पाठ्यक्रम: GS3/उद्योग
संदर्भ
- केंद्रीय बजट 2026-27 में एक व्यापक और एकीकृत नीतिगत ढाँचे की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करना है—रेशे से फैशन तक, ग्रामोद्योग से वैश्विक बाज़ार तक।
वस्त्र क्षेत्र हेतु एकीकृत कार्यक्रम
- उद्देश्य: प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना, आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना और रोजगार सृजन करना।
- यह पाँच उप-घटकों पर आधारित है:

भारत के वस्त्र उद्योग का अवलोकन
- योगदान: अनुमानित 179 अरब अमेरिकी डॉलर के आकार के साथ भारतीय वस्त्र एवं परिधान (T&A) उद्योग देश के GDP में लगभग 2% का योगदान करता है, विनिर्माण सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 11% और निर्यात में 8.63% का योगदान करता है।
- निर्यात टोकरी: भारत T&A का विश्व का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है, जिसका वैश्विक निर्यात में लगभग 4% हिस्सा है।
- भारत का T&A (हस्तशिल्प सहित) निर्यात FY24 के 35.87 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर FY25 में 37.75 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
- वर्ष 2025 में भारत के वस्त्र क्षेत्र ने 118 देशों और निर्यात गंतव्यों में निर्यात वृद्धि दर्ज की।
- रोजगार: कृषि के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा रोजगार जनक क्षेत्र है, जिसमें 4.5 करोड़ से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं।
- आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 के अनुसार, वस्त्र उद्योग का 8 प्रमुख औद्योगिक समूहों में रोजगार में 9% हिस्सा है।
- भविष्य की संभावनाएँ: भारतीय वस्त्र बाज़ार वर्तमान में वैश्विक स्तर पर पाँचवें स्थान पर है, और सरकार आगामी पाँच वर्षों में इसकी वृद्धि दर को 15-20% तक तेज़ करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

क्षेत्र द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियाँ
- खंडित संरचना: मुख्यतः असंगठित और विकेन्द्रीकृत, विशेषकर पावरलूम एवं हैंडलूम क्षेत्रों में।
- पुरानी मशीनरी: कई इकाइयों में पुरानी मशीनरी के कारण कम उत्पादकता, निम्न गुणवत्ता उत्पादन और वैश्विक प्रतिस्पर्धियों (जैसे चीन, बांग्लादेश) की तुलना में उच्च परिचालन लागत।
- अपर्याप्त अवसंरचना: कमजोर लॉजिस्टिक्स, विद्युत की कमी और उच्च विद्युत लागत।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: वस्त्र प्रसंस्करण जल और रसायन-प्रधान है।
- पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन न करने से कारखानों का बंद होना और निर्यात प्रतिबंध लगना।
- सख्त वैश्विक प्रतिस्पर्धा: बांग्लादेश, वियतनाम और चीन जैसे कम लागत वाले उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा।
- भारत की उच्च उत्पादन और अनुपालन लागत निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती है।
- निर्यात माँग में उतार-चढ़ाव: व्यापार अवरोध, वैश्विक आर्थिक मंदी और उपभोक्ता प्राथमिकताओं में बदलाव निर्यात को प्रभावित करते हैं।
सरकारी पहलें
- मेक इन इंडिया पहल ने प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेपों, उन्नत अवसंरचना और प्रोत्साहनों के माध्यम से वस्त्र निर्माण एवं निर्यात को उत्प्रेरित किया है।
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: मानव-निर्मित फाइबर (MMF) और तकनीकी वस्त्रों में विनिर्माण बढ़ाने हेतु।
- बड़े पैमाने पर वस्त्र निर्माताओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन।
- पीएम मित्रा (मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल) पार्क: वस्त्र उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला जैसे कताई, बुनाई, प्रसंस्करण, परिधान निर्माण, वस्त्र विनिर्माण, प्रसंस्करण एवं वस्त्र मशीनरी उद्योग हेतु एकीकृत बड़े पैमाने पर आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना सुविधाओं का विकास।
- वर्तमान स्थिति: गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में कुल 7 पार्क स्थापित।
- संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (ATUFS): प्रौद्योगिकी उन्नयन हेतु पूंजी सब्सिडी प्रदान करती है।
- समर्थ योजना: वस्त्र उद्योग में श्रमिकों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से।
- वस्त्र क्लस्टर विकास योजना (TCDS): वर्तमान और संभावित वस्त्र इकाइयों/क्लस्टरों के लिए एकीकृत कार्यक्षेत्र एवं संपर्क-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण, जिससे उन्हें परिचालन तथा वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।
- राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM): अनुसंधान, नवाचार एवं विकास; प्रचार एवं बाज़ार विकास; शिक्षा एवं कौशल विकास; तथा तकनीकी वस्त्रों में निर्यात संवर्धन पर केंद्रित, जिससे देश को तकनीकी वस्त्रों में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया जा सके।
- सततता और परिपत्रता को बढ़ावा देने की पहल: वस्त्र समिति, GeM और सार्वजनिक उपक्रमों के स्थायी सम्मेलन (SCOPE) के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य अपसाइकल्ड उत्पादों की सार्वजनिक खरीद को बढ़ावा देना और मुख्यधारा में लाना है।
- केंद्रीय बजट 2026-27 रोजगार सृजन, समावेशी विकास, सततता और वस्त्र मंत्रालय द्वारा नेतृत्व किए गए समन्वित क्रियान्वयन पर अधिक बल देता है, जिससे भारत की स्थिति एक प्रतिस्पर्धी, विश्वसनीय एवं दूरदर्शी वैश्विक वस्त्र एवं परिधान केंद्र के रूप में सुदृढ़ होती है।
निष्कर्ष
- मेक इन इंडिया पहल ने लक्षित नीतियों, अवसंरचना विकास और निवेश संवर्धन के माध्यम से वैश्विक वस्त्र निर्माण एवं निर्यात में भारत की स्थिति को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है।
- निरंतर प्रयासों के साथ, भारत एक वैश्विक वस्त्र नेता बनने की दिशा में अग्रसर है, जो आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन को गति देगा।
Source: PIB
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