पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (IATA) द्वारा जारी नवीनतम वर्ल्ड एयर ट्रांसपोर्ट स्टैटिस्टिक्स (WATS) के अनुसार, भारत 2024 में 211 मिलियन यात्रियों को उड़ान सेवा प्रदान करते हुए विश्व का पाँचवां सबसे बड़ा विमानन बाजार बन गया है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- IATA के अनुसार, भारत ने 2023 की तुलना में 11.1% की वृद्धि दर्ज की, और जापान (205 मिलियन यात्री) को पीछे छोड़ दिया।
- अमेरिका 876 मिलियन यात्रियों के साथ 2024 में विश्व का सबसे बड़ा विमानन बाजार बना रहा, जिसमें 5.2% वार्षिक वृद्धि हुई।
- चीन 741 मिलियन यात्रियों के साथ दूसरा सबसे बड़ा बाजार रहा, जिसमें 18.7% की वृद्धि हुई।
- ब्रिटेन तीसरे स्थान पर रहा (261 मिलियन यात्री), जबकि स्पेन चौथे स्थान पर रहा (241 मिलियन यात्री)।
- आंकड़ों में प्रत्येक देश में आने-जाने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्रियों को शामिल किया गया है।
- एयरपोर्ट पेयर रैंकिंग:
- एशिया-प्रशांत क्षेत्र ने सबसे व्यस्त एयरपोर्ट-पेयर रैंकिंग में दबदबा बनाया।
- जेजू–सियोल (दक्षिण कोरिया) विश्व का सबसे व्यस्त मार्ग रहा, जिसमें 13.2 मिलियन यात्री यात्रा करते हैं।
- मुंबई–दिल्ली मार्ग वैश्विक स्तर पर 7वें स्थान पर रहा, जिसमें 5.9 मिलियन यात्री यात्रा करते हैं।
विमानन परिवर्तन के प्रमुख स्तंभ
- प्रणालीगत बदलाव के लिए विधायी सुधार:
- विमान वस्तुओं में हितों की सुरक्षा विधेयक, 2025: भारत की विमान पट्टे प्रणाली को केप टाउन कन्वेंशन के अनुरूप बनाता है, जिससे पट्टे की लागत कम होती है और निवेशकों का विश्वास बढ़ता है।
- भारतीय वायुवहन अधिनियम, 2024: यह औपनिवेशिक युग के एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 से प्रतिस्थापित करता है। यह ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहित करता है, लाइसेंसिंग को सरल बनाता है और वैश्विक मानकों जैसे शिकागो कन्वेंशन एवं ICAO नियमों के अनुरूप बनाता है।
- अवसंरचना विस्तार और क्षमता निर्माण:
- टर्मिनल उन्नयन: वाराणसी, आगरा, दरभंगा और बागडोगरा में नए टर्मिनलों की आधारशिला रखी गई।
- ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स: 2014 से अब तक 12 हवाई अड्डे चालू किए गए (जैसे शिर्डी, मोपा, शिवमोग्गा); नवी मुंबई और नोएडा (जेवर) 2025–26 की शुरुआत तक चालू होंगे।
- CAPEX निवेश: राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के तहत ₹91,000 करोड़ आवंटित; नवंबर 2024 तक ₹82,600 करोड़ व्यय किए गए।

विमानन क्षेत्र को समर्थन देने वाली सरकारी पहलें
- उड़ान योजना: क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देती है और आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को सुलभ बनाती है।
- राष्ट्रीय नागर विमानन नीति (NCAP): MRO, हवाई अड्डा विकास और विमान पट्टे को बढ़ावा देती है।
- हरित हवाई अड्डा नीति: नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग, अपशिष्ट में कमी और कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्य को प्रोत्साहित करती है।
- नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास और वर्तमान मेट्रो व गैर-मेट्रो हवाई अड्डों का विस्तार।
- विमान पट्टे और वित्तपोषण पारिस्थितिकी तंत्र: GIFT सिटी को वैश्विक विमान पट्टे केंद्र के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।
चुनौतियाँ
- अवसंरचना बाधाएं: विभिन्न प्रमुख हवाई अड्डे अपनी क्षमता पर या उसके पास कार्य कर रहे हैं, जबकि टियर-2 और टियर-3 शहरों में अवसंरचना अभी भी अपर्याप्त है।
- विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की उच्च लागत: भारत में विमानन ईंधन पर भारी कर लगता है, जिससे एयरलाइन संचालन वैश्विक मानकों की तुलना में महंगा हो जाता है।
- नियामक जटिलताएं: कई स्तरों की नियमन प्रणाली और केंद्र व राज्य प्राधिकरणों के बीच समन्वय की कमी विमानन क्षेत्र में व्यापार करने में बाधा बनती है।
- पर्यावरणीय चिंताएं: हवाई यातायात के तीव्र विस्तार से कार्बन उत्सर्जन, ध्वनि प्रदूषण और पारिस्थितिक प्रभाव की समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिससे हरित विकल्पों की आवश्यकता होती है।
- कुशल कार्यबल की कमी: प्रशिक्षित पायलटों, इंजीनियरों और विमानन पेशेवरों की उपलब्धता में बढ़ती खाई है।
आगे की राह
- ईंधन मूल्य निर्धारण सुधार: राज्यों में ATF करों को तर्कसंगत बनाया जाए ताकि हवाई यात्रा किफायती हो सके।
- सततता पर ध्यान: सतत विमानन ईंधन (SAF), विद्युत विमान तकनीक और कार्बन ऑफसेटिंग तंत्र को प्रोत्साहित किया जाए।
- कौशल और प्रशिक्षण: राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के माध्यम से विमानन कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए।
- अंतरराष्ट्रीय हब रणनीति: भारत के चुनिंदा हवाई अड्डों को दुबई, दोहा और सिंगापुर जैसे पूर्ण सेवा अंतरराष्ट्रीय हब के रूप में विकसित किया जाए।
Source: AIR
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