पाठ्यक्रम: GS 3/विज्ञान
समाचार में
- केंद्रीय विद्युत मंत्रालय भारत में नए एयर कंडीशनर (ACs) के लिए 20°C से 28°C के तापमान सीमा के अन्दर संचालन को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रहा है।
| क्या आप जानते हैं? – 2018 में, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अनुमान लगाया कि विश्व भर में 2 अरब ACs उपयोग में थे, और 2000 से 2022 के बीच आवासीय AC इकाइयों की संख्या तीन गुना बढ़कर 1.5 अरब हो गई। – एजेंसी ने यह भी बताया कि 2022 तक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 43% लोग अभी भी अतिरिक्त शीतलन की आवश्यकता महसूस कर रहे थे। – भारत वर्तमान में प्रत्येक वर्ष 10 से 15 मिलियन नए ACs जोड़ रहा है, और आगामी दशक में 150 मिलियन अतिरिक्त ACs की संभावना है। |
एयर कंडीशनर का कार्य
- एयर कंडीशनर वाष्प-संपीड़न चक्र में रेफ्रिजरेंट का उपयोग करके एक स्थान से दूसरे स्थान तक गर्मी स्थानांतरित करता है।
- यह वाष्पीकरणकर्ता (Evaporator) के माध्यम से इनडोर वायु से गर्मी अवशोषित करता है, जहां रेफ्रिजरेंट उबलता है और हवा को डिह्यूमिडिफाई करता है।
- अब एक अत्यधिक गर्म वाष्प बना रेफ्रिजरेंट संपीड़ित किया जाता है—जिससे इसका तापमान बढ़ता है और AC की अधिकतम ऊर्जा खपत होती है।
- फिर यह कंडेंसर (Condenser) के माध्यम से बाहरी वातावरण में गर्मी छोड़ता है, वापस तरल रूप में संघनित होता है, और कम दबाव मिश्रण में विस्तारित होने के पश्चात् पुनः वाष्पीकरणकर्ता में लौटता है।
- यह सबसे प्रभावी तब होता है जब रेफ्रिजरेंट गर्मी अवशोषण और रिलीज के लिए इष्टतम तापमान सीमा में कार्य करता है।

कम तापमान से संबंधित चिंताएँ
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देश बताते हैं कि 18°C से नीचे का तापमान न केवल असहज होता है बल्कि हानिकारक भी होता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, श्वसन संक्रमण और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है, विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों में।
- तकनीकी रूप से, AC सबसे अधिक संपीड़न (Compression) के दौरान ऊर्जा व्यय करता है, और यह निर्धारित थर्मल सीमा के अन्दर सबसे अधिक कुशलता से कार्य करता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न शोधों ने पुष्टि की है कि 18°C से कम का इनडोर तापमान
- हृदय एवं श्वसन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है,
- कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है,
- विटामिन D के स्तर को कम कर सकता है,
- डिप्रेशन और चिंता का कारण बन सकता है।
सरकार द्वारा प्रस्तावित प्रतिबंध
- यह प्रतिबंध पहले 2018 और 2021 में प्रस्तावित किया गया था, जिसका उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना था।
- नया प्रतिबंध घरों, होटलों और कारों पर लागू होगा।
- यह कदम ऊर्जा दक्षता और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, क्योंकि भारत का AC लोड 2030 तक 200 GW तक पहुंचने का अनुमान है।
प्रासंगिकता
- ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के अध्ययन बताते हैं कि AC का तापमान केवल 1°C बढ़ाने से
- बिजली की खपत में लगभग 6% की बचत हो सकती है।
- ACs को 24°C के डिफ़ॉल्ट तापमान पर सेट करने से हर साल 20 अरब यूनिट बिजली की बचत हो सकती है।
- प्रस्तावित प्रतिबंध ऊर्जा दक्षता और स्वास्थ्य दोनों का समर्थन करता है, जो नियमन के लिए एक मजबूत आधार प्रस्तुत करता है।
Source :TH
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