प्रौद्योगिकीय-वैधानिक ढाँचे के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन का सुदृढ़ीकरण 

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • भारत सरकार (GOI) के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (OPSA) के कार्यालय ने “प्रौद्योगिकीय-वैधानिक ढाँचे के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन का सुदृढ़ीकरण” शीर्षक से एक श्वेत पत्र जारी किया है, जिसमें भारत की दृष्टि एक उत्तरदायी एवं नवाचार-संरेखित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

प्रौद्योगिकीय-वैधानिक AI शासन

  • प्रौद्योगिकीय-वैधानिक दृष्टिकोण कानूनी साधनों, नियामक पर्यवेक्षण, और तकनीकी प्रवर्तन तंत्रों को सीधे AI प्रणालियों के डिज़ाइन एवं संचालन में एकीकृत करता है।
    • शासन को बाहरी अनुपालन दायित्व के बजाय AI प्रणालियों की अंतर्निहित विशेषता के रूप में देखा जाता है।
  • यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि AI प्रणालियाँ, चाहे वे देश में विकसित हों या वैश्विक स्तर पर प्राप्त की गई हों, भारत के संवैधानिक मूल्यों, कानूनी मानदंडों और विकासात्मक प्राथमिकताओं के अनुरूप रहें।

नए AI शासन ढाँचे का औचित्य

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुकूलनीय, अपारदर्शी, तीव्र गति से विकसित होने वाली और सीमाहीन है, जिससे पारंपरिक आदेश-नियंत्रण आधारित विनियमन अपर्याप्त हो जाता है।
  • भारत के वर्तमान विनियम जैसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000; DPDP अधिनियम, 2023; भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023; क्षेत्रीय दिशानिर्देश और स्वैच्छिक मानक आधारभूत सुरक्षा प्रदान करते हैं, परंतु वे AI-विशिष्ट जीवनचक्र जोखिमों का सामना करने हेतु निर्मित नहीं हैं।
  • एक ऐसे शासन मॉडल की आवश्यकता है जो हानि को पूर्व-निवारक रूप से रोके, न कि केवल पश्चात् कानूनी प्रवर्तन पर निर्भर रहे।

प्रौद्योगिकीय-वैधानिक ढाँचे के उद्देश्य

  • यह ढाँचा गोपनीयता, सुरक्षा, संरक्षा, निष्पक्ष सूचना तक पहुँच और आजीविका संरक्षण जैसे मौलिक अधिकारों को AI युग में बनाए रखने का प्रयास करता है।
  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI प्रणालियाँ प्रशिक्षण, परिनियोजन और उपयोग के दौरान निष्पक्ष व्यवहार एवं भेदभाव-रहित दृष्टिकोण की गारंटी दें।
  • यह ढाँचा नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है तथा “नवाचार बनाम विनियमन” की मिथ्या द्वैतता को अस्वीकार करता है।

प्रौद्योगिकीय-वैधानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन हेतु प्रौद्योगिकीय मार्ग  

  • इंडियाAI मिशन के “सुरक्षित और विश्वसनीय AI” स्तंभ के अंतर्गत भारत का दृष्टिकोण कानूनी, नैतिक और सुरक्षा उपायों को सीधे AI प्रणालियों में समाहित करने की ओर है।
  • 2024 में MeitY ने राष्ट्रीय “उत्तरदायी AI” आह्वान प्रारंभ किया, जिसमें शासन को सरकारी और औद्योगिक क्षेत्रों में क्रियान्वित करने हेतु स्वदेशी समाधानों का चयन किया गया।
  • AI ऑडिटिंग उपकरण :
    • निष्पक्ष (Nishpaksh) – निष्पक्षता ऑडिट
    • परखAI (ParakhAI) – सहभागी एल्गोरिथ्म ऑडिट
    • Track-LLM – बड़े भाषा मॉडलों के शासन परीक्षण हेतु
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के साथ एकीकरण  : भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के साथ प्रौद्योगिकीय-वैधानिक AI उपकरणों का एकीकरण विस्तार क्षमता और प्रवर्तन को सुदृढ़ करता है।
    • आधार, डिजिलॉकर और UPI जैसे प्लेटफ़ॉर्म शासन तंत्रों को समाहित करने हेतु सुरक्षित और अंतःक्रियाशील आधार प्रदान करते हैं।

प्रौद्योगिकीय-वैधानिक AI शासन के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ

  • AI-विषय बनाम AI-उपयोगकर्ता विषमता: स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे कल्याणकारी क्षेत्रों में प्रभावित व्यक्ति प्रायः AI विषय होते हैं, उपयोगकर्ता नहीं।
    • AI विषयों के पास सामान्यतः जागरूकता, सहमति या एल्गोरिथ्मिक निर्णयों को चुनौती देने के प्रभावी साधन नहीं होते, जिससे बहिष्करण और अन्याय का जोखिम बढ़ता है।
  • डीपफेक शासन सीमाएँ: केवल सामग्री-स्तर पर हटाना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि डीपफेक वितरित पाइपलाइनों के माध्यम से कार्य करते हैं जिनमें निर्माण उपकरण, प्लेटफ़ॉर्म, बॉट एवं अवसंरचना प्रदाता सम्मिलित होते हैं।
    • तीव्र पुनः-अपलोड, डोमेन परिवर्तन और क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म प्रसार पारंपरिक प्रवर्तन को कमजोर करते हैं।
  • लागत बाधाएँ: प्रौद्योगिकीय-वैधानिक अनुपालन कंपनियों पर उच्च लागत थोपता है, जिसमें ऑडिट, सुरक्षा उन्नयन, कुशल जनशक्ति और डेटा अवसंरचना सम्मिलित हैं।
  • कानूनी और परिचालन असंगति: डेटा संरक्षण, बौद्धिक संपदा और AI शासन पर तीव्रता से विकसित होते कानून क्रियान्वयन में अनिश्चितता उत्पन्न करते हैं।

आगे की राह 

  • AI-विषय-केंद्रित शासन: एल्गोरिथ्मिक प्रभाव आकलन को अनिवार्य करें, AI उपयोग का सक्रिय प्रकटीकरण करें, और महत्वपूर्ण निर्णय बिंदुओं पर मानव-इन-लूप तंत्र लागू करें।
    • विषय-उन्मुख AI अनुप्रयोगों हेतु शिकायत निवारण प्रणाली और नियमित जनसांख्यिकीय ऑडिट स्थापित करें।
  • डीपफेक विनियमन: सामग्री की उत्पत्ति सुनिश्चित करने हेतु अनिवार्य लेबलिंग, स्थायी पहचानकर्ता और क्रिप्टोग्राफिक मेटाडेटा अपनाएँ।
    • अवसंरचना-स्तर पर दायित्व लागू करें जैसे उपयोग लॉगिंग, पुनरावृत्ति अपराधी पहचान और समन्वित घटना रिपोर्टिंग।
  • क्षमता निर्माण: अंतःविषयक प्रशिक्षण, साझा परीक्षण वातावरण और मुक्त स्रोत जोखिम आकलन उपकरणों में निवेश करें।

Source: PIB

 

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