पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत के निफ्टी50 और सेंसेक्स सूचकांक लगभग 1% गिर गए हैं, जो हाल के महीनों में दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और अमेरिका के बाज़ारों की तुलना में कम प्रदर्शन कर रहे हैं। इन देशों के बाज़ार 2% से 21% तक बढ़े हैं।
भारत का शेयर बाज़ार
- भारत का शेयर बाज़ार एक सुदृढ़ और पारदर्शी नियामक ढाँचे के अंतर्गत कार्य करता है, जिसकी देखरेख भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा की जाती है। इसमें दो प्रमुख एक्सचेंज शामिल हैं:
- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE): 1875 में स्थापित, BSE एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है।
- इसमें 5,000 से अधिक कंपनियाँ सूचीबद्ध हैं, और सेंसेक्स इसका मानक सूचकांक है।
- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE): 1992 में स्थापित, NSE ने इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और कुशल निपटान तंत्र के माध्यम से ट्रेडिंग में क्रांति ला दी।
- इसका मानक सूचकांक निफ्टी 50 है, जो प्रमुख क्षेत्रों की 50 बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है।
- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE): 1875 में स्थापित, BSE एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है।
- दोनों एक्सचेंज मिलकर भारत में लगभग सभी इक्विटी ट्रेडिंग वॉल्यूम का प्रतिनिधित्व करते हैं।
| क्या आप जानते हैं? शेयर (स्टॉक्स/इक्विटी) किसी कंपनी में स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब कोई व्यक्ति शेयर खरीदता है, तो वह उस कंपनी का एक छोटा हिस्सा खरीदता है।शेयरधारक होने का तात्पर्य है कि खरीदार को तीन प्रमुख अधिकार मिलते हैं:स्वामित्वलाभ (डिविडेंड)कंपनी पर मतदान का अधिकार |
भारत का बाज़ार प्रदर्शन
- रिकॉर्ड पूंजी एकत्रण: भारत अब IPO की संख्या में विश्व का अग्रणी बाज़ार है और मूल्य के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा है। FY2025–26 के केवल नौ महीनों में 311 IPO के माध्यम से ₹1.7 ट्रिलियन जुटाए गए।
- बाज़ार पूंजीकरण-से-GDP अनुपात FY2016 के 69% से बढ़कर 130% से अधिक हो गया है, जो निवेशकों के गहरे विश्वास और आर्थिक विस्तार को दर्शाता है।
- निवेशक आधार का विस्तार:
- पंजीकृत निवेशक FY20 में 4.3 करोड़ से बढ़कर आज 13.7 करोड़ हो गए हैं।
- अद्वितीय म्यूचुअल फंड निवेशक अब 5.9 करोड़ से अधिक हैं, जो वित्तीय बाज़ारों में खुदरा भागीदारी की वृद्धि को दर्शाता है।
- वित्तीय साक्षरता, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और SIPs ने निवेश को लोकतांत्रिक बना दिया है।
- 2026 तक भारत बाज़ार पूंजीकरण के आधार पर विश्व के शीर्ष पाँच इक्विटी बाज़ारों में शामिल है, जिसकी वैल्यूएशन $4 ट्रिलियन से अधिक है।
भारत के शेयर बाज़ार की चिंताएँ और मुद्दे
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की निकासी: 2026 के पहले 16 दिनों में FPIs ने भारतीय इक्विटी से $2.5 बिलियन निकाल लिए। 2025 में कुल निकासी लगभग $19 बिलियन रही, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी विदेशी बिकवाली में से एक है।
- मूल्यांकन प्रीमियम और आय का असंगत संतुलन: भारतीय इक्विटी लंबे समय से इंडोनेशिया, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे उभरते बाज़ारों की तुलना में प्रीमियम पर रही है। हालाँकि, यह प्रीमियम अब आय वृद्धि से उचित नहीं ठहरता।
- वैश्विक AI और टेक बूम में सीमित भागीदारी: हाल के वैश्विक स्टॉक रैलियों का प्रमुख कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्रांति रही है। दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका के बाज़ार AI-आधारित मांग से उछले हैं। भारत ‘कम AI भागीदारी’ श्रेणी में आता है, अर्थात् कुछ ही सूचीबद्ध कंपनियाँ इस वैश्विक AI उछाल से सीधे लाभान्वित होती हैं।
- वैश्विक भू-राजनीतिक और व्यापारिक अनिश्चितता: विलंबित या प्रतिकूल व्यापार समझौते निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों और निवेशक भावना को प्रभावित करते हैं। वैश्विक फंड जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अधिक स्थिर बाज़ारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- उच्च घरेलू मूल्यांकन और खुदरा-प्रेरित अस्थिरता: विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और खुदरा निवेशक बाज़ार को स्थिर करने में आगे आए हैं।
- क्षेत्रीय असंतुलन और एकाग्रता जोखिम: विगत कुछ वर्षों में भारत की बाज़ार रैली मुख्य रूप से चुनिंदा क्षेत्रों जैसे बैंकिंग, आईटी सेवाएँ और ऊर्जा द्वारा संचालित रही है।
प्रमुख नियामक और बाज़ार सुधार
- SEBI के नेतृत्व में कई ऐतिहासिक सुधारों ने भारत के पूंजी बाज़ारों का आधुनिकीकरण किया है:
- IPO लिस्टिंग समय को घटाकर T+3 दिन किया गया ताकि पूंजी तक तीव्र पहुँच हो सके।
- राइट्स इश्यू के लिए मानदंड सरल किए गए और एंकर निवेशक भागीदारी बढ़ाई गई।
- कॉर्पोरेट बॉन्ड बाज़ार में खुदरा भागीदारी बढ़ाने के लिए ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफ़ॉर्म शुरू किए गए।
- सूचीबद्ध कंपनियों के लिए प्रकटीकरण और पारदर्शिता मानदंड सुदृढ़ किए गए।
- इन उपायों का उद्देश्य बाज़ार को गहरा करना, तरलता बढ़ाना और निवेशक संरक्षण को सुधारना है।
| भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) SEBI को 1988 में भारत सरकार के एक प्रस्ताव के माध्यम से एक गैर-वैधानिक निकाय के रूप में गठित किया गया था और 1992 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम के अंतगर्त एक वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया। उद्देश्य : निवेशक संरक्षण: प्रतिभूतियों में निवेशकों के हितों की रक्षा करना। बाज़ार विकास: एक मजबूत और कुशल प्रतिभूति बाज़ार के विकास को बढ़ावा देना। बाज़ार विनियमन: स्टॉक एक्सचेंज, मध्यस्थों और अन्य बाज़ार प्रतिभागियों के व्यवसाय को विनियमित करना। |
विदेशी निवेश और वैश्विक एकीकरण
- भारत के इक्विटी बाज़ार वैश्विक निवेशकों के लिए पसंदीदा गंतव्य बन गए हैं, इसके पीछे कारण हैं:
- स्थिर व्यापक आर्थिक नीतियाँ।
- तीव्र डिजिटलीकरण और फिनटेक एकीकरण।
- SEBI के अंतर्गत सुदृढ़ नियामक प्रतिष्ठा।
- भारत की उच्च GDP वृद्धि दर, जो अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है।
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी में विशेष रूप से तकनीक, अवसंरचना और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है।
भविष्य की दृष्टि
- सतत आर्थिक वृद्धि, जनसांख्यिकीय लाभ और सक्रिय नियमन के साथ, भारत का शेयर बाज़ार 2030 तक विश्व का तीसरा सबसे बड़ा इक्विटी बाज़ार बनने की ओर अग्रसर है। ध्यान केंद्रित रहेगा:
- खुदरा भागीदारी का विस्तार
- कॉर्पोरेट पारदर्शिता को बढ़ाना
- डिजिटल बाज़ार अवसंरचना को सुदृढ़ करना
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