भारत में पुनर्नवीनीकृत चिकित्सा उपकरण: पहुँच बनाम विनियमन

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे

संदर्भ

  • पुनर्नवीनीकृत उच्च-स्तरीय चिकित्सा उपकरणों का आयात, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, औद्योगिक नीति और रोगी सुरक्षा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

पुनर्नवीनीकृत चिकित्सा उपकरण क्या हैं?

  • पुनर्नवीनीकृत चिकित्सा उपकरण वे पूर्व-प्रयुक्त प्रणालियाँ होती हैं जिन्हें उनकी मूल परिचालन विनिर्देशों तक पुनर्स्थापित किया गया है और अत्यधिक कम कीमतों पर पुनः बेचा जाता है।
  • ये सामान्यतः पूँजी-गहन मशीनें होती हैं, जिनका उपयोग उन्नत निदान और शल्य चिकित्सा में किया जाता है।
  • उदाहरणस्वरूप:
    • एमआरआई स्कैनर (चुम्बकीय अनुनाद इमेजिंग)
    • सीटी स्कैनर (कंप्यूटेड टोमोग्राफी)
    • पीईटी-सीटी प्रणालियाँ (पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी–सीटी)
    • उन्नत एंडोस्कोपी और लैप्रोस्कोपी इकाइयाँ
    • रोबोटिक नेविगेशन और शल्य चिकित्सा प्रणालियाँ
लागत क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उपकरणनई कीमतपुनर्नवीनीकृत कीमत
1.5T MRI₹4–8 करोड़₹1–3.5 करोड़
PET-CTलगभग ₹20 करोड़₹60 लाख–₹3.5 करोड़
CT स्कैनर₹2–4 करोड़₹20 लाख–₹2.5 करोड़
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों के अस्पतालों, जिला केंद्रों तथा स्वतंत्र निदान सुविधाओं के लिए, ये बचत यह निर्धारित कर सकती है कि उन्नत निदान सेवाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी या नहीं

भारत में वर्तमान विनियामक परिदृश्य

  • कोई समर्पित विनियामक मार्ग नहीं: भारत में वर्तमान में मेडिकल डिवाइस नियम, 2017 के अंतर्गत पुनर्नवीनीकृत उपकरणों को नियंत्रित करने हेतु कोई विशिष्ट विनियामक ढाँचा उपलब्ध नहीं है।
  • वर्ष 2020 में सभी चिकित्सा उपकरणों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के अंतर्गत ‘औषधि ’ के रूप में अधिसूचित किया गया, जिससे केंद्रीय पर्यवेक्षण का विस्तार हुआ, किंतु पुनर्नवीनीकृत उत्पादों के लिए कोई विशेष लाइसेंसिंग मार्ग निर्मित नहीं किया गया।

वर्तमान में आयात कैसे अनुमत है?

  • प्रयुक्त चिकित्सा उपकरणों का आयात मुख्यतः खतरनाक और अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन एवं सीमापार गमन) नियम, 2016 के अंतर्गत नियंत्रित होता है। दिसंबर 2022 में किए गए संशोधनों के अनुसार:
    • कुछ उच्च-स्तरीय प्रयुक्त उपकरणों का आयात अनुमत है।
    • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) से पूर्व अनुमति आवश्यक है।
    • अनुरक्षण इतिहास, गुणवत्ता आश्वासन रिपोर्ट और अनुपालन दस्तावेज़ प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
    • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से तकनीकी इनपुट आवश्यक है।
    • विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से आयात प्राधिकरण अनिवार्य है।
  • विनियामक मुद्दे:जनवरी 2025 में CDSCO ने कहा कि पुनर्नवीनीकृत उपकरणों का आयात बिक्री या वितरण हेतु अनुमत नहीं है क्योंकि मेडिकल डिवाइस नियमों में इसके लिए कोई लाइसेंसिंग प्रावधान नहीं है।
    • किंतु नवंबर 2025 में MoEFCC के अंतर्गत एक तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने सीटी स्कैनर, एमआरआई प्रणाली और रोबोटिक शल्य इकाइयों सहित कई पुनर्नवीनीकृत उपकरणों को पुनः उपयोग हेतु स्वीकृति दी। इससे एक कानूनी असंगति उत्पन्न हुई:
      • अपशिष्ट नियमों के अंतर्गत MoEFCC की स्वीकृति;
      • चिकित्सा उपकरण कानूनों के अंतर्गत CDSCO का निषेध।
  • आयात पर निर्भरता:जटिल विनिर्माण आवश्यकताओं (जैसे परिशुद्ध डिटेक्टर, उन्नत सॉफ़्टवेयर प्रणाली और परिष्कृत आपूर्ति श्रृंखला) के कारण भारत उच्च-स्तरीय इमेजिंग प्रौद्योगिकियों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर बना हुआ है।
    • पुनर्नवीनीकृत उपकरण सामान्यतः अमेरिका, जर्मनी, जापान और नीदरलैंड जैसे विकसित बाज़ारों से प्राप्त होते हैं, जहाँ अस्पताल उपकरणों को उनकी पूर्ण कार्यात्मक आयु समाप्त होने से पहले ही उन्नत कर लेते हैं।

नई नीतिगत समिति

  • औषधि विभाग ने राज्यसभा को सूचित किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फरवरी 2026 में पुनर्नवीनीकृत चिकित्सा उपकरणों पर औपचारिक नीति विकसित करने हेतु एक समिति का गठन किया है।
  • समिति के उद्देश्य:
    • ‘पुनर्नवीनीकृत’ की स्पष्ट परिभाषा करना।
    • सुरक्षा, प्रदर्शन और शेष उपयोगी आयु का मूल्यांकन करने की विधियाँ विकसित करना।
    • अपशिष्ट निपटान पर मार्गदर्शन की अनुशंसा करना।
    • विनियामक समन्वय की समीक्षा करना।

हितधारकों के दृष्टिकोण

  • अंतर्राष्ट्रीय निर्माता (MTAI):मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MTAI), जो 50 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करती है, का तर्क है कि:
    • पूर्ण प्रतिबंध से वहनीयता प्रभावित होगी।
    • भारत को वैश्विक रूप से समन्वित, समयबद्ध नीति की आवश्यकता है।
    • पुनर्नवीनीकृत उपकरण केवल मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) के माध्यम से अनुमत होने चाहिए, ताकि कानूनी जवाबदेही, उचित सेवा और रोगी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
    • MTAI का मानना है कि पुनर्नवीनीकृत उपकरण:
      • छोटे शहरों में पहुँच का विस्तार करते हैं।
      • स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षण लक्ष्यों को समर्थन देते हैं।
      • स्वास्थ्य पेशेवरों के निर्यात संबंधी भारत की महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप हैं।
  • घरेलू निर्माता (AiMeD):एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुदृढ़ ढाँचे के बिना प्रतिबंधों को शिथिल करने का कठोर विरोध करता है।
    • उनकी चिंताओं में अज्ञात उपयोग इतिहास, असंगत प्रदर्शन, सीमित ट्रेसबिलिटी, कम शेष आयु और भारत के ‘डंपिंग ग्राउंड’ बनने का जोखिम शामिल है।
    • AiMeD का तर्क है कि आयात को वैध बनाने से ‘मेक इन इंडिया’ पहल कमजोर हो सकती है और भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों में तैयारी घट सकती है।

आगे की राह

  • सरकार की नीतिगत समिति को स्पष्ट कानूनी परिभाषा स्थापित करनी होगी, पर्यावरणीय और चिकित्सा विनियमों का समन्वय करना होगा, मेडिकल डिवाइस नियमों के अंतर्गत लाइसेंसिंग मार्ग बनाना होगा, गुणवत्ता, परीक्षण एवं आयु मानकों को परिभाषित करना होगा तथा खरीदारों तथा रोगियों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी।
  • यदि सावधानीपूर्वक ढाँचा तैयार किया जाए तो यह रोगी सुरक्षा में सुधार, सुलभ पहुँच का विस्तार, घरेलू उद्योग को समर्थन और विनियामक सामंजस्य सुनिश्चित कर सकता है।
  • इसका परिणाम भारत की निदान अवसंरचना और दीर्घकालिक चिकित्सा प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं को आकार देगा।

स्रोत: IE

 

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