व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business): भारत का जारी नियामक रूपांतरण 

पाठ्यक्रम:GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ 

  • केंद्रीय बजट 2026-27 ने व्यवसाय सुगमता को विकास और प्रगति का स्तंभ पुनः स्थापित किया है, जिसमें डिजिटलीकरण, कर सुनिश्चितता, निवेशक पहुँच और वाद-विवाद में कमी पर विशेष ध्यान दिया गया है।

व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business – EoDB)  

  • यह भारत के आर्थिक सुधार एजेंडा का आधारस्तंभ बनकर उभरा है और इसे विकास एवं प्रगति का प्रमुख स्तंभ पुनः पुष्टि किया गया है।
  • केंद्रीय बजट 2026-27 का ध्यान डिजिटल व्यापार सुविधा, कर सुनिश्चितता, अनुपालन और वाद-विवाद में कमी, विश्वास-आधारित सीमा शुल्क प्रणाली तथा निवेश-अनुकूल कर व्यवस्था पर केंद्रित है।
  • ये उपाय विगत दशक में किए गए सतत् नियामक और संस्थागत सुधारों पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और अनुपालन भार कम करना है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास बेहतर हुआ है।

प्रगति

  • 2014–25 के दौरान भारत ने USD 748.38 बिलियन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित किया, जो विगत 11 वर्षों की तुलना में 143% की वृद्धि है।
  • सक्रिय पंजीकृत कंपनियों की संख्या 2020–21 में 1.55 लाख से बढ़कर 2025–26 में 1.98 लाख हो गई, जो पाँच वर्षों में लगभग 27% की वृद्धि दर्शाती है।
  • विकसित भारत @2047 दृष्टि के अनुरूप जारी व्यवसाय सुगमता सुधार वैश्विक मूल्य श्रृंखला संबंधों को सुदृढ़ करने और उद्योग-प्रेरित विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

बजट का फोकस

  • बजट ने भारत के EoDB एजेंडा को कर सुनिश्चितता बढ़ाने, अनुपालन भार घटाने और विश्वास-आधारित शासन को प्रोत्साहित करने वाले उपायों के माध्यम से सुदृढ़ किया है।
  • मुख्य सुधारों में MAT का युक्तिकरण, विवाद समाधान का सरलीकरण और छोटे प्रक्रियात्मक अपराधों का अपराधमुक्तिकरण शामिल है।
  • बजट ने डिजिटल एकीकरण और जोखिम-आधारित स्वीकृति के माध्यम से सीमा शुल्क और लॉजिस्टिक्स सुधारों को भी आगे बढ़ाया है, जिससे लेन-देन लागत कम हो तथा व्यापार दक्षता में वृद्धि हो।

महत्व 

  • व्यवसाय-अनुकूल वातावरण आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करता है, उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है और भारत की भूमिका को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में सुदृढ़ करता है।
  • यह स्टार्टअप्स और MSMEs को आसानी से विस्तार करने में सक्षम बनाकर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देता है।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है, वैश्विक रैंकिंग सुधारता है और “मेक इन इंडिया” तथा “डिजिटल इंडिया” जैसी पहलों को समर्थन प्रदान करता है।

चुनौतियाँ 

  • भूमि अधिग्रहण, अनुबंध प्रवर्तन और न्यायिक प्रक्रियाओं में कार्यान्वयन अंतराल बने हुए हैं।
  • राज्यों और विभागीय नियमों के ओवरलैप के कारण नियामक जटिलता अनिश्चितता उत्पन्न करती है।
  • लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और शहरी सेवाओं में अवसंरचना बाधाएँ व्यापार लागत बढ़ाती हैं।
  • कराधान और अनुपालन भार, जिसमें बार-बार नियम परिवर्तन शामिल हैं, निवेशकों के विश्वास को प्रभावित करते हैं।

सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदम  

  • सरकार ने व्यापार, निवेश, कर और नियामक सुधारों की व्यापक श्रृंखला लागू की है ताकि व्यवसाय सुगमता में सुधार हो तथा वैश्विक निवेश आकर्षित किया जा सके।
  • प्रमुख व्यापार सुविधा उपायों में माल निकासी हेतु एकल डिजिटल विंडो, कम जोखिम वाले माल की त्वरित सीमा शुल्क निकासी, सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली (CIS) का कार्यान्वयन और बंदरगाहों पर AI-आधारित गैर-हस्तक्षेप स्कैनिंग का विस्तारित उपयोग शामिल है।
  • निवेश सुधारों ने भारत में सूचीबद्ध कंपनियों में विदेशी निवासियों (PROIs) को अधिक निवेश की अनुमति दी है और कुल निवेश सीमा बढ़ाई है।
  • MAT का युक्तिकरण गैर-निवासियों के लिए छूट, कम दरें, अंतिम कर उपचार, बायबैक पर पूंजीगत लाभ-आधारित कराधान और लचीले MAT क्रेडिट उपयोग के माध्यम से किया गया है।
  • दंड और अभियोजन व्यवस्था को एकीकृत मूल्यांकन, कम पूर्व-आवश्यक जमा, विस्तारित प्रतिरक्षा प्रावधान, छोटे अपराधों का अपराधमुक्तिकरण, क्रमबद्ध अभियोजन और छोटे विदेशी परिसंपत्ति धारकों के लिए पूर्वव्यापी प्रतिरक्षा के माध्यम से सरल बनाया गया है।
  • व्यापक सुधारों का ध्यान स्वीकृति से अनुपालन की ओर स्थानांतरित करने पर है, जिसे “जन विश्वास अधिनियमों” के अंतर्गत बड़े पैमाने पर अपराधमुक्तिकरण और पर्यावरण एवं वन कानूनों में संशोधनों द्वारा समर्थन मिला है।
  • राष्ट्रीय एकल विंडो प्रणाली (NSWS) एक प्रमुख डिजिटल सुधार के रूप में उभरी है, जो केंद्र और राज्य सरकारों की स्वीकृतियों को एकीकृत करती है।
  • सरकार ने पारदर्शिता सुधारने, नियमों को सरल बनाने और राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में सेवा वितरण को बेहतर बनाने हेतु “व्यवसाय सुधार कार्य योजना” (BRAP) लागू की है।
  • अन्य नियामक उपायों में RBI द्वारा 9,000 से अधिक परिपत्रों का 238 मास्टर निर्देशों में समेकन शामिल है, जिससे अनुपालन भार में उल्लेखनीय कमी आई है।
  • “सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025” ने बीमा क्षेत्र में 100% FDI की अनुमति दी है, मध्यस्थों के लिए पंजीकरण को सरल बनाया है, शेयर हस्तांतरण मानदंडों को आसान किया है, विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए पूंजी आवश्यकताओं को कम किया है और बीमा प्रसार में सुधार किया है।
  • श्रम सुधारों के अंतर्गत 29 कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया गया है, जिससे अनुपालन सरल हुआ है, अनुमोदन समयसीमा कम हुई है, परिचालन लचीलापन बढ़ा है, पंजीकरण और रिटर्न डिजिटलीकृत हुए हैं, छोटे अपराधों का अपराधमुक्तिकरण हुआ है और छंटनी एवं बंदी के लिए सीमा बढ़ाई गई है।
  • सितंबर 2025 में लागू GST 2.0 सुधारों ने कर स्लैब सरल किए हैं, दरें घटाई हैं, उल्टे शुल्क संरचनाओं को सुधारा है, अनुपालन लागत कम की है और कर आधार को 1.5 करोड़ से अधिक पंजीकृत करदाताओं तक विस्तारित किया है, जिससे औपचारिकता और उद्यमिता को समर्थन मिला है।

निष्कर्ष

  • भारत का व्यवसाय सुगमता ढाँचा नियामक सरलीकरण, डिजिटलीकरण और विश्वास-आधारित शासन के संयोजन के माध्यम से निरंतर विकसित हो रहा है।
  • केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रस्ताव, कराधान, श्रम, वित्त और विनियमन में जारी सुधारों के साथ मिलकर अनुपालन भार कम करने और व्यवसायों के लिए पूर्वानुमेयता सुधारने की सतत प्रतिबद्धता का संकेत देते हैं।
  • निवेश प्रवाह, उद्यम वृद्धि और औपचारिकता में सुदृढ़ प्रवृत्तियाँ विगत दशक में निर्मित व्यापक सुधार गति को दर्शाती हैं।
  • ये सभी पहलें मिलकर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करती हैं और विकास को प्रोत्साहित करती हैं।

Source :PIB

 

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