कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और जैव विनिर्माण

पाठ्यक्रम: GS3/IT की भूमिका, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 

संदर्भ

  • वैश्विक उद्योगों में AI आधारित सटीक जैव-उत्पादन तीव्रता से बढ़ रहा है, और भारत की इस क्षेत्र में कोशिशें स्पष्ट रूप से सामने आ रही हैं। हालांकि, नीति-निर्माण और नवाचार में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

जैव-निर्माण (Biomanufacturing) क्या है?

  • यह जीवित कोशिकाओं और जैविक प्रणालियों का उपयोग कर व्यावसायिक उत्पादों के निर्माण से जुड़ा है—जिसमें जीवन रक्षक टीके एवं जैविक दवाएँ, जैव-ईंधन, एंजाइम, बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक तथा उन्नत सामग्री शामिल हैं। 
  • सिंथेटिक बायोलॉजी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं औद्योगिक जैव-तकनीक के समागम ने इसके दायरे को स्वास्थ्य देखभाल, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और सामग्री विज्ञान सहित कई क्षेत्रों तक फैला दिया है। 
  • भारत वैश्विक टीकों का 60% से अधिक उत्पादन करता है, जिससे इसकी औद्योगिक जैव-निर्माण क्षमता प्रदर्शित होती है, और इसे प्रायः“विश्व की फार्मेसी” कहा जाता है।

जैव-निर्माण में AI की भूमिका

  • AI-संचालित प्रक्रिया अनुकूलन: AI-आधारित स्वचालन तापमान, पीएच, और पोषक तत्वों की आपूर्ति को समायोजित कर दक्षता में सुधार एवं लागत में कमी कर सकता है।
  • तेज़ दवा खोज और जैव-फार्मास्युटिकल उत्पादन: AI अणु मॉडलिंग को गति देता है, जिससे शोधकर्ताओं को प्रोटीन संरचना की भविष्यवाणी और दवा निर्माण को अनुकूलित करने में सहायता मिलती है।
  • टीका उत्पादन में AI: AI आनुवंशिक डेटा का विश्लेषण कर mRNA-आधारित टीकों को तेजी से डिज़ाइन करने में सहायता करता है, जिससे महामारी की तैयारियों में सुधार होता है।
  • भविष्यवाणी रखरखाव और स्मार्ट निर्माण: AI जैव-निर्माण संयंत्रों में उपकरण विफलताओं की भविष्यवाणी कर डाउनटाइम को कम करने और संसाधन उपयोग को अनुकूलित कर सकता है।
  • आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स अनुकूलन: AI-संचालित प्लेटफॉर्म जैविक उत्पादों के परिवहन एवं भंडारण को मांग में उतार-चढ़ाव की भविष्यवाणी करके और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स को अनुकूलित करके सुधारते हैं।
  • ब्लॉकचेन के साथ AI का एकीकरण: जैव-निर्माण आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।

नीति और नियमन में चुनौतियाँ

  • डेटा और AI एकीकरण में अंतर: AI-संचालित जैव-निर्माण को बड़े पैमाने की जैव-सूचना संरचना, पूर्वानुमान मॉडलिंग उपकरणों और वास्तविक समय विश्लेषण की आवश्यकता होती है।
  • भारत में AI जैव-तकनीक नियमन: वर्तमान में बिखरा हुआ है, जिससे निर्बाध एकीकरण में बाधाएँ आती हैं।
  • वित्तपोषण और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र: AI-आधारित स्वचालन और सिंथेटिक बायोलॉजी अनुसंधान के लिए उच्च पूंजी निवेश आवश्यक है।
  • बौद्धिक संपदा और नैतिक नियमन: AI-जनित जैव-तकनीकी नवाचार पारंपरिक पेटेंट कानूनों को चुनौती देता है।
  • उत्पादन विस्तार और कार्यबल उन्नयन: AI-संचालित जैव-निर्माण के लिए उन्नत रोबोटिक्स और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

प्रमुख सरकारी पहल

  • राष्ट्रीय जैव-तकनीक विकास रणनीति: जैव-औद्योगिक विकास पर केंद्रित है, लेकिन AI एकीकरण के लिए और अधिक प्रत्यक्ष प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
  • राष्ट्रीय जैव-निर्माण नीति (प्रस्तावित): जैव-निर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने और स्थिरता को बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा तैयार की गई।
  • PLI योजना: जैव-फार्मास्युटिकल, एंजाइम और किण्वन-आधारित इनपुट के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।
  • शैक्षणिक-औद्योगिक सहयोग: प्रमुख संस्थान जैसे IISc, IITs और DBT-समर्थित जैव-तकनीक पार्क जैव-निर्माण समाधान के नवाचार इंजन बन गए हैं।

नीति सिफारिशें

  • AI-जैव-निर्माण नियामक ढाँचा स्थापित करें
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा दें
  • AI और जैव-तकनीक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करें
  • AI-आधारित अनुपालन उपकरण विकसित करें

आगे का राह

  • जैव-निर्माण में तेजी लाने के लिए बायोफाउंड्री और साझा बुनियादी ढांचे को मजबूत करें।
  • हरित आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा दें।
  • AI-संचालित नवाचारों के लिए अनुमोदन तथा आईपी ढाँचों को सुव्यवस्थित करें

Source: TH

 

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