खाना पकाने के तेल से ई-अपशिष्ट से चांदी प्राप्त करने में सहायता प्राप्त हो सकती है

पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ 

  • फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने एक हरित रासायनिक प्रक्रिया विकसित की है जो खाना पकाने के तेलों में पाए जाने वाले प्राकृतिक फैटी एसिड का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट (ई-वेस्ट) से चांदी पुनः प्राप्त करती है।
    • यह नवाचार वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग में तेजी और विशेष रूप से भारत जैसे देशों में बढ़ती ई-वेस्ट समस्याओं के बीच सामने आया है।

ई-वेस्ट क्या है? 

  • ई-वेस्ट उन परित्यक्त इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों को कहते हैं जो अपनी जीवनावधि पूरी कर चुके हैं या तकनीकी प्रगति के कारण अप्रचलित हो गए हैं, जैसे कंप्यूटर, मोबाइल फोन, टीवी एवं अन्य उपकरण। 
  • भारत, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक देश है। 
  • वर्ल्ड सिल्वर सर्वे 2024 के अनुसार, औद्योगिक उपयोग चांदी की कुल मांग का 50% से अधिक हिस्सा रखते हैं।
    • फिर भी, वर्तमान में केवल लगभग 15% चांदी का पुनर्चक्रण होता है, जिससे एक सीमित और अत्यधिक मांग वाले संसाधन की बड़ी हानि होती है।

ई-वेस्ट प्रबंधन में चुनौतियाँ 

  • उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन की कमी: उपभोक्ताओं को ई-वेस्ट को जिम्मेदारी से निपटाने के लिए आर्थिक या तर्कसंगत प्रोत्साहन नहीं मिलते। 
  • संग्रहण ढांचे की अपर्याप्तता: विशेष रूप से द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में अनुमोदित संग्रहण केंद्रों की कमी है।
    • अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए कबाड़ डीलर ही प्राथमिक संपर्क बिंदु हैं। 
  • असुरक्षित पुनर्चक्रण पद्धतियाँ: 90–95% से अधिक ई-वेस्ट अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा प्रबंधित किया जाता है, जिसमें अम्लीय घोल, खुले में जलाना, और सुरक्षात्मक उपकरणों के बिना मैनुअल विघटन जैसी क्रूड विधियाँ अपनाई जाती हैं। 
  • ग्रे चैनल आयात: प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं अक्सर “दान” या “पुनःनिर्मित वस्तुओं” के रूप में भारत में प्रवेश करती हैं, जो अंततः कचरा बन जाती हैं।

खाना पकाने के तेलों का उपयोग कर चांदी पुनर्प्राप्ति 

  • परंपरागत चांदी निष्कर्षण प्रक्रिया जहरीले अपशिष्ट का उत्पादन करती है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य को गंभीर खतरे होते हैं। 
  • नई विधि में जैविक असंतृप्त फैटी एसिड, जैसे लिनोलेनिक और ओलिक एसिड का उपयोग किया गया, जो सूरजमुखी, मूंगफली, जैतून तथा अन्य वनस्पति तेलों में पाए जाते हैं।
  •  इन्हें 30% हाइड्रोजन पेरॉक्साइड के साथ मिलाकर एक हरित विलायक तैयार किया गया, जो सौम्य परिस्थितियों में चांदी को घोल सकता है। 
  • दूसरे चरण में, इथाइल एसीटेट जैसे सुरक्षित विकल्प का उपयोग चांदी को अलग करने और पुनः प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

भारत में ई-वेस्ट प्रबंधन की अन्य पहलें 

  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR): उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को अपने उत्पादों के जीवन चक्र के अंत में उत्पन्न अपशिष्ट को प्रबंधित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
    • एक ऑनलाइन EPR ई-वेस्ट पोर्टल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा विकसित किया गया है, जहाँ उत्पादक, निर्माता, पुनर्चक्रणकर्ता और पुनःनिर्माता पंजीकरण हेतु बाध्य हैं। 
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ई-वेस्ट (प्रबंधन) नियम, 2016 की व्यापक समीक्षा कर, ई-वेस्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 अधिसूचित किए हैं। 
  • भारत का प्रथम ई-वेस्ट क्लिनिक भोपाल, मध्यप्रदेश में शुरू हुआ है। यह घरेलू और व्यावसायिक इकाइयों दोनों से ई-वेस्ट के पृथक्करण, प्रक्रिया और निपटान की सुविधा है।
बेसल कन्वेंशन 
– बेसल कन्वेंशन एक वैश्विक संधि है जो खतरनाक कचरे की सीमापार आवाजाही और निपटान को नियंत्रित करती है ताकि उनका पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। 
– यह 1989 में अपनाई गई थी और 1992 में प्रभाव में आई। भारत इस संधि का एक पक्षकार है।

निष्कर्ष

  •  भारत की ई-वेस्ट चुनौती तकनीकी प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच एक व्यापक संघर्ष को दर्शाती है। 
  • जैसे-जैसे देश डिजिटल प्रगति की ओर बढ़ रहा है, उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि विषैला कचरा उसके आर्थिक और पारिस्थितिक आधार को कमजोर न करे। 
  • लक्ष्य केवल ई-वेस्ट को प्रबंधित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें से मूल्य निकालना, स्वास्थ्य की रक्षा करना और हरित आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना होना चाहिए—जो भारत की विकसित भारत (Viksit Bharat) की यात्रा के लिए आवश्यक हैं।

Source: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/शासन संदर्भ  भारत, यू.एस. और अन्य विदेशी कंपनियों को नागरिक परमाणु परियोजनाओं में आकर्षित करने के लिए, उपकरण आपूर्तिकर्ताओं पर दुर्घटना से संबंधित जुर्माने को कम करने हेतु परमाणु दायित्व कानूनों में ढील देने पर विचार कर रहा है। नागरिक परमाणु दायित्व क्या है?  नागरिक परमाणु दायित्व कानून यह सुनिश्चित करते हैं कि परमाणु...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/ कृषि और जैव विविधता संदर्भ  सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने हाल ही में भारत भर में सामुदायिक बीज बैंकों (CSBs) का अध्ययन किया और पारंपरिक बीज संरक्षण ज्ञान के पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण में गिरावट को लेकर चिंता जताई। पारंपरिक बीज संरक्षण का महत्व  आनुवंशिक विविधता: ये बीज व्यापक आनुवंशिक आधार...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा संदर्भ  स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने वर्ष 2025 के लिए शस्त्रीकरण, निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति का वार्षिक आकलन जारी किया है। प्रमुख निष्कर्ष  वैश्विक परमाणु प्रवृत्तियाँ (2025):  कुल परमाणु हथियार: 12,241  सैन्य भंडार (सक्रिय/संभावित): 9,614  तैनात हथियार: 3,912  उच्च सतर्कता (बैलिस्टिक मिसाइलों पर): लगभग 2,100, जिनमें अधिकांश अमेरिका और...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/आपदा प्रबंधन समाचार में  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आपदा प्रबंधन की गति और सटीकता बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों की शुरुआत की। प्लेटफॉर्म के बारे में  एकीकृत नियंत्रण कक्ष आपातकालीन प्रतिक्रिया (ICR-ER), आपात प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस लाइट 2.0 (NDEM Lite 2.0), और असम का बाढ़ जोखिम क्षेत्रीकरण एटलस। ...
Read More

अरेबियन पैनिनसुला पाठ्यक्रम :GS1/स्थान, भूगोल समाचार में  नई शोध ‘ग्रीन अरेबिया’ परिकल्पना का समर्थन करती है, जिससे ज्ञात हुआ है कि अरब प्रायद्वीप ने विगत 80 लाख वर्षों में कई आर्द्र चरणों का अनुभव किया।  ये आर्द्र मौसम कालखंड, खनिज गुफा संरचनाओं (स्पेलिओथेम्स) द्वारा प्रमाणित किए गए हैं, जिन्होंने इस रेगिस्तानी क्षेत्र को हरे-भरे परिदृश्य...
Read More
scroll to top