एक जिला एक उत्पाद (ODOP)

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पहल ने पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देकर परिवर्तनकारी प्रभाव के 8 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

परिचय

  • ODOP पहल, जिसे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा संचालित किया गया है, का उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट आर्थिक क्षमता को उजागर करना, संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना तथा स्थानीय कारीगरों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाना है।
  • ODOP के अंतर्गत उत्पाद चयन ढाँचा: उत्पादों का चयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बुनियादी स्तर पर उपलब्ध पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर किया जाता है तथा अंतिम सूची DPIIT को प्रेषित की जाती है।
  • ODOP की शुरुआत 2018 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की पीतल कला से हुई थी और तब से यह पूरे देश में विस्तारित हो चुका है।
  • अब तक ODOP ने देशभर के 775 जिलों से 1243 उत्पादों की पहचान की है, जो वस्त्र, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य विभिन्न क्षेत्रों को समाहित करते हैं।

ODOP को प्रोत्साहन देने हेतु सरकारी पहल

  • ई-कॉमर्स पहल: सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM)-ODOP बाज़ार के माध्यम से भारत के श्रेष्ठ ODOP उत्पादों को व्यापक बाजारों में प्रदर्शित किया जा रहा है, जिससे कारीगरों को सशक्त बनाया जा रहा है और बाजार तक उनकी पहुँच बढ़ रही है।
  • पीएम एकता मॉल (Unity Malls): इन्हें ODOP, GI और हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने और बेचने के लिए समर्पित खुदरा एवं प्रदर्शन केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है।
  • ODOP का वैश्विक विस्तार:
    • 80+ भारतीय मिशनों ने विदेशों में प्रदर्शनियों, प्रदर्शनों, ODOP दीवारों या राजनयिक उपहारों के माध्यम से उत्पादों को बढ़ावा दिया है।
    • ODOP उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने हेतु उन्हें G-20 बैठकों के दौरान उपहारों का हिस्सा बनाया गया।
    • तीन अंतर्राष्ट्रीय स्टोर ODOP उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं (02 सिंगापुर में — मुस्तफ़ा सेंटर और कश्मीर हेरिटेज में, तथा 01 कुवैत में — हकीमी सेंटर), जिससे विदेशी बाजारों में स्थायी उपस्थिति मजबूत हुई है।
    • जिला को निर्यात केंद्र (DEH) पहल: देश के सभी जिलों में निर्यात क्षमता वाले उत्पादों और सेवाओं की पहचान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों सहित सभी हितधारकों के परामर्श से की जाती है।

योजना का महत्व

  • संतुलित क्षेत्रीय विकास: ODOP पहल औद्योगिक गतिविधियों का विकेंद्रीकरण करके और जिला-विशिष्ट क्षमताओं का उपयोग करके समान आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है।
  • कारीगरों का सशक्तिकरण: वित्त, कौशल विकास, तकनीक और बाजार संपर्क तक पहुँच प्रदान करके ODOP स्थानीय कारीगरों एवं शिल्पकारों को उत्पादन बढ़ाने तथा आय सुधारने में सक्षम बनाता है।
  • विरासत का संरक्षण: यह पहल पारंपरिक शिल्प, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक उद्योगों का समर्थन करती है, जिससे भारत की समृद्ध शिल्प विरासत का संरक्षण सुनिश्चित होता है।
  • आर्थिक प्रभाव: ODOP स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करता है, औपचारिकता को प्रोत्साहित करता है और बुनियादी स्तर पर समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास में योगदान देता है।
  • वैश्विक पहचान: जिला-विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक दृश्यता प्राप्त होती है, जिससे भारत गुणवत्ता, विविधता और शिल्प कौशल का केंद्र बनता है।

निष्कर्ष

  • एक जिला एक उत्पाद पहल ने स्थानीय कौशल को आर्थिक विकास, राष्ट्रीय पहचान और वैश्विक अवसरों के इंजन में परिवर्तित कर दिया है।
  •  अब यह केवल जिला-विशिष्ट उत्पादों का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि उन लाखों आकांक्षाओं का प्रतीक है जिन्हें अपने गाँवों से कहीं दूर पहचान मिल रही है।

स्रोत: PIB

 

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