पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में अपने ग्रीक समकक्ष के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
- दोनों नेताओं ने पुनः पुष्टि की कि भारत-यूनान रणनीतिक साझेदारी शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और पारस्परिक सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है।
परिचय
- भारत और यूनान के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु एक संयुक्त आशय घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए, जो पाँच-वर्षीय रोडमैप विकसित करने का प्रारंभिक बिंदु है।
- 2026 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का भी आदान-प्रदान किया गया, जो दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच सैन्य सहभागिता का मार्ग प्रशस्त करती है।
भारत-यूनान द्विपक्षीय संबंध
- राजनीतिक संबंध: भारत ने परंपरागत रूप से यूनान के साथ मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का आनंद लिया है, जो मुख्यतः अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र में, राजनीतिक समर्थन से परिभाषित होते हैं।
- 2023 में प्रधानमंत्री मोदी की यूनान यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।
- रक्षा संबंध: भारत और यूनान ने भूमध्य सागर में विभिन्न संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किए हैं तथा बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास INIOCHOS-23, INIOCHOS-24 एवं INIOCHOS-25 में भी भाग लिया है।
- 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद जब कई यूरोपीय राष्ट्र भारत पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे थे, उस समय ग्रीस के तत्कालीन रक्षा मंत्री ने भारत-यूनान रक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
- सैन्य उपकरणों का सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान, भारत की “मेक इन इंडिया” पहल के अंतर्गत यूनान के साथ भी खोजा जा रहा है।
- आर्थिक सहयोग: भारत और यूनान का लक्ष्य 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है, जो 2022-23 में लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर का था।
- पर्यटन क्षेत्र यूनान की आय का 25% हिस्सा है और यह देश भारतीयों के बीच एक लोकप्रिय पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
- संपर्कता: यूनान की पूर्वी भूमध्यसागर में महत्वपूर्ण और रणनीतिक स्थिति तथा यूरोपीय संघ एवं नाटो की सदस्यता इसे भारत के लिए यूरोपीय संघ में प्रवेश का संभावित द्वार बनाती है।
भारत-यूनान के लिए चुनौतियाँ और अवसर
- जन और नीति दृश्यता की कमी: उच्च-स्तरीय यात्राओं के बावजूद प्रमुख विदेश नीति हलकों में भारत-यूनान विमर्श का अभाव है।
- जन-से-जन संपर्क की कमी: कम पर्यटन और प्रवासी आदान-प्रदान के कारण दोनों देशों के बीच जन-से-जन सहभागिता सीमित है।
- भौगोलिक असंबद्धता: दोनों देशों के बीच कोई सीधी हवाई संपर्क (उड़ानें) या समुद्री व्यापार मार्ग नहीं है, जिससे लॉजिस्टिक्स और आदान-प्रदान सीमित हो जाते हैं।
- तृतीय पक्ष हस्तक्षेप: तुर्किये जैसे देशों की निकटता और यूनान के साथ तनाव भारत की लचीलापन को सीमित कर सकते हैं, विशेषकर पश्चिम एशिया क्षेत्र में भारत के संतुलनकारी दृष्टिकोण को देखते हुए।
- चीन द्वारा यूनान में BRI के माध्यम से निवेश भारत के प्रभाव को सीमित कर सकता है और भूमध्यसागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घर्षण उत्पन्न कर सकता है।
- असमान ध्यान: यद्यपि यूनान भारत का समर्थन करता है जैसे कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता, परंतु यूनान यूरोपीय संघ, नाटो एवं भूमध्यसागर की राजनीति में अधिक गहराई से संलग्न है।
अवसर
- रणनीतिक समुद्री अभिसरण: भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ी है और यूनान पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में।
- यूनानी बंदरगाह भारत के लिए यूरोप में प्रवेश बिंदु का कार्य कर सकते हैं, विशेषकर भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के अंतर्गत।
- बहुध्रुवीय विश्व में भू-राजनीतिक अभिसरण: दोनों राष्ट्र बहुध्रुवीयता, रणनीतिक स्वायत्तता और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं।
- संप्रभुता और आतंकवाद-निरोध पर संयुक्त राष्ट्र में मतदान में सुदृढ़ सामंजस्य हो सकता है।
- बहुपक्षीय मुद्दों पर समर्थन: यूनान ने भारत की स्थायी UNSC सीट की मांग का लगातार समर्थन किया है।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून, जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक संरक्षण में समन्वित कूटनीति की संभावना है।
आगे की राह
- भारत-यूनान 2+2 संवाद का प्रस्ताव: रक्षा और विदेश मंत्री स्तर पर 2+2 प्रारूप में परामर्श प्रारंभ करना ताकि रणनीतिक समन्वय को संस्थागत रूप दिया जा सके।
- समुद्री और ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाना: यूनान के बंदरगाह जैसे अलेक्ज़ेंड्रूपोलिस और थेसालोनिकी का उपयोग भारतीय वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए यूरोपीय द्वार के रूप में करना, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के अंतर्गत।
- नवीकरणीय ऊर्जा और हरित संक्रमण में साझेदारी: भारतीय सार्वजनिक और निजी कंपनियों को यूनान में सौर, पवन एवं हरित हाइड्रोजन निवेश की खोज हेतु प्रोत्साहित करना, यूरोपीय संघ के हरित अवसंरचना लक्ष्यों के अंतर्गत।
- सततता और निरंतरता सुनिश्चित करना: एक दूरदर्शी द्विपक्षीय रोडमैप तैयार करना जो राजनीतिक चक्रों से परे हो और भविष्य की सरकारों तथा भारत एवं यूनान के राजनयिकों के लिए संस्थागत स्मृति का निर्माण करे।
निष्कर्ष
- विगत 2 वर्षों में भारत-यूनान संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और इसे “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया गया है।
- हाल के वर्षों में भारत ने भूमध्यसागर क्षेत्र के देशों के साथ विभिन्न सहभागिताओं के माध्यम से महाद्वीप में अपनी साझेदारियों का विस्तार और विविधीकरण किया है।
- भारत एवं यूनान ने अपने राजनयिक संबंधों के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार किया है, और व्यापार, निवेश, पर्यटन तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून में सहयोग को गंभीरता देने की संभावना विद्यमान है।
स्रोत: PIB
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