पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- नवीनतम 2025 टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार, भारत को विश्व में पाँचवाँ तथा एशिया में दूसरा सर्वाधिक यातायात-जामग्रस्त देश के रूप में रैंक किया गया है।
परिचय
- यह सूचकांक विश्वभर के शहरों का मूल्यांकन औसत यात्रा समय, जाम स्तर और वाहन गति के आधार पर करता है।
- यह सूचकांक शहरी गतिशीलता में होने वाले परिवर्तनों को ट्रैक करने और विभिन्न क्षेत्रों एवं देशों में जाम प्रवृत्तियों की तुलना करने हेतु व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
- बेंगलुरु भारत का सर्वाधिक यातायात-जामग्रस्त शहर उभरा, जहाँ औसत जाम स्तर 74.4% दर्ज किया गया।
- बेंगलुरु और कोलकाता दोनों विश्व के पाँच सबसे धीमे शहरों में सूचीबद्ध हुए।
- एशिया के शीर्ष 10 सर्वाधिक जामग्रस्त शहरों में से छह भारत से थे: बेंगलुरु (1), पुणे (2), मुंबई (6), नई दिल्ली (7), कोलकाता (9), और जयपुर (10)।
भारत में यातायात जाम के कारण
- तीव्र शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि सीमित सड़क स्थान पर दबाव बढ़ा रही है।
- उच्च आय और अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन के कारण निजी वाहनों का स्वामित्व बढ़ रहा है, जो सड़क क्षमता वृद्धि से अधिक है।
- अपर्याप्त और खराब नियोजित सड़क अवसंरचना, जिसमें संकरी सड़कें और बाईपास का अभाव शामिल है।
- मिश्रित यातायात स्थितियाँ, जहाँ विभिन्न गति और आकार के वाहन एक ही सड़क साझा करते हैं। साथ ही, लेन अनुशासन का अभाव यातायात प्रवाह को धीमा करता है।
- कमजोर यातायात प्रबंधन और नियमों का ढीला प्रवर्तन।
- अतिक्रमण और सड़क पर पार्किंग प्रभावी सड़क चौड़ाई को कम करते हैं।
प्रभाव
- ईंधन की बर्बादी, विलंबित लॉजिस्टिक्स और उत्पादकता में कमी के कारण आर्थिक हानि।
- वायु और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि, जिससे शहरी स्वास्थ्य परिणाम बिगड़ते हैं।
- उच्च कार्बन उत्सर्जन, जो जलवायु और सतत विकास लक्ष्यों को कमजोर करता है।
- लंबे प्रतीक्षा समय से तनाव स्तर और रोड रेज बढ़ता है, जो मानसिक स्वास्थ्य अवन सामाजिक कल्याण को प्रभावित करता है।
- जामग्रस्त सड़कों के कारण आपातकालीन सेवाओं (एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवाएँ) में विलंब होता है, जिससे जीवन जोखिम में पड़ता है।
- अव्यवस्थित यातायात और नियम उल्लंघनों के कारण सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि।
- शहरी जीवन की गुणवत्ता में कमी, जिससे रहने की सुगमता और व्यवसाय करने की सरलता घटती है।
भारत में यातायात जाम से निपटने हेतु पहलें
- मेट्रो रेल, बस रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम (BRTS), उपनगरीय रेल और विद्युत बसों के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करना।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर और अनुकूली संकेतों का उपयोग कर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को बढ़ावा देना।
- ट्रांज़िट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) द्वारा भूमि उपयोग को जन-परिवहन गलियारों के साथ एकीकृत करना।
- शहरी सड़क अवसंरचना उन्नयन, जिसमें फ्लाईओवर, रिंग रोड और समर्पित लेन शामिल हैं।
- पार्किंग प्रबंधन सुधार, जैसे मूल्य निर्धारण, बहु-स्तरीय पार्किंग और नो-पार्किंग क्षेत्र।
- फुटपाथ और साइकिल ट्रैक विकसित कर गैर-मोटर चालित परिवहन को प्रोत्साहित करना।
- नीतिगत और व्यवहारगत पहलें, जिनमें जाम मूल्य निर्धारण, कार्यालय समय का चरणबद्ध निर्धारण एवं नियमों का कठोर प्रवर्तन शामिल है।
स्रोत: DTE
Previous article
भारत का कागज़ उद्योग वन नियमों में शिथिलता हेतु प्रयासरत
Next article
जाति-आधारित भेदभाव पर नये यूजीसी नियम