पाठ्यक्रम: GS3/ऊर्जा क्षेत्र
संदर्भ
- राष्ट्रीय विद्युत नीति का मसौदा भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप विद्युत क्षेत्र को संरेखित करने का उद्देश्य रखता है।
परिचय
- मसौदा राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 भारत की वर्तमान राष्ट्रीय विद्युत नीति (प्रारंभिक अधिसूचना 2005) का प्रस्तावित संशोधन है।
- यह भारत के लक्ष्य का समर्थन करता है कि 2005 की तुलना में 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता को 45% तक कम किया जाए।
- नीति परमाणु ऊर्जा को एक स्वच्छ, स्थिर और मौसम‑निर्भरता से मुक्त ऊर्जा स्रोत के रूप में प्रोत्साहित करती है।
- भारत 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता में 10 गुना वृद्धि की योजना बना रहा है।
- यह छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर(SMRs) जैसी नई प्रौद्योगिकियों का समर्थन करता है, जो अधिक सुरक्षित, छोटे और कारखानों तथा शहरों के निकट स्थापित किए जा सकते हैं।
- थोरियम आधारित ऊर्जा: भारत आयातित यूरेनियम पर निर्भर है, इसलिए नीति थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा के विकास पर बल देती है, जहाँ भारत के पास बड़े भंडार हैं।
- मुख्य चुनौती अनुसंधान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना है ताकि थोरियम ऊर्जा को व्यावहारिक बनाया जा सके।

परमाणु क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता
- परमाणु क्षमता लक्ष्य: भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 8,180 मेगावाट से 2031-32 तक 22,480 मेगावाट और अंततः 2047 तक 100 गीगावाट तक बढ़ाने की योजना बना रहा है।
- ऊर्जा मांग वृद्धि: 2047 तक भारत की विद्युत मांग 4-5 गुना बढ़ने की संभावना है, और परमाणु ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा के साथ आधार‑लोड मांग को पूरा करने में सहायक होगी।
- भारत के लक्ष्य:
- 2005 के स्तर से 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 44% तक कम करना।
- 2030 तक गैर‑जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से 50% संचयी विद्युत क्षमता स्थापित करना।
चुनौतियाँ
- सीमित स्वदेशी अनुभव: भारत का परमाणु कार्यक्रम ऐतिहासिक रूप से प्रेशराइज्ड हेवी-वॉटर रिएक्टर (PHWRs) और फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों पर केंद्रित रहा है, जिसके परिणामस्वरूप लाइट वॉटर रिएक्टर (LWR) के डिज़ाइन और संचालन में घरेलू विशेषज्ञता सीमित रही है।
| लाइट वाटर रिएक्ट – वैश्विक परमाणु कार्यक्रम का मुख्य आधार हैं और वर्तमान में विश्व की नागरिक परमाणु क्षमता का 85% से अधिक हिस्सा रखते हैं। ये साधारण (हल्के) जल का उपयोग शीतलक और न्यूट्रॉन मॉडरेटर दोनों के रूप में करते हैं। – भारी जल रिएक्टरों की तुलना में इनका डिज़ाइन और अभियांत्रिकी सरल होती है। – कम लागत: पैमाने की अर्थव्यवस्था के कारण निर्माण लागत कम होती है और इन्हें अधिक ऊष्मीय दक्ष माना जाता है। |
- सीमित घरेलू यूरेनियम: भारत के पास निम्न‑ग्रेड और सीमित यूरेनियम भंडार हैं, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ती है।
- ईंधन आपूर्ति समझौते: दीर्घकालिक परमाणु विस्तार हेतु विदेशी देशों के साथ सुनिश्चित ईंधन आपूर्ति समझौते आवश्यक हैं।
- उच्च पूंजी लागत: परमाणु संयंत्रों के लिए भारी प्रारंभिक निवेश और लंबी निर्माण अवधि की आवश्यकता होती है।
- प्रौद्योगिकीगत बाधाएँ: SMRs जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियाँ भारत में अभी प्रारंभिक चरण में हैं।
- सुरक्षा एवं जनचिंताएँ: परमाणु दुर्घटनाओं का भय स्थानीय विरोध और परियोजनाओं में विलंब का कारण बनता है।
- थोरियम उपयोग अंतराल: यद्यपि भारत के पास बड़े थोरियम भंडार हैं, वाणिज्यिक प्रौद्योगिकी अभी विकासाधीन है।
सरकारी पहल
- परमाणु ऊर्जा मिशन एवं क्षमता लक्ष्य: सरकार ने 2047 तक लगभग 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विस्तार हेतु परमाणु ऊर्जा मिशन प्रारंभ किया है।
- स्वदेशी रिएक्टर विकास: भारत स्मॉल रिएक्टर जैसे रिएक्टर विकसित किए जा रहे हैं, जो PHWR और SMR प्रकार हैं और व्यापक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की नींव रखते हैं।
- तीन‑चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: भारत की दीर्घकालिक रणनीति PHWRs, फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर और थोरियम आधारित रिएक्टरों के माध्यम से थोरियम भंडार का उपयोग करना है।
- SHANTI अधिनियम, 2025: यह क्षमता विस्तार, उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों और परमाणु ऊर्जा उत्पादन में व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाता है।
- अनुसंधान एवं विकास वित्तपोषण: केंद्रीय बजट 2025-26 में उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों के R&D हेतु लगभग ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं तकनीकी पहुँच: सरकार अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तंत्र पर कार्य कर रही है, जो प्रौद्योगिकी अनुभव अंतराल को समाप्त करने में सहायक होंगे।
| भारत के थोरियम भंडार – भारत विश्व के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है। ![]() केरल और ओडिशा मिलकर भारत के 70% से अधिक थोरियम भंडार रखते हैं। – भारत तीन‑चरणीय परमाणु कार्यक्रम विकसित कर रहा है, जिसमें थोरियम आधारित रिएक्टर तीसरे चरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। – चुनौतियाँ: अयस्कों से थोरियम निकालने में अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है और पर्याप्त अपशिष्ट उत्पन्न होता है।यद्यपि भारत के पास बड़े थोरियम भंडार हैं, इसे परमाणु ऊर्जा उपयोग हेतु निकालने में उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकी और आर्थिक व्यवहार्यता जैसी चुनौतियाँ हैं। |
निष्कर्ष
- भारत स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की बहुआयामी एवं परिवर्तनकारी वृद्धि के लिए तैयार है; तथापि, भारत को हितधारकों के साथ उद्योग सहयोग को सुदृढ़ कर थोरियम रिएक्टरों पर अनुसंधान एवं विकास को तीव्र करना चाहिए।
- भारत प्रयोगात्मक और प्रदर्शन परियोजनाएँ विकसित कर सकता है ताकि थोरियम प्रौद्योगिकी को प्रयोगशाला से वाणिज्यिक स्तर तक ले जाया जा सके।
- परमाणु ऊर्जा भारत को स्वच्छ, सुरक्षित और स्वदेशी शक्ति प्रदान कर सकती है, किंतु इसके पूर्ण सामर्थ्य को खोलने के लिए सतत R&D, नीतिगत समर्थन एवं संस्थागत प्रतिबद्धता आवश्यक है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसके जलवायु दायित्वों को पूरा करने में परमाणु प्रौद्योगिकी की भूमिका का परीक्षण कीजिए। |
Source: IE
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