पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध; GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए वार्ताओं के समापन की घोषणा की।
परिचय
- यह FTA विश्व की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहन बाज़ार एकीकरण को सक्षम बनाता है।
- भारत एवं यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक GDP का लगभग 25% और वैश्विक व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं।
- वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग €190 अरब वार्षिक है, जिसमें €120 अरब वस्तुओं एवं €80 अरब से अधिक सेवाओं का व्यापार शामिल है।
- यह समझौता आने वाले दशक में इस संबंध को उल्लेखनीय रूप से विस्तारित करने की संभावना है।
FTA की प्रमुख विशेषताएँ
- बाज़ार तक पहुँच: भारत ने यूरोपीय बाज़ारों में 97% टैरिफ लाइनों पर वरीयता प्राप्त पहुँच हासिल की है, जो 99.5% व्यापार मूल्य को कवर करती है।
- भारत 92.1% टैरिफ लाइनों की पेशकश कर रहा है, जो EU के 97.5% निर्यात को कवर करती है।
- संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: भारत ने डेयरी, अनाज, पोल्ट्री, सोयामील, कुछ फल और सब्ज़ियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की है, जिससे निर्यात वृद्धि एवं घरेलू प्राथमिकताओं में संतुलन बना रहे।
- सेवा क्षेत्र: EU से 144 सेवा उपक्षेत्रों में प्रतिबद्धताएँ सुरक्षित की गई हैं, जिनमें IT/ITeS, पेशेवर सेवाएँ, शिक्षा और अन्य व्यापारिक सेवाएँ शामिल हैं।
- भारतीय सेवा प्रदाताओं को EU बाज़ार में अपनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए स्थिर और अनुकूल व्यवस्था मिलेगी।
- प्रमुख औद्योगिक उत्पाद: भारत में मशीनरी पर 44%, रसायनों पर 22% और औषधियों पर 11% तक की ड्यूटी पाँच से दस वर्षों की चरणबद्ध समयसीमा में बड़े पैमाने पर समाप्त की जाएगी।
- कार के पुर्ज़ों पर शुल्क समय के साथ समाप्त हो जाएगा, जबकि पूर्ण निर्मित वाहनों पर शुल्क 110% से घटाकर कोटा-आधारित प्रणाली के अंतगर्त न्यूनतम 10% तक किया जाएगा।
- CBAM-संबंधित प्रावधान: इसमें अग्रदर्शी सर्वाधिक वरीय राष्ट्र आश्वासन शामिल है, जिससे तीसरे देशों को दी गई कोई भी लचीलापन भारत पर भी लागू होगा।
- समझौता कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र की मान्यता, सत्यापकों की पारस्परिक मान्यता, वित्तीय सहायता और लक्षित समर्थन पर तकनीकी सहयोग को भी बढ़ाता है।
- जलवायु-लचीला अवसंरचना: यूरोपीय निवेश बैंक ने आपदा-लचीला अवसंरचना गठबंधन के माध्यम से €2 अरब की प्रतिबद्धता जताई है, जबकि प्रस्तावित ईयू-भारत जलवायु सहयोग मंच 2026 में शुरू होने की संभावना है।
- गतिशीलता ढाँचा: FTA पेशेवरों के अस्थायी प्रवेश और प्रवास के लिए सुनिश्चित व्यवस्था स्थापित करता है, जिसमें व्यापारिक आगंतुक, अंतर-निगम स्थानांतरण, संविदात्मक सेवा प्रदाता एवं स्वतंत्र पेशेवर शामिल हैं।
- भारतीय पारंपरिक चिकित्सा: जिन EU सदस्य राज्यों में नियम विद्यमान नहीं हैं, वहाँ आयुष चिकित्सक भारत में प्राप्त अपनी पेशेवर योग्यताओं का उपयोग करके सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे।
भारत के लिए महत्व
- निर्यात में वृद्धि: FTA से भारत के EU को निर्यात (लगभग USD 16.6 अरब) में वृद्धि होने और EU के लगभग USD 2 ट्रिलियन इंजीनियरिंग वस्तुओं के आयात में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
- समुद्री निर्यात: 100% व्यापार मूल्य को कवर करने वाली वरीयता प्राप्त पहुँच, 26% तक शुल्क में कमी के साथ EU समुद्री बाज़ार को आयात के लिए खोलेगी।
- यह बढ़ी हुई बाज़ार पहुँच भारत के समुद्री निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी और आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल तथा भारत की नीली अर्थव्यवस्था में तटीय समुदायों को सशक्त बनाएगी।
- श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए लाभ: वस्त्र, परिधान, समुद्री, चमड़ा, जूते, रसायन, प्लास्टिक/रबर, खेल सामग्री, खिलौने, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों को FTA लागू होते ही शून्य शुल्क मिलेगा तथा इस प्रकार EU बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
- EU के उच्च तकनीकी उत्पादों का आयात भारत के आयात स्रोतों में विविधता लाएगा, जिससे व्यवसायों की लागत घटेगी, उपभोक्ताओं को लाभ होगा और भारतीय व्यवसायों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल होने के अवसर मिलेंगे।
- कृषि पर प्रभाव: भारत ने अपने कृषि निर्यातों के लिए वरीयता प्राप्त बाज़ार पहुँच प्राप्त की है, जिसमें प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, चाय, कॉफी, मसाले, अंगूर, घेरकिन और खीरे, भेड़ एवं मेमने का मांस, स्वीट कॉर्न, सूखा प्याज़ तथा अन्य फल एवं सब्ज़ी उत्पाद शामिल हैं।
- इससे ग्रामीण आय, महिलाओं की भागीदारी और यूरोप में भारत की एक प्रीमियम, विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थिति सुदृढ़ होगी।

| भारत – EU व्यापार संबंध – EU भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसने 2024 में €120 अरब मूल्य का वस्तुओं का व्यापार किया, जो भारत के कुल व्यापार का 11.5% है। – भारत EU का 9वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो 2024 में EU के कुल वस्तु व्यापार का 2.4% है, जबकि USA (17.3%), चीन (14.6%) और UK (10.1%) इससे कहीं आगे हैं। – EU और भारत के बीच वस्तुओं का व्यापार विगत दशक में लगभग 90% बढ़ा है। – EU का भारत से आयात मुख्यतः मशीनरी और उपकरण, रसायन, बेस मेटल, खनिज उत्पाद एवं वस्त्रों से होता है। – EU का भारत को मुख्य निर्यात मशीनरी और उपकरण, परिवहन साधन एवं रसायन हैं। – सेवाओं में व्यापार 2023 में €59.7 अरब रहा (जिसमें EU का निर्यात €26 अरब था)। – भारत में EU के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का हिस्सा 2019 में €82.3 अरब से बढ़कर 2023 में €140.1 अरब हो गया। – लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियाँ भारत में विद्यमान हैं। ![]() |
स्रोत: PIB
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