भारत-बांग्लादेश सीमा विवाद

पाठ्यक्रम: GS3/ आंतरिक सुरक्षा

संदर्भ

  • भारत ने सीमा पर सुरक्षा उपायों को लेकर बांग्लादेश के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलबसमान(summoned) किया।

भारत-बांग्लादेश सीमा विवाद के कारण

  • सीमा प्राधिकारियों के लिए 1975 के संयुक्त भारत-बांग्लादेश दिशा-निर्देशों के अनुसार, सीमा की शून्य रेखा से 150 गज के अंदर कोई भी रक्षा संरचना नहीं बनाई जा सकती।
    • भारत तार की बाड़ को रक्षा संरचना नहीं मानता, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान ऐसा मानते हैं।
  • सीमा निवासियों पर प्रभाव: बाड़ लगाने से, विशेष रूप से सघन जनसंख्या वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में, स्थानीय जनसंख्या के लिए व्यावहारिक चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं।
  • CCTV और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी: भारत ने सीमा की निगरानी के लिए CCTV कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट सहित उच्च तकनीक वाली निगरानी प्रणाली लागू की है।
    • इससे बांग्लादेश में संप्रभुता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं, आरोप है कि इस तरह की निगरानी उसकी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है।
भारत-बांग्लादेश सीमा
– भारत और बांग्लादेश के मध्य 4,096.7 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो भारत द्वारा अपने किसी भी पड़ोसी देश के साथ साझा की जाने वाली सबसे बड़ी भूमि सीमा है।
सीमा साझा करने वाले राज्य: पश्चिम बंगाल (2,216.7 किलोमीटर), असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम।
बाड़ लगाना(Fencing): भारत-बांग्लादेश सीमा पर, पश्चिम बंगाल सहित सभी पूर्वी राज्यों को कवर करते हुए, कुल 4,156 किलोमीटर में से 3,141 किलोमीटर पर बाड़ लगाई गई है।

सीमाओं के प्रबंधन की आवश्यकता

  • सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: भारत की छिद्रपूर्ण सीमाएँ अवैध रूप से सीमा पार करने, तस्करी करने और सीमा पार आतंकवाद, विशेष रूप से पाकिस्तान में आतंकवादी समूहों से, को बढ़ावा देती हैं, जिससे सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण खतरे उत्पन्न होते हैं।
  • जनसांख्यिकीय परिवर्तन: बांग्लादेश से अनियमित प्रवासन ने सीमावर्ती राज्यों में जनसांख्यिकीय परिदृश्य को प्रभावित किया है, जिससे सामाजिक तनाव और संसाधन वितरण में चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं।
  • बुनियादी ढाँचा विकास: भारत के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, संचार नेटवर्क और सीमा चौकियों जैसे बुनियादी ढाँचे का अभाव है, जिससे सीमा प्रबंधन प्रयासों की प्रभावशीलता में बाधा आती है।

भारत का सीमा प्रबंधन

  • सीमा निगरानी: निरंतर निगरानी और खतरों पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए बाड़, फ्लडलाइट, सड़कें, सीमा चौकियाँ (BOPs) और कंपनी संचालन ठिकानों (COBs) का निर्माण।
  • सीमा सुरक्षा बल भारत की सीमाओं पर गश्त और सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें घुसपैठ, तस्करी एवं अन्य सुरक्षा चिंताओं से निपटना शामिल है।
  • सीमा पार व्यापार: एकीकृत चेकपोस्ट एवं व्यापार सुविधा केंद्रों के निर्माण ने सीमा शुल्क निकासी को सुव्यवस्थित किया है और व्यापार बाधाओं को कम किया है।
  • सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP): पाकिस्तान की सीमा से लगे राज्यों – जम्मू और कश्मीर, पंजाब, गुजरात एवं राजस्थान में सीमा क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए 1986-87 में प्रारंभ किया गया – बाद में इसे सभी भूमि सीमाओं तक विस्तारित किया गया।

निष्कर्ष

  • सीमा विवादों का समाधान राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद और अवैध गतिविधियों के मद्देनजर। 
  • भारत और बांग्लादेश के मध्य 2015 का भूमि सीमा समझौता (LBA) लंबे समय से चले आ रहे सीमा मुद्दों को सुलझाने में कूटनीतिक बातचीत के महत्त्व का प्रमाण है।
भूमि सीमा समझौता (LBA)
– भारत और बांग्लादेश के बीच 6 जून 2015 को बांग्लादेश में हस्ताक्षरित भूमि सीमा समझौता (LBA) द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्त्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। 
– यह समझौता लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों, विशेष रूप से भारत-बांग्लादेश सीमा पर परिक्षेत्रों के आदान-प्रदान के संबंध में एक ऐतिहासिक कदम था।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
भारत से बांग्लादेश: इस समझौते के अंतर्गत 111 भारतीय एन्क्लेव (जिन्हें चिटमहल भी कहा जाता है) बांग्लादेश को हस्तांतरित किए गए, जिनका क्षेत्रफल 17,160.63 एकड़ है। 
बांग्लादेश से भारत: इसके विपरीत, भारत को बांग्लादेश में स्थित 51 एन्क्लेव मिले, जिनका कुल क्षेत्रफल 7,110.02 एकड़ है। 
– भूमि विनिमय में, बांग्लादेश को भारत की तुलना में भूमि का बड़ा हिस्सा मिला। यह असमानता विवाद का विषय थी, लेकिन अंततः इसे दशकों पुराने सीमा मुद्दों को हल करने के लिए आवश्यक समझौते के रूप में देखा गया।

Source: IE

 

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