पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूनाइटेड किंगडम यात्रा के दौरान भारत और यूनाइटेड किंगडम ने एक व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए।
परिचय
- यह विगत एक दशक में भारत का प्रथम बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है और यूरोपीय संघ (EU) से बाहर निकलने के बाद से यूके का चौथा प्रमुख समझौता है।
- भारत और यूके ने तीन वर्षों से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया।
- उद्देश्य: भारत और यूके के बीच व्यापार को आसान और अधिक लाभकारी बनाना।
- वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिसे 2030 तक दोगुना करने का संयुक्त लक्ष्य रखा गया है।
- यह समझौता दोनों देशों द्वारा अनुमोदन के बाद प्रभाव में आएगा।
- भारत की केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस समझौते को मंजूरी दे दी है, जबकि इसे अभी यूके की संसद से स्वीकृति मिलनी बाकी है।
मुख्य विशेषताएं और लाभ

- भारत के लिए:
- 99% भारतीय उत्पादों को यूके बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच: यह विशेष रूप से वस्त्र, फुटवियर, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग वस्तुएं जैसी श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए बड़ा लाभ है, जिन्हें पहले 4% से 16% तक का शुल्क देना पड़ता था।
- भारतीय पेशेवरों के लिए आसान प्रवेश: अब भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक और आईटी विशेषज्ञों को यूके में अस्थायी रूप से काम करने की सुनिश्चित अनुमति मिलेगी।
- सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट: “डबल योगदान कन्वेंशन” के अंतर्गत , अस्थायी रूप से यूके में कार्यरत भारतीय कर्मचारी तीन वर्षों तक सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट प्राप्त कर सकेंगे।
- उद्योग को बढ़ावा: इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण और प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों के निर्यात में वृद्धि की संभावना।
- कृषि और मत्स्य क्षेत्र को लाभ: कई कृषि और समुद्री उत्पादों को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ेगी।
- यूनाइटेड किंगडम के लिए:
- 90% यूके उत्पादों पर भारत में शुल्क में कटौती: इससे ब्रिटिश उत्पाद भारत में अधिक सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
- ब्रिटिश व्हिस्की और जिन पर भारी शुल्क कटौती: इन पर शुल्क 150% से घटकर तुरंत 75% और दस वर्षों में 40% तक हो जाएगा।
- कुछ ब्रिटिश निर्मित कारों पर शुल्क में कटौती: इससे यूके के ऑटोमोबाइल निर्माताओं को भारत में प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलेगा।
- भारत सरकार की खरीद निविदाओं तक पहुंच: यूके कंपनियां एक निश्चित राशि से अधिक की निविदाओं में भाग ले सकेंगी।
- आर्थिक और पेशेवर सेवाओं को लाभ: आईटी, वित्तीय और परामर्श सेवाओं में ब्रिटिश कंपनियों को अवसर मिलेगा।
| यूके-भारत विजन 2035 रोडमैप – बढ़ती महत्वाकांक्षा: रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर भारत और यूके ने सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास किया है। यह नया विजन इस गति को बनाए रखते हुए सहयोग को और गहरा और विविध बनाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को निर्धारित करता है। – रणनीतिक दृष्टिकोण: यूके-भारत विजन 2035 सहयोग और नवाचार के लिए स्पष्ट लक्ष्य और माइलस्टोन तय करता है। |
Source: IE
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